बिहार एसटीएफ ने 350 कॉन्ट्रैक्ट किलर की सूची बनाई, 1,716 अपराधी गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
बिहार पुलिस विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने राज्यभर में सक्रिय 350 से अधिक संदिग्ध कॉन्ट्रैक्ट किलर का व्यापक डेटाबेस तैयार कर लिया है और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए एक लक्षित अभियान शुरू किया है। एसटीएफ डीआईजी संजय कुमार सिंह ने 22 अगस्त 2026 को पटना स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी साझा की।
मुख्य घटनाक्रम
जनवरी 2026 से अब तक एसटीएफ ने 1,716 कुख्यात और 'शीर्ष 10' श्रेणी के अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 63 ऐसे अपराधी शामिल हैं जिन पर नकद इनाम घोषित था। इसके अलावा 27 अन्य वांछित अपराधियों को बिहार के बाहर से भी पकड़ा गया है।
एसटीएफ के खुफिया नेटवर्क ने 94 नियोजित आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने से पहले ही विफल कर दिया — इनमें 40 हत्या के मामले, डकैती और छीन-झपट की 48 घटनाएँ और 6 अन्य आपराधिक प्रकरण शामिल हैं।
एनकाउंटर और जनहानि
पिछले आठ महीनों में अपराधियों के साथ 19 मुठभेड़ें हुई हैं। इन घटनाओं में 3 अपराधी मारे गए और 18 घायल हुए, जबकि 2 पुलिसकर्मी कर्तव्य पालन के दौरान शहीद हो गए। यह आँकड़ा दर्शाता है कि बिहार में संगठित अपराध के खिलाफ चल रहा अभियान केवल कागज़ी नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी सक्रिय है।
संपत्ति और हथियार बरामदगी
बैंक, आभूषण और सोने की लूट में कथित तौर पर संलिप्त गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई में इस वर्ष अब तक लगभग 10 किलो लूटा हुआ सोना, 50 किलो चाँदी और ₹11.97 लाख नकद बरामद किए गए हैं। बिहार के बाहर — मैसूरु में एक आभूषण दुकान, दाउदनगर थाना क्षेत्र और क्योंझर में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में हुई डकैतियों के मामलों में 113 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
इसी अभियान के तहत एसटीएफ ने इस वर्ष 33 अवैध मिनी-गन फैक्ट्रियाँ ध्वस्त कीं। बरामदगी में 1 एके-47, 2 इंसास राइफलें, 398 देसी हथियार और लगभग 1,300 राउंड गोला-बारूद शामिल हैं।
माफिया नेटवर्क पर कसता शिकंजा
एसटीएफ संगठित अपराध का जिलावार डेटाबेस बनाए रख रही है, जिसके ज़रिए आपराधिक नेटवर्क की पहचान और उन्हें निशाना बनाना संभव हो रहा है। कथित भूमि माफियाओं की पहचान के बाद अधिकारियों ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत संभावित कार्रवाई के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को प्रस्ताव भेजे हैं।
आगे क्या
एसटीएफ के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट किलर के डेटाबेस के आधार पर गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटाबेस-आधारित पुलिसिंग का यह मॉडल, यदि पारदर्शी तरीके से लागू हो, तो संगठित अपराध पर दीर्घकालिक नियंत्रण में सहायक हो सकता है।