30 सितंबर 2026
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बीएसएफ से निकाले गए करीब 400 ट्रेड्समैन: साइबर फ्रॉड का शिकार या लापरवाही, दीपावली से पहले 400 परिवारों पर संकट

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बीएसएफ से निकाले गए करीब 400 ट्रेड्समैन: साइबर फ्रॉड का शिकार या लापरवाही, दीपावली से पहले 400 परिवारों पर संकट

सारांश

BSF के करीब 400 ट्रेड्समैन कर्मचारी कथित फर्जी सर्टिफिकेट के चलते नौकरी से हटाए गए हैं — लेकिन उनका दावा है कि वे खुद साइबर ठगी के शिकार हैं। दो साल की सेवा, पुरस्कार, और अब उम्र सीमा पार होने के बाद दूसरी नौकरी की कोई उम्मीद नहीं। 9 अक्टूबर तक सरकार नहीं चेती, तो जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल।

मुख्य बातें

BSF के करीब 400 ट्रेड्समैन को कथित फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर दो साल की सेवा के बाद बर्खास्त किया गया।
प्रभावित कर्मचारियों का दावा है कि उन्होंने यूट्यूब पर विज्ञापित एक संस्थान से सर्टिफिकेट लिया था और वे साइबर धोखाधड़ी के शिकार हैं।
अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन ने 30 सितंबर 2026 को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस वार्ता कर पुनर्बहाली की माँग की।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि माँग नहीं मानी गई तो 9 अक्टूबर 2026 से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू होगी।
कई कर्मचारी अब उम्र सीमा पार होने के कारण अन्यत्र नौकरी पाने की स्थिति में नहीं हैं।
सेवानिवृत्त BSF अधिकारी गजेंद्र सिंह चौधरी ने सवाल उठाया कि बर्खास्तगी से पहले कर्मचारियों को नोटिस और सुनवाई का अवसर क्यों नहीं दिया गया।

नई दिल्ली में 30 सितंबर 2026 को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक प्रेस वार्ता में सामने आया कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) के करीब 400 ट्रेड्समैन कर्मचारियों को कथित फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर सेवा से हटा दिया गया है। इन कर्मचारियों का दावा है कि वे खुद ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं और उन्हें जानबूझकर नकली सर्टिफिकेट नहीं दिए गए। अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार से इन कर्मचारियों की तत्काल पुनर्बहाली की मांग की है।

दीपक की कहानी: नौकरी गई, बहन की शादी रुकी

दिल्ली के निवासी दीपक, जो BSF की 155वीं बटालियन में पंजाब के फिरोजपुर में ड्यूटी करते थे, उन्हें करीब दो साल की सेवा के बाद इस आधार पर हटाया गया कि उनका प्रमाण पत्र असली नहीं है। दीपक ने बताया कि उन्हें यूट्यूब पर एक संस्थान का विज्ञापन दिखा था, जहाँ वैध सर्टिफिकेट देने का दावा किया जा रहा था — और उन्होंने उसी माध्यम से सर्टिफिकेट प्राप्त किया था।

दीपक ने कहा, 'हमारे साथ साइबर धोखाधड़ी हुई है। बड़ी दीदी की शादी रुक गई है। नौकरी हमारे लिए बहुत बड़ी चीज थी। हमने बहुत मेहनत से यह नौकरी हासिल की थी।' उन्होंने यह भी दावा किया कि संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई और गिरफ्तारियाँ भी की गईं, लेकिन कथित तौर पर वे कुछ दिनों बाद रिहा होकर फिर से अपना यूट्यूब चैनल चला रहे हैं।

भर्ती प्रक्रिया और समस्या की जड़

एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने बताया कि 2023-24 में रसोइया, जलवाहक (वाटर कैरियर) और वेटर जैसे ट्रेड्समैन पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। इन पदों के लिए एक विशेष प्रमाण पत्र आवश्यक था, जो इन उम्मीदवारों ने विभिन्न संस्थानों से प्राप्त किया था। करीब दो साल तक सेवा देने के बाद जब सर्टिफिकेट की जाँच हुई, तो वे फर्जी पाए गए।

रणबीर सिंह ने कहा, 'गलती बच्चों की नहीं है, गलती उनकी है जिन्होंने सर्टिफिकेट दिया। बच्चों के साथ तो धोखाधड़ी हुई है।' उन्होंने दीपावली का हवाला देते हुए सरकार से अपील की कि इन 400 परिवारों में भी त्योहार की खुशी आ सके, इसलिए इन जवानों को जल्द से जल्द बहाल किया जाए।

प्रक्रियागत खामियों पर सवाल

एसोसिएशन के अध्यक्ष एचआर सिंह ने बताया कि इन कर्मचारियों ने लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षा और दस्तावेज जाँच के बाद नौकरी पाई थी। कुछ कर्मचारियों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार भी दिए गए थे। उन्होंने चेताया कि दो साल की सेवा के बाद अब उम्र सीमा पार हो जाने के कारण कई कर्मचारी कहीं और नौकरी पाने की स्थिति में भी नहीं हैं।

गौरतलब है कि BSF से सेवानिवृत्त अधिकारी गजेंद्र सिंह चौधरी ने भी सवाल उठाया कि यदि सर्टिफिकेट पहले वैध माने गए थे, तो बाद में फर्जी पाए जाने पर जवानों को सीधे बर्खास्त करने की बजाय पहले नोटिस देकर जाँच करानी चाहिए थी और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था।

भूख हड़ताल की चेतावनी

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो 9 अक्टूबर 2026 से जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। संगठन की माँग है कि सरकार और BSF मानवीय दृष्टिकोण से इस मामले पर पुनर्विचार करें तथा प्रभावित कर्मचारियों को राहत प्रदान करें।

आगे क्या होगा

यह मामला अब केवल व्यक्तिगत नहीं रहा — यह साइबर धोखाधड़ी, भर्ती प्रक्रिया की खामियों और सरकारी सेवा में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है। एसोसिएशन ने सरकार को चेतावनी दी है कि 9 अक्टूबर की समयसीमा से पहले यदि कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला, तो आंदोलन और तेज होगा। इन 400 परिवारों का भविष्य फिलहाल अधर में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया में साइबर अपराध की पहुँच और प्राकृतिक न्याय की अनदेखी का है। अगर दो साल की सेवा और पुरस्कार मिलने के बाद भी इन कर्मचारियों को बिना नोटिस या सुनवाई के हटाया गया, तो यह प्रक्रियागत विफलता उतनी ही गंभीर है जितनी फर्जीवाड़े की घटना। असली सवाल यह है कि भर्ती के समय दस्तावेज सत्यापन इतना लचर क्यों था कि दो साल बाद खामी पकड़ में आई — और उस विफलता की जिम्मेदारी केवल निचले पायदान के कर्मचारियों पर क्यों? साइबर धोखाधड़ी करने वालों के जल्द रिहा होने का दावा भी जाँच की माँग करता है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BSF से निकाले गए 400 ट्रेड्समैन का मामला क्या है?
सीमा सुरक्षा बल (BSF) के करीब 400 ट्रेड्समैन कर्मचारियों को 2023-24 की भर्ती में जमा किए गए प्रमाण पत्र बाद में फर्जी पाए जाने पर करीब दो साल की सेवा के बाद बर्खास्त कर दिया गया। इन कर्मचारियों का दावा है कि उन्होंने यूट्यूब पर विज्ञापित एक संस्थान से सर्टिफिकेट लिया था और वे खुद साइबर धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं।
इन कर्मचारियों की पुनर्बहाली के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन ने 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस वार्ता कर सरकार से पुनर्बहाली की माँग की है। यदि माँग नहीं मानी गई तो 9 अक्टूबर 2026 से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
इन कर्मचारियों को कौन से पदों पर भर्ती किया गया था?
इन कर्मचारियों को 2023-24 में BSF में रसोइया (कुक), जलवाहक (वाटर कैरियर) और वेटर जैसे ट्रेड्समैन पदों पर भर्ती किया गया था। ये लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षा और दस्तावेज जाँच पास करने के बाद नियुक्त हुए थे।
क्या इन कर्मचारियों को बर्खास्तगी से पहले नोटिस या सुनवाई का मौका मिला?
BSF से सेवानिवृत्त अधिकारी गजेंद्र सिंह चौधरी के अनुसार, कर्मचारियों को सीधे नौकरी से हटाया गया, बिना पहले नोटिस दिए या उनका पक्ष सुने। उनका कहना है कि जाँच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए था।
साइबर धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
दीपक के दावे के अनुसार, नकली सर्टिफिकेट देने वाले संस्थान से जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई और गिरफ्तारियाँ भी की गईं। हालाँकि, कथित तौर पर वे कुछ दिनों बाद रिहा हो गए और फिर से यूट्यूब चैनल चला रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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