राघव चड्ढा का AAP छोड़ने के बाद पहला पंजाब दौरा, लुधियाना में BJP अध्यक्ष नितिन नवीन की बैठक में शामिल
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 22 जून 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ने के बाद पहली बार पंजाब का दौरा किया और लुधियाना में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एक अहम बैठक में शिरकत की। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए संगठनात्मक रणनीति तैयार करना था।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
चड्ढा इस बैठक में पूर्व AAP सांसद राजिंदर गुप्ता के साथ पहुँचे, जिन्होंने भी हाल ही में AAP छोड़कर BJP का दामन थामा था। पार्टी सूत्रों के अनुसार, BJP अध्यक्ष नवीन ने उपस्थित नेताओं और सांसदों को जमीनी स्तर पर सक्रिय होने का निर्देश दिया।
बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ BJP नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, '2027 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने साफ किया कि हाल ही में शामिल हुए सांसदों को संगठन के भीतर चुनाव से जुड़ी अहम जिम्मेदारियाँ सौंपी जा सकती हैं।'
AAP का बड़ा राज्यसभा झटका
गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में AAP के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़ दी थी — यह संख्या कुल सदस्यों के दो-तिहाई से अधिक है। इनमें राघव चड्ढा, राजिंदर गुप्ता, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी शामिल थे।
स्वाति मालीवाल को छोड़कर शेष छह सांसद राज्यसभा में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं। चूँकि इस्तीफा देने वालों की संख्या कुल सदस्यता के दो-तिहाई के बराबर थी, इसलिए संविधान की दसवीं अनुसूची — जिसे सामान्यतः दलबदल विरोधी कानून कहा जाता है — के तहत इनमें से किसी को भी अयोग्य नहीं ठहराया गया।
चड्ढा ने पार्टी छोड़ने की क्या बताई वजह
AAP से अलग होने के बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का आंतरिक माहौल 'जहरीला' हो गया था। उनका यह भी कहना था कि BJP में शामिल होने से उन्हें उन मुद्दों पर अधिक प्रभावी ढंग से काम करने का अवसर मिलेगा, जिनका वे समर्थन करते हैं।
राजनीतिक असर और आगे की राह
चड्ढा की लुधियाना बैठक में मौजूदगी को राजनीतिक विश्लेषक एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देख रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ-साथ इन पूर्व AAP सांसदों को BJP के चुनावी ढाँचे में सक्रिय भूमिका दी जा सकती है। यह देखना अहम होगा कि पंजाब में BJP इस नई राजनीतिक ऊर्जा को किस तरह मतों में बदलती है।