ओडिशा में 45,000 सरकारी नौकरियों के दावे पर बीजेडी का पलटवार, 39,000 पद पटनायक सरकार के कार्यकाल के
सारांश
मुख्य बातें
बीजू जनता दल (बीजेडी) ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को ओडिशा की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के उस दावे को चुनौती दी, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा था कि पिछले दो वर्षों में राज्य में 45,000 सरकारी पदों पर नियुक्तियाँ की गई हैं। बीजेडी का आरोप है कि इनमें से 39,000 पदों के लिए भर्ती विज्ञापन पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की सरकार के कार्यकाल में ही — वर्ष 2020 से 2023 के बीच — जारी किए गए थे।
बीजेडी का मुख्य आरोप
बीजेडी के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री माझी का दावा भ्रामक है। उन्होंने ओडिशा विधानसभा में दिए गए एक सरकारी जवाब का हवाला देते हुए तर्क दिया कि 45,000 नियुक्तियों में से केवल 6,000 पद ऐसे हैं, जिनके लिए भर्ती विज्ञापन भाजपा सरकार के कार्यकाल में निकाले गए।
मोहंती ने कहा, 'इसका मतलब है कि भाजपा सरकार ने केवल 6,000 नई सरकारी नियुक्तियाँ की हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि पिछले दो वर्षों में रोज़गार के क्षेत्र में किए गए वादों को सरकार पूरा नहीं कर पाई है।'
चुनावी वादों से कितनी दूर है सरकार
बीजेडी नेता ने याद दिलाया कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में पाँच वर्षों में 1.5 लाख सरकारी नौकरियाँ देने का वादा किया था। आनुपातिक गणना के अनुसार, दो वर्षों में कम-से-कम 65,000 नियुक्तियाँ होनी चाहिए थीं — जबकि बीजेडी के दावे के मुताबिक वास्तविक संख्या केवल 6,000 है। इसके अलावा, भाजपा ने निजी औद्योगिक क्षेत्र में 3.5 लाख युवाओं को रोज़गार दिलाने का भी वादा किया था, जो कथित तौर पर अब तक पूरा नहीं हुआ है।
भर्ती परीक्षाएँ रद्द और रिक्त पद
मोहंती ने आरोप लगाया कि पिछले 24 महीनों में 24 भर्ती परीक्षाएँ रद्द की गई हैं, जो भर्ती प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने में सरकार की अक्षमता को दर्शाता है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 तक राज्य में 94,485 सरकारी पद रिक्त पड़े हुए हैं।
बेरोज़गारी दर पर बीजेडी का दावा
बीजेडी ने यह भी दावा किया कि राज्य में बेरोज़गारी दर नवीन पटनायक सरकार के कार्यकाल में 0.9 प्रतिशत थी, जो भाजपा सरकार के अंतर्गत बढ़कर 3.5 प्रतिशत हो गई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार रोज़गार संकट का समाधान करने के बजाय जनता को गुमराह कर रही है।
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब ओडिशा में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने वाले हैं और विपक्ष रोज़गार के मुद्दे को राजनीतिक केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है। 94,485 रिक्त पदों को भरने की समयसीमा और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता अब सार्वजनिक बहस के केंद्र में होगी।