भोपाल में जुए के अड्डे पर छापे के बाद थाना प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मी निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कोतवाली थाने के थाना प्रभारी प्रभात गोड़ सहित तीन पुलिसकर्मियों को 16 सितंबर 2026 को निलंबित कर दिया गया, जब एसीपी संतोष पटेल के नेतृत्व में मारे गए छापे में चौक बाजार क्षेत्र में जुए का बड़ा अड्डा पकड़ा गया। जाँच में सामने आया कि स्थानीय पुलिस को इस अड्डे की जानकारी थी, फिर भी कार्रवाई नहीं की गई।
मुख्य घटनाक्रम
कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चौक बाजार इलाके में एसीपी संतोष पटेल की अगुवाई में पुलिस दल ने छापा मारा। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग एक स्थान पर जुआ खेलते पाए गए। छापे में आरोपियों के पास से ₹2 लाख से अधिक की नकदी जब्त की गई।
गौरतलब है कि यह छापा तब और अधिक गंभीर हो गया जब यह उजागर हुआ कि कोतवाली थाने की पुलिस को इस जुए के अड्डे की जानकारी पहले से थी। वरिष्ठ अधिकारियों ने थाना प्रभारी और संबंधित पुलिसकर्मियों को कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे, लेकिन इसके बावजूद अड्डा लगातार चलता रहा।
किन पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
लापरवाही और निष्क्रियता उजागर होने के बाद उच्च अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी प्रभात गोड़, सहायक उप निरीक्षक राकेश गुर्जर और बीट प्रभारी आरक्षक नरेंद्र रावत को निलंबित कर दिया। तीनों पर आरोप है कि शिकायतें मिलने और निर्देश दिए जाने के बाद भी उन्होंने जुए के अड्डे के विरुद्ध कोई कदम नहीं उठाया।
आगे की जाँच
सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस जुए के अड्डे से कौन-से व्यक्ति जुड़े हुए हैं और इसे किसका राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण हासिल था। जाँच के दायरे में अड्डे के संचालकों की पहचान भी शामिल है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य प्रदेश में पुलिस अनुशासन और भ्रष्टाचार पर जनता की नज़र लगातार बनी हुई है। इस घटना से यह सवाल भी उठता है कि क्या जुए के अड्डों को ऊपर से संरक्षण मिल रहा था, जिसकी जाँच अभी जारी है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
कानून व्यवस्था के जानकारों का कहना है कि थाना स्तर पर इस तरह की निष्क्रियता तब तक नहीं रुकती जब तक जवाबदेही की कड़ी ऊपर तक नहीं जाती। इस मामले में निलंबन एक प्रारंभिक कदम है, लेकिन संरक्षण का पूरा नेटवर्क उजागर होना अभी बाकी है।