29 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बिहार CM सम्राट चौधरी का ऐलान: अंतरिक्ष तकनीक और रिमोट सेंसिंग से मिलेगी राज्य के विकास को नई उड़ान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बिहार CM सम्राट चौधरी का ऐलान: अंतरिक्ष तकनीक और रिमोट सेंसिंग से मिलेगी राज्य के विकास को नई उड़ान

सारांश

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में स्पेस एप्लीकेशन वर्कशॉप-2026 में 'टेककनेक्ट' पोर्टल लॉन्च किया और BIRSAC-SOI के बीच MoU पर हस्ताक्षर हुए। अंतरिक्ष तकनीक को बाढ़ प्रबंधन, कृषि और शासन से जोड़ने की यह कोशिश बिहार के तकनीकी रूपांतरण की दिशा में एक ठोस कदम है।

मुख्य बातें

बिहार CM सम्राट चौधरी ने 29 अक्टूबर 2026 को पटना में स्पेस एप्लीकेशन एडॉप्शन वर्कशॉप-2026 को संबोधित किया।
'टेककनेक्ट' पोर्टल का शुभारंभ और BIRSAC व सर्वे ऑफ इंडिया के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर।
वर्षा में 32 प्रतिशत की कमी के बावजूद गंगा, सोन और गंडक नदियों के जलस्तर पर असर; रिमोट सेंसिंग से बाढ़ प्रबंधन पर ज़ोर।
इंजीनियरिंग कॉलेजों में ₹10 और पॉलिटेक्निक में ₹5 फीस से तकनीकी शिक्षा सुलभ बनाने की पहल।
ऐतिहासिक विरासत से प्रेरित 12 नई टाउनशिप विकसित करने की योजना का उल्लेख।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 29 अक्टूबर 2026 को पटना में स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष आधारित तकनीक, रिमोट सेंसिंग और वैज्ञानिक नवाचार राज्य की विकास यात्रा को नई गति देंगे और शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावशाली बनाएंगे। उन्होंने तकनीकी विशेषज्ञों से अपील की कि वे बिहार की विशिष्ट ज़रूरतों के अनुरूप व्यावहारिक समाधान तैयार करें, जिनका सीधा लाभ किसानों, आम नागरिकों और प्रशासन को मिले।

कार्यशाला और नई पहलें

मुख्यमंत्री डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी, पटना में आयोजित दो दिवसीय 'स्पेस एप्लीकेशन एडॉप्शन वर्कशॉप-2026' को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यशाला की थीम 'प्रगतिशील बिहार के लिए अंतरिक्ष आधारित समाधानों का उपयोग कर शासन को सशक्त बनाना' रखी गई है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 'टेककनेक्ट' पोर्टल का औपचारिक शुभारंभ किया।

इसके अतिरिक्त, बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (BIRSAC) और सर्वे ऑफ इंडिया (SOI) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इन पहलों का मूल उद्देश्य तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना और अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों के जरिए विकास योजनाओं की जमीनी प्रभावशीलता सुनिश्चित करना है।

विकसित भारत और समृद्ध बिहार का संकल्प

चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के लक्ष्य को साकार करने के लिए विज्ञान, तकनीक और नवाचार को सर्वोच्च प्राथमिकता देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि बिहार प्राचीन काल से ज्ञान और शिक्षा की भूमि रही है — आर्यभट्ट और आचार्य चाणक्य की विरासत को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर राज्य को नए विकास के आयाम तक पहुंचाया जा सकता है।

बाढ़ प्रबंधन में तकनीक की भूमिका

मुख्यमंत्री ने बिहार की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक — बाढ़ — पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि नेपाल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की ओर से आने वाले जल प्रवाह के कारण राज्य के कई इलाकों में प्रतिवर्ष बाढ़ की विकराल स्थिति उत्पन्न होती है। रिमोट सेंसिंग और वैज्ञानिक डेटा के जरिए बाढ़ की अग्रिम निगरानी, जल प्रबंधन, कृषि नियोजन और विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की संभावनाएं बढ़ती हैं।

चौधरी ने यह भी बताया कि इस वर्ष वर्षा में लगभग 32 प्रतिशत की कमी के बावजूद बाहरी क्षेत्रों से आए पानी के चलते गंगा, सोन और गंडक जैसी नदियों के जलस्तर पर गहरा असर देखा गया। ऐसे में वैज्ञानिक पूर्वानुमान, जलस्तर की सतत निगरानी और समन्वित जल प्रबंधन की अहमियत और भी बढ़ जाती है। उन्होंने गंगा जल का पेयजल और सिंचाई के लिए वर्षभर समुचित उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस पहल पर बल दिया।

तकनीकी शिक्षा और नगर विकास

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार तकनीकी शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाने हेतु प्रतिबद्ध है। इंजीनियरिंग कॉलेजों में मात्र ₹10 और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में ₹5 की नाममात्र फीस की व्यवस्था युवाओं को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा तक पहुँच देती है। इसके साथ ही उन्होंने ऐतिहासिक विरासत से प्रेरित 12 नई टाउनशिप विकसित करने की योजना का उल्लेख करते हुए नियोजित शहरी विकास में आधुनिक तकनीक के योगदान पर भी ज़ोर दिया।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे। चौधरी ने संबंधित विभागों और संस्थानों से आपसी समन्वय बढ़ाने तथा नवाचार को जन-हित से जोड़ने का आह्वान किया। यह कार्यशाला बिहार में तकनीक-आधारित शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, और आने वाले महीनों में इसके व्यावहारिक परिणामों पर सबकी नजर रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन BIRSAC-SOI MoU और टेककनेक्ट पोर्टल जैसी संस्थागत पहलें इस बार कुछ ठोस ढाँचा देती दिखती हैं। असली परीक्षा यह होगी कि ये उपकरण बाढ़-पूर्व चेतावनी और कृषि नियोजन जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों में कितने कारगर साबित होते हैं — राज्य में हर वर्ष लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित होते हैं। वर्षा में 32 प्रतिशत की कमी के बावजूद नदियों के उफनने का उल्लेख इस बात की ओर इशारा करता है कि बिहार की जल-चुनौती मानसून से नहीं, बल्कि बहु-राज्यीय और सीमापार जल-प्रवाह से है — जिसे सिर्फ तकनीक से नहीं, बल्कि अंतर-राज्यीय राजनीतिक समन्वय से भी सुलझाना होगा।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्पेस एप्लीकेशन एडॉप्शन वर्कशॉप-2026 क्या है?
यह पटना के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला है, जिसकी थीम प्रगतिशील बिहार के लिए अंतरिक्ष आधारित समाधानों से शासन को सशक्त बनाना है। इसमें राज्य के विकास में अंतरिक्ष तकनीक और रिमोट सेंसिंग के व्यावहारिक उपयोग पर विचार-विमर्श किया गया।
टेककनेक्ट पोर्टल का क्या उद्देश्य है?
टेककनेक्ट पोर्टल को CM सम्राट चौधरी ने 29 अक्टूबर 2026 को लॉन्च किया। इसका उद्देश्य तकनीकी संस्थानों, विशेषज्ञों और सरकारी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर नवाचारों को जन-हित की योजनाओं से जोड़ना है।
BIRSAC और सर्वे ऑफ इंडिया के बीच MoU से बिहार को क्या फायदा होगा?
बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (BIRSAC) और सर्वे ऑफ इंडिया (SOI) के बीच हस्ताक्षरित इस MoU से उपग्रह डेटा, भूमि-मानचित्रण और भौगोलिक सूचना प्रणाली के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग बढ़ेगा। इससे बाढ़ प्रबंधन, कृषि नियोजन और नगर विकास योजनाओं को वैज्ञानिक आधार मिलेगा।
बिहार में बाढ़ की समस्या के लिए रिमोट सेंसिंग कैसे मददगार होगी?
CM चौधरी के अनुसार, रिमोट सेंसिंग से नेपाल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से आने वाले जल-प्रवाह की अग्रिम निगरानी संभव होगी। इससे गंगा, सोन और गंडक नदियों के जलस्तर का वैज्ञानिक पूर्वानुमान लगाकर समय रहते राहत एवं बचाव की कार्रवाई की जा सकेगी।
बिहार में तकनीकी शिक्षा की फीस कितनी है?
राज्य सरकार ने इंजीनियरिंग कॉलेजों में ₹10 और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में ₹5 की नाममात्र फीस तय की है। CM चौधरी ने इसे युवाओं को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा तक पहुँच देने की दिशा में एक अहम कदम बताया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 1 साल पहले