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बीएचयू बिरला छात्रावास: 3 फीट से 9 फीट बाउंड्री वॉल पर विवाद, छात्रों ने कुलपति को सौंपा ज्ञापन

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बीएचयू बिरला छात्रावास: 3 फीट से 9 फीट बाउंड्री वॉल पर विवाद, छात्रों ने कुलपति को सौंपा ज्ञापन

सारांश

बीएचयू के बिरला छात्रावास की 3 फीट दीवार को 9 फीट करने की योजना ने विरासत बनाम प्रशासन की लड़ाई छेड़ दी है। छात्रों ने कुलपति को ज्ञापन सौंपा और आंदोलन की चेतावनी दी — रुईया छात्रावास के बाद यह दूसरी बड़ी संरचनात्मक टकराहट है।

मुख्य बातें

बीएचयू के बिरला छात्रावास की 3 फीट बाउंड्री वॉल को 9 फीट ऊँचा करने की प्रशासनिक योजना पर विवाद।
छात्रों ने 8 जून को कुलपति और कुलसचिव को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।
छात्र अभय सिंह ने निर्माण को 'जेल जैसी दीवार' बताते हुए कड़ा विरोध जताया।
इससे पहले रुईया छात्रावास में भी संरचनात्मक बदलाव के बाद उसकी मूल सुंदरता नष्ट होने का आरोप लगाया जा चुका है।
निर्माण न रुकने पर छात्रों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी; प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी के बिरला छात्रावास की 3 फीट ऊँची बाउंड्री वॉल को 9 फीट तक ऊँचा करने की प्रशासनिक योजना के विरोध में छात्रों ने 8 जून को कुलपति और कुलसचिव को ज्ञापन सौंपा। छात्रों का कहना है कि यह निर्माण छात्रावास की ऐतिहासिक स्थापत्य शैली और सांस्कृतिक विरासत को स्थायी नुकसान पहुँचाएगा।

विवाद की जड़

छात्रों के अनुसार, बिरला छात्रावास केवल एक आवासीय परिसर नहीं, बल्कि बीएचयू की गौरवशाली परंपरा, समृद्ध इतिहास और विशिष्ट वास्तुकला का जीवंत प्रतीक है। दशकों से इस छात्रावास की पहचान उसके विशाल खुले परिसर, हरित वातावरण और पारंपरिक स्थापत्य शैली से रही है। छात्रों का आरोप है कि 9 फीट की ऊँची दीवार खड़ी करने से यह खुला और भव्य स्वरूप हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।

छात्रों की मुख्य आपत्तियाँ

छात्र अभय सिंह ने कहा, 'बिरला छात्रावास के चारों तरफ दीवार खड़ी करके उसके मूल स्वरूप को खत्म करने की तैयारी की जा रही है। जैसे जेल की दीवारें होती हैं, वैसा बनाकर प्रशासन हमें रखना चाहता है, जो हम बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।' छात्रों ने यह भी तर्क दिया कि विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण प्रशासन की केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति नैतिक दायित्व भी है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब बीएचयू के किसी छात्रावास में संरचनात्मक परिवर्तन को लेकर विवाद उठा हो। छात्रों ने बताया कि इससे पहले रुईया छात्रावास को तोड़कर ऊँचा किया गया था, जिसके बाद उसकी मूल सुंदरता पूरी तरह नष्ट हो गई। छात्रों का कहना है कि यह ऐसे समय में आया है जब विश्वविद्यालय अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का दावा करता है।

प्रशासन पर आरोप

बिरला छात्रावास के निवासियों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन जानबूझकर ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट करने पर तुला हुआ है। उनका कहना है कि 3 फीट की मौजूदा दीवार को 9 फीट तक ऊँचा करने से छात्रों को 'कैदियों की तरह चार दीवारों में बंद' कर दिया जाएगा। छात्रों ने माँग की कि प्रशासन बिरला छात्रावास की मूल वास्तुकला और पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए।

आंदोलन की चेतावनी

छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर निर्माण कार्य तत्काल नहीं रोका गया, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन में कुलपति और कुलसचिव से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की गई है। अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या

ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब सभी की नज़रें बीएचयू प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि निर्माण कार्य जारी रहा, तो छात्र संगठित विरोध की ओर बढ़ सकते हैं — जो विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण की नीति पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो राष्ट्रीय महत्व की संस्था है, पर यह दायित्व और भी बड़ा हो जाता है कि वह निर्माण निर्णयों में छात्रों और विरासत विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित करे। बिना पारदर्शी परामर्श प्रक्रिया के लिए गए ऐसे फैसले संस्थागत विश्वास को कमज़ोर करते हैं।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएचयू बिरला छात्रावास बाउंड्री वॉल विवाद क्या है?
बीएचयू प्रशासन बिरला छात्रावास की मौजूदा 3 फीट ऊँची बाउंड्री वॉल को 9 फीट तक ऊँचा करने की योजना बना रहा है। छात्रों का कहना है कि इससे छात्रावास की ऐतिहासिक स्थापत्य शैली और खुला परिसर नष्ट हो जाएगा।
छात्रों ने किसे और क्यों ज्ञापन सौंपा?
छात्रों ने 8 जून को बीएचयू के कुलपति और कुलसचिव को ज्ञापन सौंपा, जिसमें निर्माण कार्य तत्काल रोकने और बिरला छात्रावास की मूल वास्तुकला को संरक्षित रखने की माँग की गई। उनका तर्क है कि यह केवल कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक दायित्व भी है।
रुईया छात्रावास का इस विवाद से क्या संबंध है?
छात्रों ने बताया कि इससे पहले रुईया छात्रावास को भी तोड़कर ऊँचा किया गया था, जिसके बाद उसकी मूल सुंदरता पूरी तरह नष्ट हो गई। वे इसे एक पैटर्न के रूप में देख रहे हैं जिसमें प्रशासन पर ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट करने का आरोप है।
छात्रों ने आगे क्या करने की चेतावनी दी है?
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि अगर निर्माण कार्य तत्काल नहीं रोका गया तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
बिरला छात्रावास बीएचयू के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
बिरला छात्रावास बीएचयू की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है, जो अपनी पारंपरिक स्थापत्य शैली, विशाल खुले परिसर और हरित वातावरण के लिए जाना जाता है। छात्रों के अनुसार यह विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग है।
राष्ट्र प्रेस
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