पंजाब में BJP की विचारधारा नहीं चलेगी: AAP सांसद मलविंदर सिंह कंग का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने 22 जून को स्पष्ट कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा पंजाब की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। यह बयान BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के चंडीगढ़ दौरे के बाद आया, जो पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पार्टी की ज़मीन तैयार करने पहुँचे थे।
नितिन नवीन का पंजाब दौरा
BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पंजाब प्रवास के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और 'युवा संवाद' कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं में ऊर्जा, नवाचार और आगे बढ़ने का संकल्प स्पष्ट रूप से दिखता है, जो विकसित पंजाब की मज़बूत आधारशिला है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवा शक्ति देश को आत्मनिर्भरता और विकास के नए आयामों की ओर ले जा रही है।
AAP का तीखा पलटवार
नवीन के दौरे पर AAP सांसद मलविंदर सिंह कंग ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि "BJP की नफरती सोच यहाँ सफल नहीं होगी।" कंग के अनुसार, BJP की राजनीति धर्म के आधार पर समाज को बाँटने और आपसी भाईचारे में दरार डालने की है।
कंग ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने दौरे में पंजाब के लिए विशेष पैकेज, किसानों के अधिकार और उनकी समस्याओं पर बात करेंगे, लेकिन वे केवल AAP की आलोचना करते नज़र आए। उन्होंने दावा किया कि "आज की BJP का कांग्रेसीकरण हो चुका है।"
AAP सरकार की गारंटियों का दावा
कंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार का बचाव करते हुए कहा कि जनता ने मान सरकार को पाँच वर्षों के लिए स्पष्ट बहुमत दिया है और सरकार ने अपनी सभी गारंटियाँ पूरी की हैं। उन्होंने बताया कि ₹1,000 की मासिक सहायता राशि वाली गारंटी 1 जुलाई से लागू होने जा रही है। AAP सरकार इस योजना को दुनिया का सबसे बड़ा महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम बता रही है।
BJP का जवाबी आरोप
दूसरी ओर, BJP नेताओं ने इस राशि वितरण को चुनावी लालच बताया है। BJP का कहना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव नज़दीक आते देख AAP सरकार मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसे बाँट रही है। यह बयानबाज़ी दोनों दलों के बीच आने वाले महीनों में और तेज़ होने की संभावना है।
आगे क्या
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी डेढ़ साल दूर हैं, लेकिन राजनीतिक सरगर्मी अभी से तेज़ हो गई है। AAP अपनी कल्याणकारी योजनाओं को ढाल बनाकर मैदान में उतरना चाहती है, जबकि BJP संगठनात्मक विस्तार और युवा मतदाताओं को साधने की कोशिश में है। 1 जुलाई को लागू होने वाली महिला सहायता राशि योजना इस राजनीतिक लड़ाई की अगली परीक्षा होगी।