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बिनपुर विधानसभा: भाजपा के डॉ. प्रनत टुडु ने 22,977 वोटों से टीएमसी को हराया

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बिनपुर विधानसभा: भाजपा के डॉ. प्रनत टुडु ने 22,977 वोटों से टीएमसी को हराया

सारांश

बिनपुर में भाजपा की जीत महज एक सीट की नहीं — यह झाड़ग्राम के आदिवासी इलाके में वामपंथ के पुराने गढ़ पर भगवा झंडे का फहराना है। डॉ. प्रनत टुडु की 22,977 वोटों की बढ़त बताती है कि पिछले दशक में भाजपा ने यहाँ कितनी गहरी जड़ें जमाई हैं।

मुख्य बातें

प्रनत टुडु (भाजपा) ने बिनपुर विधानसभा सीट पर 1,07,238 वोट पाकर जीत दर्ज की।
TMC की बीरबाहा हंसदा को 84,261 वोट मिले; हार का अंतर 22,977 वोट रहा।
CPI(M) के रबीन्द्रनाथ सरदार तीसरे ( 5,619 वोट ) और कांग्रेस की गोलापी सारेन चौथे ( 2,040 वोट ) स्थान पर रहीं।
मतदान 23 अप्रैल को पहले चरण में हुआ था; दोनों दलों ने इस बार उम्मीदवार बदले थे।
मतदाता सूची से 13,182 नाम हटाए गए, जाति/समुदायवार ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया।
बिनपुर कभी वामपंथ का गढ़ था; बीते 10 वर्षों में भाजपा यहाँ लगातार मज़बूत हुई है।

पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले की बिनपुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार डॉ. प्रनत टुडु ने 22,977 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रत्याशी बीरबाहा हंसदा को पराजित कर इस सीट पर भाजपा का परचम लहराया।

मतगणना के प्रमुख आँकड़े

डॉ. प्रनत टुडु को कुल 1,07,238 वोट मिले, जबकि टीएमसी की बीरबाहा हंसदा को 84,261 वोट प्राप्त हुए। तीसरे स्थान पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के रबीन्द्रनाथ सरदार रहे, जिन्हें 5,619 वोट मिले। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की उम्मीदवार गोलापी सारेन चौथे स्थान पर रहीं और उन्हें केवल 2,040 वोट मिले।

चुनाव की पृष्ठभूमि

बिनपुर विधानसभा क्षेत्र में पहले चरण में 23 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ था। इस सीट पर भाजपा और टीएमसी के बीच कड़ी टक्कर देखी गई, जिसमें अंततः भाजपा विजयी रही। गौरतलब है कि दोनों प्रमुख दलों ने इस बार अपने उम्मीदवार बदले थे। 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने देबनाथ हांसदा को मैदान में उतारा था, जिन्हें 1,00,277 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के पालन सारेन 60,783 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे।

सीट का राजनीतिक इतिहास

बिनपुर विधानसभा सीट का गठन वर्ष 1951 में हुआ था। प्रारंभिक वर्षों 1951 और 1957 में यह दो सदस्यीय सीट थी। दशकों के राजनीतिक इतिहास में CPI(M) ने यहाँ पाँच बार, CPI ने तीन बार, कांग्रेस ने तीन बार (अंतिम बार 1967 में), रीजनल झारखंड पार्टी ने चार बार और TMC ने दो बार जीत दर्ज की है। यह सीट कभी वामपंथ का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन बीते 10 वर्षों में भाजपा यहाँ तेज़ी से उभरी है।

मतदाता सूची विवाद

इस चुनाव में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) ने राजनीतिक अनिश्चितता की एक नई परत जोड़ी। बिनपुर में मुस्लिम आबादी बेहद कम होने के बावजूद, आधिकारिक तौर पर 13,182 नाम मृत्यु, डुप्लीकेशन और प्रवासन जैसे कारणों से मतदाता सूची से हटाए गए। हालाँकि जाति या समुदाय के आधार पर कोई विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे।

आगे का परिदृश्य

बिनपुर का यह नतीजा पश्चिम बंगाल में भाजपा की ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ती पकड़ का संकेत देता है। झाड़ग्राम जैसे जिलों में, जहाँ अधिकांश मतदाता ग्रामीण और आदिवासी समुदाय से हैं, भाजपा की यह जीत आने वाले राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

494 वोटों की बढ़त से 2026 में 22,977 वोटों की जीत तक का सफर बताता है कि आदिवासी मतदाताओं में भाजपा की पैठ गहरी हो रही है, लेकिन TMC के मुकाबले का अंतर 2021 की तुलना में सिकुड़ा भी है। असली सवाल यह है कि मतदाता सूची से 13,182 नामों का हटना — बिना जाति या समुदायवार ब्यौरे के — चुनावी पारदर्शिता पर क्या सवाल खड़े करता है। मुख्यधारा की कवरेज जीत के आँकड़े तो उठाती है, पर SIR की इस परत को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिनपुर विधानसभा सीट पर 2026 में कौन जीता?
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के डॉ. प्रनत टुडु ने बिनपुर विधानसभा सीट पर 22,977 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें 1,07,238 वोट मिले, जबकि TMC की बीरबाहा हंसदा को 84,261 वोट मिले।
बिनपुर सीट पर मतदान कब हुआ था?
बिनपुर विधानसभा क्षेत्र में पहले चरण के तहत 23 अप्रैल को मतदान हुआ था। यह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का हिस्सा था।
2021 में बिनपुर सीट का क्या परिणाम था?
2021 के विधानसभा चुनाव में TMC के देबनाथ हांसदा ने 1,00,277 वोट पाकर जीत दर्ज की थी। भाजपा के पालन सारेन 60,783 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे।
बिनपुर सीट से मतदाता सूची में 13,182 नाम क्यों हटाए गए?
SIR (विशेष सारांश पुनरीक्षण) के तहत मृत्यु, डुप्लीकेशन और प्रवासन जैसे कारणों से 13,182 नाम आधिकारिक रूप से मतदाता सूची से हटाए गए। हालाँकि जाति या समुदाय के आधार पर कोई विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया।
बिनपुर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास क्या है?
बिनपुर सीट 1951 में बनी थी और कभी वामपंथ का गढ़ मानी जाती थी। CPI(M) ने पाँच बार, कांग्रेस ने तीन बार, रीजनल झारखंड पार्टी ने चार बार और TMC ने दो बार यहाँ जीत दर्ज की है।
राष्ट्र प्रेस
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