10 अगस्त 2026
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भाजपा ने चुनाव आयोग को तमिलनाडु के चर्चों में राजनीतिक सामग्री के वितरण की जांच करने के लिए कहा

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भाजपा ने चुनाव आयोग को तमिलनाडु के चर्चों में राजनीतिक सामग्री के वितरण की जांच करने के लिए कहा

सारांश

तमिलनाडु भाजपा प्रवक्ता ए.एन.एस. प्रसाद ने चुनाव आयोग से चर्चों में बांटे जा रहे राजनीतिक पर्चों की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है। क्या चुनाव आयोग इस मुद्दे पर कदम उठाएगा?

मुख्य बातें

भाजपा ने राजनीतिक सामग्री के वितरण की जांच की मांग की।
चर्चों में पर्चों का वितरण चुनावी निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।
दोषी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
चुनाव आयोग को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने हैं।

चेन्नई, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता ए.एन.एस. प्रसाद ने रविवार को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) से अनुरोध किया है कि वह राज्य के चर्चों में कथित रूप से बांटे जा रहे राजनीतिक पर्चों की सूचना पर तुरंत कदम उठाए। उनका कहना है कि ऐसी गतिविधियाँ चल रही विधानसभा चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती हैं।

प्रसाद के अनुसार, डीएमके का समर्थन करने वाले पर्चे कुछ चर्च परिसरों के भीतर वितरित किए गए हैं, जिनमें राजनीतिक संदेश शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इन सामग्रियों में कुछ विशेष पार्टियों और उम्मीदवारों के 'मूल्यांकन और समर्थन' की जानकारी थी, जो संभवतः मतदाताओं को धार्मिक आधार पर प्रभावित कर सकती थी।

इस घटना को 'गंभीर चिंता' का विषय बताते हुए, प्रसाद ने कहा कि धार्मिक संस्थानों का चुनावी संदेशों के लिए उपयोग 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' के प्रावधानों का उल्लंघन कर सकता है।

उन्होंने धारा 123(3) और 123(3ए) का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावों के दौरान धर्म के नाम पर अपील करना और दुश्मनी को बढ़ावा देना 'भ्रष्ट आचरण' माना जाता है।

उनका बयान था, "पूजा स्थलों की पवित्रता को बनाए रखा जाना चाहिए, और उन्हें राजनीतिक प्रचार का माध्यम नहीं बनाना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि यदि इन गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं, तो यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के सिद्धांत के लिए हानिकारक होगा।

भाजपा नेता ने 'तमिलनाडु बिशप्स काउंसिल' के कार्यों की भी जांच करने की मांग की, और आरोप लगाया कि यही पर्चे वितरित कर रही है।

उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में बाहरी प्रभावों के संभावित खतरों की ओर इशारा करते हुए 'विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010' के तहत जांच की मांग की।

प्रसाद ने चुनाव आयोग से अपील की कि वह इन आरोपों की समय-सीमा के भीतर और निष्पक्षता से जांच करने के लिए एक 'विशेष जांच दल' (एसआईटी) का गठन करे।

उन्होंने कहा कि पर्चों की सामग्री और उनके वितरण की प्रक्रिया समेत सभी पहलुओं की गहन जांच की जानी चाहिए।

बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि उल्लंघन साबित होते हैं, तो उम्मीदवारों, पार्टी कार्यकर्ताओं या धार्मिक अधिकारियों, जो भी जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यों में दोषी पाए गए किसी भी उम्मीदवार को कानून के अनुसार अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।

चुनाव आयोग ने अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने हैं, और चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या भाजपा ने चुनाव आयोग से जांच की मांग की है?
हाँ, भाजपा प्रवक्ता ए.एन.एस. प्रसाद ने चुनाव आयोग से चर्चों में राजनीतिक पर्चों के वितरण की जांच करने का आग्रह किया है।
क्या यह पर्चे डीएमके का समर्थन करते हैं?
प्रसाद के अनुसार, ये पर्चे डीएमके का समर्थन करने वाले हैं और राजनीतिक संदेशों से भरे हैं।
क्या चुनाव आयोग ने इस पर प्रतिक्रिया दी है?
नहीं, चुनाव आयोग ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इस मामले में कानून का क्या प्रावधान है?
धार्मिक स्थलों का चुनावी प्रचार के लिए उपयोग करना जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का उल्लंघन हो सकता है।
क्या जांच की मांग की गई है?
हाँ, प्रसाद ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करने की मांग की है।
राष्ट्र प्रेस
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