84 कोसी परिक्रमा: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश, श्रद्धालुओं की बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित करें
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार, 31 अगस्त को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह ब्रज मंडल की 84 कोसी परिक्रमा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को शौचालय, पेयजल और विश्राम जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से होने वाली कठिनाइयों की पहचान कर उनका समाधान करे। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह परिक्रमा मार्ग उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा — तीन राज्यों से होकर गुज़रता है, इसलिए केंद्र को इन राज्यों को साथ लेकर समन्वित कार्रवाई करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, 'केंद्र सरकार 84-कोस परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को होने वाली दिक्कतों की जांच कर सकती है, जिसमें साफ-सफाई, पीने के पानी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी शामिल है।' न्यायालय ने यह भी कहा कि केंद्र उचित स्तर पर सभी संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करे और तय करे कि श्रद्धालुओं की इन चिंताओं का व्यावहारिक समाधान कैसे निकाला जा सकता है।
84 कोसी परिक्रमा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
ब्रज क्षेत्र को भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थली और नित्य वास स्थल माना जाता है। यह क्षेत्र चौरासी कोस की परिधि में फैला है और इसकी परिक्रमा यात्रा हिंदू धर्म में सर्वाधिक महत्वपूर्ण तीर्थयात्राओं में से एक मानी जाती है। इस यात्रा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े स्थलों, सरोवरों, वनों, मंदिरों और कुंडों का भ्रमण किया जाता है। श्रद्धालु यह परिक्रमा पैदल, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान करते हुए पूरी करते हैं, जो लगभग 40 दिन चलती है।
परिक्रमा मार्ग और प्रभावित राज्य
यह परिक्रमा मार्ग मथुरा जिले के अलावा उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की सीमा से होकर गुज़रता है। राजस्थान के डीग जिले के डीग, आदिबद्री धाम और कामा क्षेत्र तथा हरियाणा के पलवल जिले का होडल और हसनपुर क्षेत्र और नूंह (मेवात) जिले का हिस्सा भी इस मार्ग में आता है। बहु-राज्यीय विस्तार के कारण ही न्यायालय ने केंद्र को समन्वयकारी भूमिका निभाने का निर्देश दिया।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अब केंद्र सरकार को तीनों संबंधित राज्यों — उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा — के साथ बैठकर एक ठोस कार्ययोजना तैयार करनी होगी। यह मामला देश की उन लाखों तीर्थयात्राओं की व्यापक समस्या की ओर भी ध्यान दिलाता है, जहाँ आस्था की परंपरा तो सदियों पुरानी है, लेकिन आधुनिक बुनियादी ढाँचा अभी भी अपर्याप्त बना हुआ है।