ब्राह्मण समाज मोदी-योगी के साथ खड़ा है, SP की बैठक पर संजय निषाद का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच ब्राह्मण समाज की राजनीतिक दिशा एक बार फिर केंद्र में आ गई है। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्री संजय निषाद ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि ब्राह्मण समुदाय राजनीतिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ है और आगे भी रहेगा। उनकी यह प्रतिक्रिया समाजवादी पार्टी (SP) अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लखनऊ में ब्राह्मण नेताओं की बैठक आयोजित किए जाने के बाद आई है।
संजय निषाद का बयान
संजय निषाद ने कहा, 'ब्राह्मण समुदाय सभी को स्नेह देता है। जहां उसे बुलाया जाता है, वह वहां चला जाता है, लेकिन राजनीतिक रूप से ब्राह्मण समाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ खड़ा है और आगे भी रहेगा।' उन्होंने यह भी दावा किया कि ब्राह्मण समाज भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा को पसंद करता है और उन ताकतों के साथ नहीं जाएगा जिन्होंने भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाया है।
SP की ब्राह्मण बैठक की पृष्ठभूमि
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में ब्राह्मण समाज के नेताओं की एक बैठक बुलाई है। राजनीतिक विश्लेषक इस कदम को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या लगभग 10-12% मानी जाती है और ये वर्ग परंपरागत रूप से चुनावी समीकरणों में निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल उच्च जाति के मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
संजय राउत के आरोपों पर पलटवार
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने BJP पर आरोप लगाया था कि उसने उनकी पार्टी के नेताओं को तोड़ने के लिए ₹15-15 करोड़ का ऑफर दिया। इस पर संजय निषाद ने कहा, 'लोग पैसे के आधार पर नहीं, बल्कि विचारधारा के आधार पर राजनीति करते हैं। जिसकी विचारधारा लोगों को पसंद आती है, लोग उसके साथ रहते हैं। आरोप लगाना बहुत आसान है, लेकिन उन्हें साबित करना बेहद कठिन होता है।'
राजनीतिक संदर्भ
उत्तर प्रदेश में 2022 विधानसभा चुनाव में BJP ने ब्राह्मण मतदाताओं का बड़ा हिस्सा अपने साथ रखा था। 2027 के चुनाव से पहले SP का ब्राह्मण आउटरीच इस समीकरण को बदलने का प्रयास है। आलोचकों का कहना है कि जाति-केंद्रित बैठकें चुनावी मौसम की परंपरागत कवायद हैं, जिनका ज़मीनी असर सीमित होता है। संजय निषाद की प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि सत्ताधारी गठबंधन इस आउटरीच को गंभीरता से ले रहा है।
आगे क्या
2027 विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा में अभी डेढ़ साल से अधिक का समय है, लेकिन उत्तर प्रदेश में जातीय समीकरणों की बिसात अभी से बिछने लगी है। BJP और SP दोनों के लिए ब्राह्मण मतदाताओं का समर्थन प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर निर्णायक साबित हो सकता है।