9 अगस्त 2026
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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 33 राज्य बोर्डों को ₹3.79 करोड़ वितरित, मध्य प्रदेश को सर्वाधिक हिस्सा

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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 33 राज्य बोर्डों को ₹3.79 करोड़ वितरित, मध्य प्रदेश को सर्वाधिक हिस्सा

सारांश

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने ABS योजना के तहत ₹3.79 करोड़ 33 राज्य बोर्डों और अनुसंधान संस्थानों में बाँटे। मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा शीर्ष लाभार्थी रहे। बायर, HM क्लॉज और एडवांटा जैसी कंपनियों से वसूली गई यह राशि नागोया प्रोटोकॉल के तहत न्यायसंगत लाभ-साझाकरण की दिशा में भारत का ठोस कदम है।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने ABS योजना के तहत ₹3.79 करोड़ वितरित किए।
लाभार्थियों में 33 राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB) , UTBC और कृषि जैव विविधता अनुसंधान संस्थान शामिल हैं।
सर्वाधिक राशि मध्य प्रदेश को ₹46.93 लाख , इसके बाद पश्चिम बंगाल को ₹44.76 लाख और ओडिशा को ₹44.08 लाख ।
ABS राशि बायर साइंस एंड इनोवेशन , HM क्लॉज इंडिया और एडवांटा एंटरप्राइजेज जैसी कंपनियों से वसूल की गई।
वितरण जैविक विविधता अधिनियम, 2002 और नागोया प्रोटोकॉल के तहत किया गया।
ICAR-NBPGR और हिसार बोवाइन स्पर्म स्टेशन को भी इस राशि का हिस्सा मिला।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने पहुंच और लाभ साझाकरण (ABS) योजना के तहत 33 राज्य जैव विविधता बोर्डों (SBB), केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों (UTBC) और विभिन्न कृषि जैव विविधता अनुसंधान संस्थानों को कुल ₹3.79 करोड़ वितरित किए हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एक अधिकारी ने 9 अगस्त को यह जानकारी दी। यह वितरण भारत के उस कानूनी ढाँचे का हिस्सा है जो जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से होने वाले लाभ को मूल स्रोत राज्यों तक पहुँचाना सुनिश्चित करता है।

किसे कितना मिला

वितरित की गई ₹3.79 करोड़ की ABS राशि में सबसे बड़ा हिस्सा — ₹46.93 लाखमध्य प्रदेश को मिला। इसके बाद पश्चिम बंगाल को ₹44.76 लाख और ओडिशा को ₹44.08 लाख जारी किए गए। राशि का आवंटन उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खेती के रकबे के आँकड़ों के आधार पर आनुपातिक रूप से किया गया, जहाँ संबंधित फसलें उगाई जाती हैं। यह डेटा कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने उपलब्ध कराया था।

अनुसंधान संस्थानों को भी लाभ

इस राशि का एक हिस्सा ICAR-नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज (NBPGR) और हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड के माध्यम से हिसार बोवाइन स्पर्म स्टेशन और अनुसंधान केंद्र को भी जारी किया गया। इससे स्पष्ट है कि ABS ढाँचे का लाभ केवल राज्य बोर्डों तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि जैव विविधता से जुड़े शोध संस्थान भी इसके दायरे में आते हैं।

किन कंपनियों से वसूली गई ABS राशि

मंत्रालय के बयान के अनुसार, सब्जियों और तिलहन के आनुवंशिक संसाधनों तक अनुसंधान और व्यावसायिक उपयोग के लिए पहुँच बनाने वाली कंपनियों — बायर साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड, HM क्लॉज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एडवांटा एंटरप्राइजेज लिमिटेड — से यह ABS राशि वसूल की गई। गौरतलब है कि इन कंपनियों ने बाज़ारों, व्यापारियों या बिचौलियों के माध्यम से जैविक संसाधनों तक पहुँच प्राप्त की थी, इसलिए पहुँच के मूल स्रोत की सटीक पहचान संभव नहीं हो सकी।

ABS फ्रेमवर्क और नागोया प्रोटोकॉल

भारत का ABS ढाँचा जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत लागू किया गया है और यह नागोया प्रोटोकॉल के अनुरूप है। यह सुनिश्चित करता है कि जब कोई उपयोगकर्ता — चाहे देशी हो या विदेशी — जैविक संसाधनों तक पहुँचता है, तो उससे होने वाले लाभ का उचित और न्यायसंगत बंटवारा मूल समुदायों और राज्यों के साथ हो। जहाँ मूल स्रोत की पहचान नहीं हो सकी, वहाँ NBA ने एक विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार और प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित लाभ-साझाकरण के तौर-तरीके अपनाए।

आगे की राह

यह वितरण भारत में ABS तंत्र को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे अधिक कंपनियाँ भारत के जैविक संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग करेंगी, ABS के तहत वसूली जाने वाली राशि और उसका वितरण दायरा और व्यापक होता जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह इस बात का संकेत है कि भारत का ABS तंत्र धीरे-धीरे कागज़ से ज़मीन पर उतर रहा है। असली सवाल यह है कि क्या यह राशि अंततः उन स्थानीय समुदायों तक पहुँचती है जो वास्तव में इन जैविक संसाधनों के संरक्षक रहे हैं — या यह राज्य बोर्डों के खातों में ही सिमट जाती है। नागोया प्रोटोकॉल की भावना केवल राज्य स्तर पर धन हस्तांतरण नहीं, बल्कि समुदाय स्तर पर न्यायसंगत बंटवारा है। इस दिशा में पारदर्शी जवाबदेही ढाँचे की ज़रूरत अभी भी बनी हुई है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की ABS योजना क्या है?
पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS) योजना जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत लागू एक कानूनी व्यवस्था है, जो यह सुनिश्चित करती है कि भारत के जैविक संसाधनों का व्यावसायिक या अनुसंधान उपयोग करने वाली कंपनियाँ उससे होने वाले लाभ का उचित हिस्सा राज्य बोर्डों और मूल समुदायों के साथ साझा करें। यह नागोया प्रोटोकॉल के अनुरूप है।
₹3.79 करोड़ की राशि किन राज्यों को मिली?
सर्वाधिक ₹46.93 लाख मध्य प्रदेश को, ₹44.76 लाख पश्चिम बंगाल को और ₹44.08 लाख ओडिशा को मिले। राशि का वितरण कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के खेती के रकबे के आँकड़ों के आधार पर आनुपातिक रूप से किया गया।
किन कंपनियों से ABS राशि वसूल की गई?
बायर साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड, HM क्लॉज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एडवांटा एंटरप्राइजेज लिमिटेड से यह राशि वसूल की गई। ये कंपनियाँ सब्जियों और तिलहन के आनुवंशिक संसाधनों का अनुसंधान व व्यावसायिक उपयोग कर रही थीं।
जब मूल स्रोत की पहचान न हो सके तो NBA क्या करता है?
जब कंपनियाँ बाज़ारों या बिचौलियों के माध्यम से संसाधन प्राप्त करती हैं और मूल स्रोत की पहचान संभव नहीं होती, तो NBA एक विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार और प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित लाभ-साझाकरण के तौर-तरीके अपनाता है। यह व्यवस्था नागोया प्रोटोकॉल की भावना के अनुरूप है।
क्या अनुसंधान संस्थानों को भी इस योजना का लाभ मिलता है?
हाँ, ICAR-नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज (NBPGR) और हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड के माध्यम से हिसार बोवाइन स्पर्म स्टेशन और अनुसंधान केंद्र को भी इस राशि का हिस्सा जारी किया गया। इससे स्पष्ट है कि ABS का दायरा राज्य बोर्डों से आगे कृषि अनुसंधान संस्थानों तक भी फैला है।
राष्ट्र प्रेस
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