बिनपुर विधानसभा: भाजपा के डॉ. प्रनत टुडु ने 22,977 वोटों से टीएमसी को हराया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले की बिनपुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार डॉ. प्रनत टुडु ने 22,977 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रत्याशी बीरबाहा हंसदा को पराजित कर इस सीट पर भाजपा का परचम लहराया।
मतगणना के प्रमुख आँकड़े
डॉ. प्रनत टुडु को कुल 1,07,238 वोट मिले, जबकि टीएमसी की बीरबाहा हंसदा को 84,261 वोट प्राप्त हुए। तीसरे स्थान पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के रबीन्द्रनाथ सरदार रहे, जिन्हें 5,619 वोट मिले। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की उम्मीदवार गोलापी सारेन चौथे स्थान पर रहीं और उन्हें केवल 2,040 वोट मिले।
चुनाव की पृष्ठभूमि
बिनपुर विधानसभा क्षेत्र में पहले चरण में 23 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ था। इस सीट पर भाजपा और टीएमसी के बीच कड़ी टक्कर देखी गई, जिसमें अंततः भाजपा विजयी रही। गौरतलब है कि दोनों प्रमुख दलों ने इस बार अपने उम्मीदवार बदले थे। 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने देबनाथ हांसदा को मैदान में उतारा था, जिन्हें 1,00,277 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के पालन सारेन 60,783 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे।
सीट का राजनीतिक इतिहास
बिनपुर विधानसभा सीट का गठन वर्ष 1951 में हुआ था। प्रारंभिक वर्षों 1951 और 1957 में यह दो सदस्यीय सीट थी। दशकों के राजनीतिक इतिहास में CPI(M) ने यहाँ पाँच बार, CPI ने तीन बार, कांग्रेस ने तीन बार (अंतिम बार 1967 में), रीजनल झारखंड पार्टी ने चार बार और TMC ने दो बार जीत दर्ज की है। यह सीट कभी वामपंथ का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन बीते 10 वर्षों में भाजपा यहाँ तेज़ी से उभरी है।
मतदाता सूची विवाद
इस चुनाव में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) ने राजनीतिक अनिश्चितता की एक नई परत जोड़ी। बिनपुर में मुस्लिम आबादी बेहद कम होने के बावजूद, आधिकारिक तौर पर 13,182 नाम मृत्यु, डुप्लीकेशन और प्रवासन जैसे कारणों से मतदाता सूची से हटाए गए। हालाँकि जाति या समुदाय के आधार पर कोई विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे।
आगे का परिदृश्य
बिनपुर का यह नतीजा पश्चिम बंगाल में भाजपा की ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ती पकड़ का संकेत देता है। झाड़ग्राम जैसे जिलों में, जहाँ अधिकांश मतदाता ग्रामीण और आदिवासी समुदाय से हैं, भाजपा की यह जीत आने वाले राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।