बीएसएफ से निकाले गए करीब 400 ट्रेड्समैन: साइबर फ्रॉड का शिकार या लापरवाही, दीपावली से पहले 400 परिवारों पर संकट
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 30 सितंबर 2026 को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक प्रेस वार्ता में सामने आया कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) के करीब 400 ट्रेड्समैन कर्मचारियों को कथित फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर सेवा से हटा दिया गया है। इन कर्मचारियों का दावा है कि वे खुद ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं और उन्हें जानबूझकर नकली सर्टिफिकेट नहीं दिए गए। अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार से इन कर्मचारियों की तत्काल पुनर्बहाली की मांग की है।
दीपक की कहानी: नौकरी गई, बहन की शादी रुकी
दिल्ली के निवासी दीपक, जो BSF की 155वीं बटालियन में पंजाब के फिरोजपुर में ड्यूटी करते थे, उन्हें करीब दो साल की सेवा के बाद इस आधार पर हटाया गया कि उनका प्रमाण पत्र असली नहीं है। दीपक ने बताया कि उन्हें यूट्यूब पर एक संस्थान का विज्ञापन दिखा था, जहाँ वैध सर्टिफिकेट देने का दावा किया जा रहा था — और उन्होंने उसी माध्यम से सर्टिफिकेट प्राप्त किया था।
दीपक ने कहा, 'हमारे साथ साइबर धोखाधड़ी हुई है। बड़ी दीदी की शादी रुक गई है। नौकरी हमारे लिए बहुत बड़ी चीज थी। हमने बहुत मेहनत से यह नौकरी हासिल की थी।' उन्होंने यह भी दावा किया कि संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई और गिरफ्तारियाँ भी की गईं, लेकिन कथित तौर पर वे कुछ दिनों बाद रिहा होकर फिर से अपना यूट्यूब चैनल चला रहे हैं।
भर्ती प्रक्रिया और समस्या की जड़
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने बताया कि 2023-24 में रसोइया, जलवाहक (वाटर कैरियर) और वेटर जैसे ट्रेड्समैन पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। इन पदों के लिए एक विशेष प्रमाण पत्र आवश्यक था, जो इन उम्मीदवारों ने विभिन्न संस्थानों से प्राप्त किया था। करीब दो साल तक सेवा देने के बाद जब सर्टिफिकेट की जाँच हुई, तो वे फर्जी पाए गए।
रणबीर सिंह ने कहा, 'गलती बच्चों की नहीं है, गलती उनकी है जिन्होंने सर्टिफिकेट दिया। बच्चों के साथ तो धोखाधड़ी हुई है।' उन्होंने दीपावली का हवाला देते हुए सरकार से अपील की कि इन 400 परिवारों में भी त्योहार की खुशी आ सके, इसलिए इन जवानों को जल्द से जल्द बहाल किया जाए।
प्रक्रियागत खामियों पर सवाल
एसोसिएशन के अध्यक्ष एचआर सिंह ने बताया कि इन कर्मचारियों ने लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षा और दस्तावेज जाँच के बाद नौकरी पाई थी। कुछ कर्मचारियों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार भी दिए गए थे। उन्होंने चेताया कि दो साल की सेवा के बाद अब उम्र सीमा पार हो जाने के कारण कई कर्मचारी कहीं और नौकरी पाने की स्थिति में भी नहीं हैं।
गौरतलब है कि BSF से सेवानिवृत्त अधिकारी गजेंद्र सिंह चौधरी ने भी सवाल उठाया कि यदि सर्टिफिकेट पहले वैध माने गए थे, तो बाद में फर्जी पाए जाने पर जवानों को सीधे बर्खास्त करने की बजाय पहले नोटिस देकर जाँच करानी चाहिए थी और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था।
भूख हड़ताल की चेतावनी
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो 9 अक्टूबर 2026 से जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। संगठन की माँग है कि सरकार और BSF मानवीय दृष्टिकोण से इस मामले पर पुनर्विचार करें तथा प्रभावित कर्मचारियों को राहत प्रदान करें।
आगे क्या होगा
यह मामला अब केवल व्यक्तिगत नहीं रहा — यह साइबर धोखाधड़ी, भर्ती प्रक्रिया की खामियों और सरकारी सेवा में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है। एसोसिएशन ने सरकार को चेतावनी दी है कि 9 अक्टूबर की समयसीमा से पहले यदि कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला, तो आंदोलन और तेज होगा। इन 400 परिवारों का भविष्य फिलहाल अधर में है।