भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी को जान से मारने की धमकी, ₹1 करोड़ फिरौती की मांग
सारांश
मुख्य बातें
नागपुर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी को कथित तौर पर व्हाट्सएप के ज़रिए जान से मारने की धमकियाँ मिली हैं और ₹50 लाख से ₹1 करोड़ तक की फिरौती माँगी गई है। सिद्दीकी ने 29 मई 2026 को नागपुर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद अज्ञात आरोपी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
मुख्य घटनाक्रम
धमकी भरे संदेश 25 से 27 मई 2026 के बीच मोबाइल नंबर 8899162823 से भेजे गए। एफआईआर के अनुसार, अज्ञात प्रेषक ने UPI और बैंक ट्रांसफर के माध्यम से रकम चुकाने की माँग की। पैसे न देने पर सिद्दीकी और उनके परिवार के सदस्यों को नुकसान पहुँचाने की धमकी दी गई।
संदेशों में बम विस्फोटों और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की 'टारगेट किलिंग' का भी जिक्र था। आरोपी ने दावा किया कि ये हमले इसलिए किए जाएँगे क्योंकि उन नेताओं ने उसका कथित तौर पर अपमान किया था।
किन नेताओं के नाम शामिल
धमकी भरे मैसेज में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम लिए गए, जिनमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, सचिन पायलट और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सायबर अपराध और राजनीतिक नेताओं को ऑनलाइन धमकी देने के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
पुलिस की कार्रवाई
नागपुर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(5), 351(2) और 351(3) के तहत आपराधिक धमकी और जबरन वसूली का मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(D) के तहत भी केस दर्ज किया गया है।
सिद्दीकी ने पुलिस को व्हाट्सएप स्क्रीनशॉट, चैट लॉग और अन्य डिजिटल साक्ष्य सौंपे हैं।
जाँच की स्थिति
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले को प्राथमिकता के आधार पर लिया गया है और विशेष टीमें लगाई गई हैं। जाँच में कॉल रिकॉर्ड विश्लेषण, आईपी एड्रेस ट्रैकिंग और साइबर फोरेंसिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। गौरतलब है कि मोबाइल नंबर के स्रोत का पता लगाना जाँच की प्राथमिक कड़ी है।
आगे क्या होगा
पुलिस आरोपी की पहचान के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई करेगी। साइबर फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद आरोपी के खिलाफ और धाराएँ जोड़ी जा सकती हैं। यह मामला राजनीतिक नेताओं को डिजिटल माध्यमों से दी जाने वाली धमकियों के बढ़ते चलन की गंभीरता को रेखांकित करता है।