बिहार TRE-4 परीक्षा अब एकल चरण में होगी, छात्र आंदोलन के बाद सरकार ने 9 बड़े फैसले लिए
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार ने 27 अगस्त 2026 को पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर आंदोलनरत छात्रों की मांगें मान लीं — शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 अब एकल चरण में आयोजित की जाएगी और परीक्षा सुधार के लिए पटना उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी। शिक्षा विभाग के सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद छात्र प्रतिनिधिमंडल ने सर्वसम्मति से अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की।
मुख्य निर्णय
बैठक में छात्रों की सभी लिखित मांगों पर बिंदुवार चर्चा हुई और कुल नौ महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सबसे बड़ा निर्णय टीआरई-4 को एकल चरण में कराने का रहा। इसके साथ ही 'एक अभ्यर्थी, एक परिणाम' के सिद्धांत पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी।
सरकार ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा की पारदर्शिता से जाँच, बिहार कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं के समयबद्ध आयोजन, 1,799 दरोगा पदों की भर्ती परीक्षा की जाँच तथा सहायक प्राध्यापक नियुक्ति से पहले बिहार पात्रता परीक्षा आयोजित करने की मांग पर भी निर्णय लिया।
विशेषज्ञ समिति की भूमिका
परीक्षा सुधार के लिए पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित होने वाली विशेषज्ञ समिति के समक्ष शिकायतकर्ताओं को साक्ष्य के साथ अपना पक्ष और सुझाव रखने का अवसर दिया जाएगा। 1,799 दरोगा भर्ती की अग्रेतर प्रक्रिया भी इसी समिति की रिपोर्ट के बाद ही की जाएगी। बीपीएससी द्वारा आयोजित एईडीओ, सेनेटरी सहित परीक्षाओं में पेपर लीक की निष्पक्ष जाँच के लिए आर्थिक अपराध इकाई नियमानुसार कार्रवाई करेगी।
अन्य महत्वपूर्ण सहमतियाँ
बैठक में पुस्तकालयाध्यक्षों की रिक्तियों के अनुरूप बहाली प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने पर सहमति बनी। संविदा कर्मियों को भर्ती प्रक्रियाओं में अंक या वेटेज दिए जाने की स्थिति में अलग कोटा निर्धारित करने के मुद्दे पर उच्चस्तरीय समिति बनाकर विचार किया जाएगा। बिहार की सभी भर्ती प्रक्रियाओं में अधिकतम डोमिसाइल नीति लागू करने के संबंध में न्यायविद से प्राप्त परामर्श के अनुरूप कार्रवाई होगी। भर्ती परीक्षाओं में अधिकतम उम्र सीमा से जुड़े प्रस्ताव को भी समिति के समक्ष विचार के लिए रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि छात्रों की मांगों को लेकर सरकार शुरू से गंभीर रही है। उन्होंने कहा कि इस बार टीआरई-4 परीक्षा एकल चरण में आयोजित की जाएगी और छात्रों की मांगों के संबंध में नौ अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए हैं।
चौधरी ने यह भी बताया कि छात्रों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए 'विद्यार्थी सहयोग पोर्टल' और 'विद्यार्थी सहयोग शिविर' शुरू किए गए हैं, जिनके माध्यम से समस्याओं का समाधान 30 दिनों के भीतर किया जा रहा है।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञ समिति की अनुशंसाओं के आधार पर परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की उम्मीद है। बिहार कर्मचारी चयन आयोग जल्द परीक्षा कैलेंडर जारी कर समयबद्ध परीक्षाएँ कराएगा। गौरतलब है कि यह आंदोलन बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और समयबद्धता को लेकर लंबे समय से चल रहे असंतोष की परिणति था — और अब सरकार के इन फैसलों की असली परीक्षा उनके क्रियान्वयन में होगी।