31 जुलाई 2026
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योगेश गौड़ा हत्याकांड: कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक विनय कुलकर्णी को दी अंतरिम जमानत, दोषसिद्धि निलंबित

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योगेश गौड़ा हत्याकांड: कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक विनय कुलकर्णी को दी अंतरिम जमानत, दोषसिद्धि निलंबित

सारांश

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने योगेश गौड़ा हत्याकांड में पूर्व कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी की दोषसिद्धि निलंबित कर अंतरिम जमानत दे दी। अप्रैल 2026 में आजीवन कारावास की सजा पाए कुलकर्णी की विधानसभा सदस्यता पहले ही जा चुकी थी। सीबीआई अब सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी में बताई जा रही है।

मुख्य बातें

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 31 जुलाई 2026 को पूर्व विधायक विनय कुलकर्णी को अंतरिम जमानत दी और दोषसिद्धि आदेश निलंबित किया।
जमानत के लिए ₹5 लाख का बांड और विदेश यात्रा पर पूर्व अनुमति की शर्त लागू।
जस्टिस मोहम्मद नवाज और जस्टिस जी.
बसवराज की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।
विशेष अदालत ने 17 अप्रैल 2026 को कुलकर्णी सहित 17 लोगों को आजीवन कारावास सुनाया था।
योगेश गौड़ा की हत्या 15 जून 2016 को धारवाड़ के जिम में हुई थी; सीबीआई ने 21 आरोपियों पर आरोप पत्र दायर किया था।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे सकती है।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 31 जुलाई 2026 को भाजपा नेता योगेश गौड़ा हत्याकांड में पूर्व कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को अंतरिम जमानत प्रदान कर दी और निचली अदालत द्वारा पारित दोषसिद्धि आदेश को भी निलंबित कर दिया। विशेष अदालत ने 17 अप्रैल 2026 को कुलकर्णी सहित 17 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। यह निर्णय कर्नाटक के सबसे चर्चित राजनीतिक हत्याकांडों में से एक में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ माना जा रहा है।

न्यायालय का आदेश और शर्तें

यह आदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ के जस्टिस मोहम्मद नवाज और जस्टिस जी. बसवराज ने कुलकर्णी की आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान पारित किया। पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 9 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था और अब अंतरिम राहत प्रदान की है।

न्यायालय ने कुलकर्णी को ₹5 लाख का जमानत बांड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्हें पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा करने से रोका गया है। हालाँकि, निचली अदालत द्वारा धारवाड़ जिले में प्रवेश पर लगाया गया प्रतिबंध उच्च न्यायालय ने जारी नहीं रखा।

मामले की पृष्ठभूमि

भाजपा के जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा की हत्या 15 जून 2016 को धारवाड़ स्थित उनके जिम में हुई थी। प्रारंभ में स्थानीय पुलिस ने छह लोगों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किया था, किंतु बाद में मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित कर दिया गया।

सीबीआई की जांच में एक व्यापक राजनीतिक साजिश का खुलासा हुआ, जिसमें कुलकर्णी के अतिरिक्त उनके चाचा चंद्रशेखर इंडी और एक पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका सामने आई — जिन पर सबूत नष्ट करने और अन्य लोगों को फंसाने के आरोप लगाए गए। एजेंसी ने कुल 21 आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किया था। बेंगलुरु स्थित निर्वाचित प्रतिनिधियों की विशेष अदालत ने 17 अप्रैल 2026 को विनय कुलकर्णी और 16 सह-आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

राजनीतिक निहितार्थ

कुलकर्णी धारवाड़ ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे और वर्तमान में बेंगलुरु केंद्रीय जेल में बंद हैं। दोषसिद्धि के बाद कर्नाटक विधानसभा में उनकी सदस्यता पहले ही अयोग्य घोषित की जा चुकी थी और धारवाड़ ग्रामीण सीट पर उपचुनाव की घोषणा अपेक्षित थी।

कानूनी जानकारों के अनुसार, दोषसिद्धि आदेश पर अस्थायी रोक लगने से कुलकर्णी के विधायक पद पर दावे की संभावना फिर से उत्पन्न हो सकती है — हालाँकि यह आगे की कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

सीबीआई की संभावित कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, सीबीआई उच्च न्यायालय के इस अंतरिम आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुँच सकता है और कुलकर्णी को मिली अस्थायी राहत पर पुनर्विचार हो सकता है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में राजनीतिक हत्याओं से जुड़े मामलों पर जनता और विपक्ष की नज़र बेहद पैनी है। इस मामले की अगली सुनवाई और सीबीआई के कदम इस हाई-प्रोफाइल केस की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ असाधारण हैं — एक ऐसे राज्य में जहाँ राजनीतिक हत्याएँ दशकों से सत्ता-संघर्ष का हिस्सा रही हैं। दोषसिद्धि निलंबित होने से धारवाड़ ग्रामीण उपचुनाव की संभावना अनिश्चितता में पड़ गई है, जो कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीट है। सीबीआई की सर्वोच्च न्यायालय में संभावित याचिका यह भी दर्शाती है कि जांच एजेंसी इस मामले को अभी अंतिम नहीं मानती। असली सवाल यह है कि क्या न्यायिक प्रक्रिया की लंबाई इस मामले में जवाबदेही को और विलंबित करेगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विनय कुलकर्णी को जमानत क्यों दी गई?
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कुलकर्णी की आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान दोषसिद्धि आदेश को निलंबित करते हुए अंतरिम जमानत दी। यह राहत अपील के अंतिम निपटारे तक अस्थायी है और ₹5 लाख के जमानत बांड सहित कई शर्तों के अधीन है।
योगेश गौड़ा हत्याकांड क्या है?
भाजपा के जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा की हत्या 15 जून 2016 को धारवाड़ स्थित उनके जिम में हुई थी। सीबीआई जांच में कथित राजनीतिक साजिश का खुलासा हुआ, जिसमें पूर्व विधायक विनय कुलकर्णी, उनके चाचा और एक पुलिस इंस्पेक्टर की संलिप्तता बताई गई।
विनय कुलकर्णी को पहले क्या सजा मिली थी?
बेंगलुरु स्थित निर्वाचित प्रतिनिधियों की विशेष अदालत ने 17 अप्रैल 2026 को विनय कुलकर्णी और 16 सह-आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। दोषसिद्धि के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता भी अयोग्य घोषित कर दी गई थी।
क्या सीबीआई इस जमानत आदेश को चुनौती देगी?
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई उच्च न्यायालय के अंतरिम जमानत और दोषसिद्धि निलंबन आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है, तो कुलकर्णी को मिली राहत पर पुनर्विचार हो सकता है।
इस फैसले का धारवाड़ ग्रामीण सीट के उपचुनाव पर क्या असर पड़ेगा?
दोषसिद्धि निलंबित होने के बाद धारवाड़ ग्रामीण सीट पर प्रस्तावित उपचुनाव की स्थिति अनिश्चित हो गई है। कानूनी जानकारों के अनुसार, आगे की कानूनी कार्यवाही के अधीन कुलकर्णी के विधायक पद पर दावे की संभावना भी उत्पन्न हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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