सीबीआई ने एमसीएल सुरक्षा निरीक्षक बंशी राम को ₹5,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 11 जून 2026 को ओडिशा में महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) के सुरक्षा निरीक्षक बंशी राम को ₹5,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी ब्रजराजनगर (झारसुगुड़ा) स्थित एमसीएल के ओरिएंट एरिया में तैनात था और उस पर अपने ही विभाग के एक कर्मचारी से ड्यूटी रोस्टर में हेरफेर करने के एवज में रकम माँगने का आरोप है।
मामले का घटनाक्रम
सीबीआई के अनुसार, बंशी राम ने एमसीएल के एक अधीनस्थ कर्मचारी से रविवार की ड्यूटी रोटेशन के आधार पर आवंटित कराने और ड्यूटी रोस्टर में बदलाव के बदले ₹5,000 की माँग की थी। पीड़ित कर्मचारी ने सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद गुरुवार को औपचारिक मामला दर्ज किया गया।
शिकायत के आधार पर सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी को शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम स्वीकार करते हुए मौके पर ही पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद बंशी राम को विशेष सीबीआई अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
साइबर ठगी तस्करी नेटवर्क पर भी कार्रवाई
इसी दौरान सीबीआई ने एक अलग मामले में म्यांमार और कंबोडिया में संचालित साइबर ठगी केंद्रों में भारतीय युवाओं को फँसाने वाले मानव तस्करी गिरोह के दो प्रमुख आरोपियों को भी गिरफ्तार किया।
जाँच एजेंसी के अनुसार, पहला आरोपी स्कैम कंपाउंड संचालकों के लिए काम करता था और भारतीय नागरिकों को थाईलैंड के रास्ते म्यांमार पहुँचाने की व्यवस्था करता था। पीड़ितों को पहले बैंकॉक ले जाया जाता था, फिर मे सॉट होते हुए थाईलैंड-म्यांमार सीमा अवैध रूप से पार कराकर साइबर ठगी केंद्रों में धकेला जाता था।
दूसरा आरोपी भारत में सक्रिय सब-एजेंटों के नेटवर्क का संचालन करता था। जाँच में सामने आया कि वह थाईलैंड-म्यांमार सीमा के निकट स्थित एक स्कैम कंपाउंड के कार्यालय से काम करता था और अवैध ठगी केंद्रों के संचालकों से क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिये भुगतान प्राप्त करता था।
आम जनता और कर्मचारियों पर असर
यह मामला सार्वजनिक उपक्रमों में भ्रष्टाचार की उस प्रवृत्ति को उजागर करता है जहाँ निचले स्तर के अधिकारी सेवा-संबंधी निर्णयों के बदले अनुचित लाभ उठाते हैं। एमसीएल कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी इकाई है और ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ में कोयला उत्खनन का प्रमुख केंद्र है।
गौरतलब है कि सीबीआई पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में रिश्वतखोरी के मामलों में सक्रियता से कार्रवाई कर रही है। यह गिरफ्तारी उस अभियान की कड़ी है।
आगे की कार्रवाई
सीबीआई दोनों मामलों में आगे की जाँच जारी रखेगी। मानव तस्करी मामले में गिरफ्तार आरोपियों के संपर्क सूत्रों और नेटवर्क की गहन पड़ताल की जाएगी, ताकि भारत में सक्रिय सब-एजेंटों की पहचान की जा सके।