योगेश गौड़ा हत्याकांड: कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक विनय कुलकर्णी को दी अंतरिम जमानत, दोषसिद्धि निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 31 जुलाई 2026 को भाजपा नेता योगेश गौड़ा हत्याकांड में पूर्व कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को अंतरिम जमानत प्रदान कर दी और निचली अदालत द्वारा पारित दोषसिद्धि आदेश को भी निलंबित कर दिया। विशेष अदालत ने 17 अप्रैल 2026 को कुलकर्णी सहित 17 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। यह निर्णय कर्नाटक के सबसे चर्चित राजनीतिक हत्याकांडों में से एक में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ माना जा रहा है।
न्यायालय का आदेश और शर्तें
यह आदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ के जस्टिस मोहम्मद नवाज और जस्टिस जी. बसवराज ने कुलकर्णी की आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान पारित किया। पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 9 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था और अब अंतरिम राहत प्रदान की है।
न्यायालय ने कुलकर्णी को ₹5 लाख का जमानत बांड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्हें पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा करने से रोका गया है। हालाँकि, निचली अदालत द्वारा धारवाड़ जिले में प्रवेश पर लगाया गया प्रतिबंध उच्च न्यायालय ने जारी नहीं रखा।
मामले की पृष्ठभूमि
भाजपा के जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा की हत्या 15 जून 2016 को धारवाड़ स्थित उनके जिम में हुई थी। प्रारंभ में स्थानीय पुलिस ने छह लोगों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किया था, किंतु बाद में मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित कर दिया गया।
सीबीआई की जांच में एक व्यापक राजनीतिक साजिश का खुलासा हुआ, जिसमें कुलकर्णी के अतिरिक्त उनके चाचा चंद्रशेखर इंडी और एक पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका सामने आई — जिन पर सबूत नष्ट करने और अन्य लोगों को फंसाने के आरोप लगाए गए। एजेंसी ने कुल 21 आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किया था। बेंगलुरु स्थित निर्वाचित प्रतिनिधियों की विशेष अदालत ने 17 अप्रैल 2026 को विनय कुलकर्णी और 16 सह-आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
राजनीतिक निहितार्थ
कुलकर्णी धारवाड़ ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे और वर्तमान में बेंगलुरु केंद्रीय जेल में बंद हैं। दोषसिद्धि के बाद कर्नाटक विधानसभा में उनकी सदस्यता पहले ही अयोग्य घोषित की जा चुकी थी और धारवाड़ ग्रामीण सीट पर उपचुनाव की घोषणा अपेक्षित थी।
कानूनी जानकारों के अनुसार, दोषसिद्धि आदेश पर अस्थायी रोक लगने से कुलकर्णी के विधायक पद पर दावे की संभावना फिर से उत्पन्न हो सकती है — हालाँकि यह आगे की कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
सीबीआई की संभावित कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई उच्च न्यायालय के इस अंतरिम आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुँच सकता है और कुलकर्णी को मिली अस्थायी राहत पर पुनर्विचार हो सकता है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में राजनीतिक हत्याओं से जुड़े मामलों पर जनता और विपक्ष की नज़र बेहद पैनी है। इस मामले की अगली सुनवाई और सीबीआई के कदम इस हाई-प्रोफाइल केस की दिशा तय करेंगे।