₹50 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़: अहमदाबाद से चार गिरफ्तार, दुबई हैंडलर्स को खाते देने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद सिटी साइबर क्राइम ब्रांच ने 30 अक्टूबर 2026 को एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर दुबई में बैठे हैंडलर्स को फर्जी निवेश घोटालों के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है। जांचकर्ताओं के अनुसार इन खातों के ज़रिए 15 से अधिक राज्यों में 80 से ज़्यादा साइबर धोखाधड़ी शिकायतों से जुड़े ₹50 करोड़ से अधिक का लेनदेन हुआ।
मामले का आधार: ₹67.92 लाख की ठगी
यह पूरी जांच एक पीड़ित की शिकायत से शुरू हुई, जिसके साथ दो फर्जी निवेश एप्लिकेशन के ज़रिए ₹67.92 लाख की धोखाधड़ी की गई। ठगों ने पहले पीड़ित से व्हाट्सएप पर संपर्क किया और उसे 'जेबी एक्स वन' नामक एप्लिकेशन में निवेश करने के लिए राजी किया। दावा किया गया कि यह एप्लिकेशन प्रतिष्ठित वित्तीय संस्था 'जूलियस बेयर' द्वारा संचालित है।
भरोसा दिलाने के लिए ठगों ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के नाम, लोगो, हस्ताक्षर और मुहर वाला एक फर्जी सर्टिफिकेट भी पीड़ित को भेजा। इसके बाद पीड़ित ने उस एप्लिकेशन में ₹47.14 लाख का निवेश कर दिया।
दो-चरणीय ठगी की साजिश
धोखाधड़ी के दूसरे चरण में एक व्यक्ति ने आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की 'अंजू गर्ग' बनकर पीड़ित से संपर्क किया और 'ब्लॉक ट्रेडिंग' में एक ही दिन में 5 से 20 प्रतिशत रिटर्न देने का वादा किया। पीड़ित को दूसरा एप्लिकेशन 'आईडी-क्यूएसबी' डाउनलोड कराकर उसमें ₹20.78 लाख और निवेश करवाए गए।
उस प्लेटफॉर्म पर फर्जी शेयर ट्रांजैक्शन के ज़रिए पीड़ित का बैलेंस ₹74,32,707.79 दर्शाया जाने लगा। जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की, तो 20 प्रतिशत शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स और 4 प्रतिशत हेल्थ एंड एजुकेशन सेस की मांग की गई। अधिकारियों के अनुसार, 'दोनों एप्लिकेशन संचालकों ने निवेश को वास्तविक दिखाने के लिए फर्जी इलेक्ट्रॉनिक जानकारी प्रदर्शित की और एक सोची-समझी साजिश के तहत मिलकर काम किया।'
गिरफ्तार आरोपी और नेटवर्क की कड़ियाँ
गिरफ्तार चारों आरोपियों की पहचान इरफान शेख (41), सोहेब जोजावरवाला (37), शहजाद अजमेरवाला (35) और इश्तियाक रियावाला (38) के रूप में हुई है। इरफान और सोहेब वडोदरा के निवासी हैं, जबकि शहजाद और इश्तियाक अहमदाबाद के जमालपुर इलाके से हैं।
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क में एक स्पष्ट श्रृंखला काम करती थी — इरफान ने कमीशन के बदले अपना बैंक खाता सोहेब को दिया; सोहेब ने अन्य खाते जुटाकर शहजाद को पाँच से अधिक बैंक खाते उपलब्ध कराए; शहजाद ने ये खाते इश्तियाक को सौंपे। आरोप है कि इश्तियाक की इस नेटवर्क में केंद्रीय भूमिका थी — उसने इन खातों को कमीशन के बदले दुबई में बैठे अपने साथियों को भेजा। उसके पास से 30 से अधिक बैंक खाता किट बरामद की गई हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर नेटवर्क का विस्तार
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीसीआरपी) पर की गई जांच से सामने आया कि ये बैंक खाते 15 से अधिक राज्यों में दर्ज 80 से ज़्यादा शिकायतों से जुड़े थे और इनके ज़रिए ₹50 करोड़ से अधिक का लेनदेन हुआ। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन के ज़रिए ठगी की घटनाएँ पूरे देश में तेज़ी से बढ़ रही हैं।
गौरतलब है कि विदेश में बैठे हैंडलर्स और घरेलू 'म्यूल अकाउंट' नेटवर्क का यह माडल साइबर अपराध जांचकर्ताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है, क्योंकि पैसा तत्काल कई खातों में स्थानांतरित होकर विदेश भेज दिया जाता है।
आगे की जांच और सतर्कता की अपील
पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क के पूरे दायरे का पता लगाने और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान करने के लिए जांच जारी है। साइबर क्राइम ब्रांच ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अज्ञात व्हाट्सएप नंबरों से आने वाले निवेश प्रस्तावों से सावधान रहें और किसी भी एप्लिकेशन में पैसा लगाने से पहले उसकी प्रामाणिकता की स्वतंत्र जांच करें।