बिहार में बैंकों की रैंकिंग: SBI रेड जोन में, IDFC फर्स्ट टॉप पर; विकास आयुक्त ने दी सख्त चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने 24 अक्टूबर 2026 को पटना के पुराना सचिवालय स्थित मुख्य सभाकक्ष में आयोजित उच्च स्तरीय तृतीय समीक्षा बैठक में राज्य के कम प्रदर्शन करने वाले बैंकों को कड़ी चेतावनी दी। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक साख योजना की प्रगति, साख-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत ऋण वितरण की विस्तृत समीक्षा की गई।
100 अंकों का वैज्ञानिक मापन सूचकांक
इस बैठक की सबसे उल्लेखनीय पहल 100 अंकों के वैज्ञानिक मापन सूचकांक की शुरुआत रही, जिसके तहत राज्य में कार्यरत बैंकों को तीन श्रेणियों — ग्रीन जोन, येलो जोन और रेड जोन — में वर्गीकृत किया गया है। ग्रीन जोन (50 या अधिक अंक) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बैंकों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 74 अंकों के साथ शीर्ष पर रहा। जम्मू एंड कश्मीर बैंक और आरबीएल बैंक को 68-68 अंक, एचडीएफसी बैंक को 65, बैंक ऑफ बड़ौदा को 64, उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक को 63 और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 52 अंक मिले।
येलो जोन (40 से 50 अंक) में आईसीआईसीआई बैंक और बैंक ऑफ इंडिया को 47-47 अंक, पंजाब नेशनल बैंक को 45, एक्सिस बैंक, यस बैंक और यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक को 42-42 तथा इंडियन बैंक को 40 अंक प्राप्त हुए।
चिंताजनक रूप से रेड जोन (40 से कम अंक) में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को केवल 32 अंक और केनरा बैंक को 27 अंक मिले। आईडीबीआई बैंक, बंधन बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक को 26-26 अंक, यूको बैंक को 35 और इंडियन ओवरसीज बैंक व सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 37-37 अंक मिले।
वार्षिक साख योजना और ऋण प्रवाह की स्थिति
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार की वार्षिक साख योजना का आकार बढ़ाकर ₹4.95 लाख करोड़ किया गया है — जो राज्य के इस वर्ष के करीब ₹1 लाख 25 हजार करोड़ के योजना आकार से लगभग चार गुना अधिक है। इस निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध सितंबर 2026 तिमाही में राज्य ने ₹1 लाख 89 हजार 343 करोड़ (38.25%) की उपलब्धि हासिल की है।
विकास आयुक्त ने रेखांकित किया कि यह प्रगति पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की इसी छमाही की तुलना में ₹46 हजार 228 करोड़ अधिक है। एमएसएमई क्षेत्र ने सर्वाधिक उत्साहजनक प्रदर्शन किया — ₹1 लाख 59 हजार 632 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹84 हजार 91 करोड़ (52.68%) का ऋण वितरित हुआ। कृषि क्षेत्र में ₹1,57,015 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध ₹43,967.17 करोड़ (28.00%) और कुल प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र में ₹3,55,532 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष ₹1,30,619 करोड़ (36.74%) का ऋण वितरित किया गया है।
सीडी रेशियो और बैंकिंग आँकड़े
गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत में बिहार ने पहली बार 60.21% का ऐतिहासिक साख-जमा अनुपात हासिल किया था। यह सकारात्मक गति इस वित्तीय वर्ष में भी बरकरार है और 30 सितंबर 2026 तक राज्य का समग्र सीडी रेशियो 60.17% पर बना हुआ है। वर्तमान में राज्य में कुल जमा राशि बढ़कर ₹6,49,225 करोड़ और कुल बकाया साख ₹3,90,655 करोड़ के नए स्तर पर पहुँच गई है। पिछले वर्ष की तुलना में जमा में ₹33,797 करोड़ और ऋण प्रवाह में ₹20,092 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई।
जनकल्याणकारी योजनाओं में ऋण प्रवाह
विकास आयुक्त ने किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, पीएम स्वनिधि और पीएम विश्वकर्मा जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने का निर्देश दिया। आंकड़ों के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड के तहत 7,37,906 खातों के माध्यम से ₹8,344.70 करोड़ का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिसमें 7,12,383 खातों का नवीनीकरण शामिल है। पशुपालन में ₹605.01 करोड़ और मत्स्य पालन में ₹11.12 करोड़ का ऋण दिया गया।
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में 13,911 आवेदन स्वीकृत कर ₹28,451.21 लाख की राशि जारी की गई। पीएम स्वनिधि योजना के तहत 2,17,731 आवेदन स्वीकृत कर ₹2,09,959 लाख का ऋण वितरित हुआ। पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना और पीएम विश्वकर्मा योजना के माध्यम से क्रमशः 2,748 उद्योगों और 28,625 से अधिक शिल्पकारों को वित्तीय मुख्यधारा से जोड़ा गया।
विकास आयुक्त की कड़ी चेतावनी
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने रेड जोन में शामिल बैंकों को मिशन मोड में काम करने का कड़ा निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिन बड़े बैंकों के पास राज्य की भारी जमा पूंजी है, उनका सीडी रेशियो 50% से कम होना गंभीर विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार की जनता के पैसे को बिहार के ही कृषि, एमएसएमई, स्टार्टअप और बुनियादी ढाँचे के लिए ऋण के माध्यम से वापस निवेश करना होगा। साथ ही बैंकों को ऋण आवेदनों की पेंडेंसी जल्द समाप्त करने और केसीसी, पीएम विश्वकर्मा तथा रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की योजनाओं में लोन रिजेक्शन दर न्यूनतम करने की हिदायत दी गई। बैठक में राज्य सरकार ने ऋण निगरानी तंत्र में चार नई कल्याणकारी योजनाओं को भी शामिल किया। आने वाले महीनों में इन निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा अगली बैठक में की जाएगी।