केएपीएल के एमडी अनुराग दानायक सीबीआई की गिरफ्त में, नोएडा में ₹5 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 15 जुलाई 2025 को नोएडा में कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (केएपीएल) के प्रबंध निदेशक अनुराग दानायक को ₹5 लाख की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी के अनुसार, दानायक ने भोपाल की एक फर्म से कुल ₹15 लाख की रिश्वत मांगी थी, जिसकी यह पहली किस्त थी।
रिश्वत की मांग किसलिए की गई
सीबीआई के अनुसार, भोपाल स्थित यह फर्म केएपीएल की अधिकृत सर्विस एजेंट है और मध्य प्रदेश के सरकारी संस्थानों को दवाइयों की आपूर्ति करती है। आरोप है कि अनुराग दानायक ने इस फर्म के सर्विस एजेंट एग्रीमेंट को मंजूरी दिलाने, चालू वित्तीय वर्ष के लंबित नवीनीकरण को पूरा करने और अतिरिक्त सरकारी संस्थान आवंटित कराने के एवज में यह रकम मांगी। इसके अलावा, दवाइयों की बिक्री पर मिलने वाले कमीशन में भी हिस्सेदारी की मांग की गई थी।
गिरफ्तारी और तलाशी अभियान
गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई ने बेंगलुरु, नोएडा और जबलपुर में आरोपी के आवास और कार्यालयों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान नोएडा के आवास और बेंगलुरु के कार्यालय से ₹75 लाख से अधिक नकद राशि, लगभग ₹4 लाख मूल्य की विदेशी मुद्रा और 697 ग्राम सोने के आभूषण एवं सिक्के — जिनकी अनुमानित कीमत करीब ₹86 लाख है — बरामद किए गए। इसके साथ ही एक आवासीय फ्लैट से जुड़े संपत्ति दस्तावेज़ भी जब्त किए गए।
केएपीएल की भूमिका और पृष्ठभूमि
केएपीएल एक केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की फार्मास्युटिकल कंपनी है, जो सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को दवाइयों की आपूर्ति करती है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सार्वजनिक स्वास्थ्य खरीद में पारदर्शिता को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि सर्विस एजेंट नेटवर्क के ज़रिए सरकारी संस्थानों तक दवाइयाँ पहुँचाने की इस व्यवस्था में भ्रष्टाचार की आशंका पर यह मामला नई रोशनी डालता है।
जांच की स्थिति और आगे क्या
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और रिश्वतखोरी के पूरे नेटवर्क की गहन पड़ताल की जा रही है। एजेंसी यह भी जाँच कर रही है कि इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों या खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।