31 अगस्त 2026
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84 कोसी परिक्रमा: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश, श्रद्धालुओं की बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित करें

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84 कोसी परिक्रमा: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश, श्रद्धालुओं की बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित करें

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को ब्रज मंडल की 84 कोसी परिक्रमा में श्रद्धालुओं को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की कमी दूर करने का निर्देश दिया है। यह परिक्रमा तीन राज्यों — उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा — से होकर गुज़रती है और लगभग 40 दिन चलती है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 31 अगस्त को केंद्र सरकार को 84 कोसी परिक्रमा के श्रद्धालुओं की समस्याओं की जांच कर समाधान निकालने का निर्देश दिया।
शौचालय, पेयजल और विश्राम सहित बुनियादी सुविधाओं की कमी को न्यायालय ने प्रमुख चिंता बताया।
परिक्रमा मार्ग उत्तर प्रदेश , राजस्थान और हरियाणा — तीन राज्यों से होकर गुज़रता है।
न्यायालय ने केंद्र को तीनों राज्यों के साथ समन्वित विचार-विमर्श करने को कहा।
यह परिक्रमा लगभग 40 दिन चलती है और इसमें मथुरा, डीग, होडल, नूंह सहित कई क्षेत्र आते हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार, 31 अगस्त को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह ब्रज मंडल की 84 कोसी परिक्रमा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को शौचालय, पेयजल और विश्राम जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से होने वाली कठिनाइयों की पहचान कर उनका समाधान करे। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह परिक्रमा मार्ग उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा — तीन राज्यों से होकर गुज़रता है, इसलिए केंद्र को इन राज्यों को साथ लेकर समन्वित कार्रवाई करनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, 'केंद्र सरकार 84-कोस परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को होने वाली दिक्कतों की जांच कर सकती है, जिसमें साफ-सफाई, पीने के पानी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी शामिल है।' न्यायालय ने यह भी कहा कि केंद्र उचित स्तर पर सभी संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करे और तय करे कि श्रद्धालुओं की इन चिंताओं का व्यावहारिक समाधान कैसे निकाला जा सकता है।

84 कोसी परिक्रमा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

ब्रज क्षेत्र को भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थली और नित्य वास स्थल माना जाता है। यह क्षेत्र चौरासी कोस की परिधि में फैला है और इसकी परिक्रमा यात्रा हिंदू धर्म में सर्वाधिक महत्वपूर्ण तीर्थयात्राओं में से एक मानी जाती है। इस यात्रा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े स्थलों, सरोवरों, वनों, मंदिरों और कुंडों का भ्रमण किया जाता है। श्रद्धालु यह परिक्रमा पैदल, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान करते हुए पूरी करते हैं, जो लगभग 40 दिन चलती है।

परिक्रमा मार्ग और प्रभावित राज्य

यह परिक्रमा मार्ग मथुरा जिले के अलावा उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की सीमा से होकर गुज़रता है। राजस्थान के डीग जिले के डीग, आदिबद्री धाम और कामा क्षेत्र तथा हरियाणा के पलवल जिले का होडल और हसनपुर क्षेत्र और नूंह (मेवात) जिले का हिस्सा भी इस मार्ग में आता है। बहु-राज्यीय विस्तार के कारण ही न्यायालय ने केंद्र को समन्वयकारी भूमिका निभाने का निर्देश दिया।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अब केंद्र सरकार को तीनों संबंधित राज्यों — उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा — के साथ बैठकर एक ठोस कार्ययोजना तैयार करनी होगी। यह मामला देश की उन लाखों तीर्थयात्राओं की व्यापक समस्या की ओर भी ध्यान दिलाता है, जहाँ आस्था की परंपरा तो सदियों पुरानी है, लेकिन आधुनिक बुनियादी ढाँचा अभी भी अपर्याप्त बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी शौचालय और पेयजल जैसी न्यूनतम सुविधाएँ सुनिश्चित नहीं हो पाई हैं — यह प्रशासनिक उपेक्षा का संकेत है। बहु-राज्यीय मार्ग होने के कारण जवाबदेही का बिखराव एक पुरानी समस्या रही है, और न्यायालय का केंद्र को समन्वयकारी भूमिका सौंपना इसी का स्वीकरण है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या इस बार निर्देश कागज़ों से निकलकर ज़मीन तक पहुँचता है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

84 कोसी परिक्रमा क्या है और यह कहाँ होती है?
84 कोसी परिक्रमा ब्रज मंडल की एक प्रमुख तीर्थयात्रा है, जो भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थलियों से जुड़े मंदिरों, सरोवरों, वनों और कुंडों का भ्रमण कराती है। यह यात्रा उत्तर प्रदेश के मथुरा और अलीगढ़, राजस्थान के डीग और कामा तथा हरियाणा के पलवल और नूंह जिलों से होकर गुज़रती है और लगभग 40 दिन चलती है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को क्या निर्देश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह परिक्रमा मार्ग पर शौचालय, पेयजल और विश्राम जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की पहचान कर सुधारात्मक उपाय करे। साथ ही, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा को साथ लेकर हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करने को कहा गया।
इस मामले में तीन राज्यों को क्यों शामिल किया गया है?
84 कोसी परिक्रमा का मार्ग उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा — तीन राज्यों की सीमाओं से होकर गुज़रता है। न्यायालय ने इसीलिए केंद्र को समन्वयकारी भूमिका निभाने और तीनों राज्य सरकारों के साथ मिलकर समाधान तलाशने का निर्देश दिया।
श्रद्धालुओं को परिक्रमा के दौरान किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
परिक्रमा मार्ग पर साफ-सफाई का अभाव, पीने के पानी की कमी और विश्राम स्थलों की अनुपलब्धता प्रमुख समस्याएँ हैं। यह यात्रा पैदल तय की जाती है और लगभग 40 दिन चलती है, जिससे बुनियादी सुविधाओं की ज़रूरत और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आगे क्या होगा?
न्यायालय के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार को तीनों संबंधित राज्यों के साथ उचित स्तर पर विचार-विमर्श कर श्रद्धालुओं की समस्याओं के समाधान की कार्ययोजना तैयार करनी होगी। अगली सुनवाई में सरकार को इस संदर्भ में की गई कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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