10 अगस्त 2026
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राघव चड्ढा का AAP छोड़ने के बाद पहला पंजाब दौरा, लुधियाना में BJP अध्यक्ष नितिन नवीन की बैठक में शामिल

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राघव चड्ढा का AAP छोड़ने के बाद पहला पंजाब दौरा, लुधियाना में BJP अध्यक्ष नितिन नवीन की बैठक में शामिल

सारांश

AAP छोड़ने के बाद राघव चड्ढा का पहला पंजाब दौरा महज एक यात्रा नहीं — यह 2027 की चुनावी तैयारी का साफ संकेत है। BJP अध्यक्ष नितिन नवीन की लुधियाना बैठक में उनकी मौजूदगी बताती है कि पूर्व AAP सांसदों को पार्टी संगठन में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।

मुख्य बातें

राघव चड्ढा ने 22 जून 2026 को AAP छोड़ने के बाद पहली बार पंजाब का दौरा किया।
लुधियाना में BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में 2027 विधानसभा चुनाव रणनीति बैठक में शामिल हुए।
अप्रैल 2026 में AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़ी — कुल सदस्यता के दो-तिहाई से अधिक।
दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत दो-तिहाई की सीमा पूरी होने से किसी को अयोग्य नहीं ठहराया गया।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नए सांसदों को 2027 चुनाव से पहले संगठन में अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 22 जून 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ने के बाद पहली बार पंजाब का दौरा किया और लुधियाना में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एक अहम बैठक में शिरकत की। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए संगठनात्मक रणनीति तैयार करना था।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

चड्ढा इस बैठक में पूर्व AAP सांसद राजिंदर गुप्ता के साथ पहुँचे, जिन्होंने भी हाल ही में AAP छोड़कर BJP का दामन थामा था। पार्टी सूत्रों के अनुसार, BJP अध्यक्ष नवीन ने उपस्थित नेताओं और सांसदों को जमीनी स्तर पर सक्रिय होने का निर्देश दिया।

बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ BJP नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, '2027 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने साफ किया कि हाल ही में शामिल हुए सांसदों को संगठन के भीतर चुनाव से जुड़ी अहम जिम्मेदारियाँ सौंपी जा सकती हैं।'

AAP का बड़ा राज्यसभा झटका

गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में AAP के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़ दी थी — यह संख्या कुल सदस्यों के दो-तिहाई से अधिक है। इनमें राघव चड्ढा, राजिंदर गुप्ता, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी शामिल थे।

स्वाति मालीवाल को छोड़कर शेष छह सांसद राज्यसभा में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं। चूँकि इस्तीफा देने वालों की संख्या कुल सदस्यता के दो-तिहाई के बराबर थी, इसलिए संविधान की दसवीं अनुसूची — जिसे सामान्यतः दलबदल विरोधी कानून कहा जाता है — के तहत इनमें से किसी को भी अयोग्य नहीं ठहराया गया।

चड्ढा ने पार्टी छोड़ने की क्या बताई वजह

AAP से अलग होने के बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का आंतरिक माहौल 'जहरीला' हो गया था। उनका यह भी कहना था कि BJP में शामिल होने से उन्हें उन मुद्दों पर अधिक प्रभावी ढंग से काम करने का अवसर मिलेगा, जिनका वे समर्थन करते हैं।

राजनीतिक असर और आगे की राह

चड्ढा की लुधियाना बैठक में मौजूदगी को राजनीतिक विश्लेषक एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देख रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ-साथ इन पूर्व AAP सांसदों को BJP के चुनावी ढाँचे में सक्रिय भूमिका दी जा सकती है। यह देखना अहम होगा कि पंजाब में BJP इस नई राजनीतिक ऊर्जा को किस तरह मतों में बदलती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे पंजाब की जनता में BJP के लिए कितनी विश्वसनीयता बना पाएँगे। दलबदल कानून की तकनीकी खामी का फायदा उठाकर सात सांसदों का एक साथ पाला बदलना लोकतांत्रिक मर्यादा पर सवाल खड़े करता है — भले ही यह कानूनी रूप से वैध हो। 2027 का असली इम्तिहान यह होगा कि क्या ये नेता जमीनी स्तर पर BJP को वोट दिला सकते हैं, या फिर यह सिर्फ राजनीतिक पुनर्वास का मामला बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राघव चड्ढा ने AAP क्यों छोड़ी?
राघव चड्ढा ने अप्रैल 2026 में AAP छोड़ी और सोशल मीडिया पर कहा कि पार्टी का आंतरिक माहौल 'जहरीला' हो गया था। उन्होंने यह भी कहा कि BJP में रहकर वे अपने समर्थित मुद्दों पर अधिक प्रभावी काम कर सकेंगे।
लुधियाना की BJP बैठक का मकसद क्या था?
BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में 22 जून 2026 को लुधियाना में हुई यह बैठक 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए संगठनात्मक रणनीति बनाने के लिए आयोजित की गई थी। बैठक में हाल ही में AAP से आए सांसदों को चुनावी जिम्मेदारियाँ सौंपने पर भी चर्चा हुई।
AAP से BJP में कौन-कौन से सांसद आए?
अप्रैल 2026 में AAP के सात राज्यसभा सांसदों — राघव चड्ढा, राजिंदर गुप्ता, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी — ने पार्टी छोड़कर BJP में शामिल होने का ऐलान किया था। स्वाति मालीवाल को छोड़कर बाकी छह पंजाब से राज्यसभा सदस्य हैं।
दलबदल विरोधी कानून के तहत इन सांसदों को अयोग्य क्यों नहीं ठहराया गया?
संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के अनुसार, यदि किसी दल के दो-तिहाई या अधिक सदस्य एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। AAP के 10 में से 7 सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़ी, जो दो-तिहाई की इस सीमा को पूरा करती है।
पंजाब 2027 चुनाव में BJP की क्या रणनीति है?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, BJP पूर्व AAP सांसदों को संगठन में चुनाव से जुड़ी अहम जिम्मेदारियाँ सौंपकर पंजाब में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहती है। BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने नेताओं को जमीनी स्तर पर काम करने का निर्देश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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