3 नवंबर 2026
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लखनऊ सीबीआई कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी सिंचाई विभाग के पूर्व जेई रामभवन को चाइल्ड पोर्नोग्राफी में 3 साल की सजा

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लखनऊ सीबीआई कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी सिंचाई विभाग के पूर्व जेई रामभवन को चाइल्ड पोर्नोग्राफी में 3 साल की सजा

सारांश

लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने यूपी सिंचाई विभाग के पूर्व जेई रामभवन को बाल यौन शोषण सामग्री प्रसारित करने के मामले में 3 साल की कठोर सज़ा सुनाई। सह-दोषी नीलेश गोरे को 1 साल की सज़ा मिली। यह मामला 2022 में दर्ज हुआ था और महाराष्ट्र तक फैली जांच के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया।

मुख्य बातें

लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने 31 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया।
यूपी सिंचाई विभाग के पूर्व जेई रामभवन को 3 साल का कठोर कारावास और जुर्माना।
सह-दोषी नीलेश बलिराम गोरे को 1 साल का कठोर कारावास और जुर्माना।
सीबीआई ने मामला 23 अप्रैल 2022 को दर्ज किया; भुसावल व जलगांव में तलाशी ली गई।
अलग मामले में सीबीआई ने ग्रेटर नोएडा पीएनबी शाखा में ₹10.24 करोड़ की कथित धोखाधड़ी पर एफआईआर दर्ज की।

लखनऊ की विशेष केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अदालत ने 31 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग के पूर्व जूनियर इंजीनियर रामभवन को बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (सीएसएईएम) को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रकाशित और प्रसारित करने के मामले में तीन साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। इस मामले में सह-दोषी नीलेश बलिराम गोरे को एक साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा दी गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

सीबीआई ने 23 अप्रैल 2022 को दोनों आरोपियों के खिलाफ यह मामला दर्ज किया था। आरोपियों पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री एकत्र करने, प्रसारित करने और प्रकाशित करने के आरोप लगाए गए थे। जांच के दौरान महाराष्ट्र के भुसावल और जलगांव में तलाशी ली गई और डिजिटल उपकरणों को जब्त कर उनकी फोरेंसिक जांच की गई।

जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 30 दिसंबर 2022 को दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। विशेष सीबीआई अदालत ने 21 जुलाई 2026 को आरोप तय किए और मुकदमे की कार्यवाही पूरी होने के बाद दोनों को दोषी पाते हुए सज़ा सुनाई।

सीबीआई की प्रतिक्रिया

सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि एजेंसी बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े अपराधों की जांच और मुकदमा चलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को उच्च प्राथमिकता दी जाती है और बच्चों की सुरक्षा, अधिकारों व गरिमा को सर्वोपरि रखा जाता है। गौरतलब है कि यह मामला एक सरकारी अधिकारी की संलिप्तता के कारण अतिरिक्त गंभीरता रखता है।

ग्रेटर नोएडा पीएनबी धोखाधड़ी मामले में एफआईआर

एक अलग मामले में, सीबीआई ने ग्रेटर नोएडा स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की 'सेक्टर पीआई' शाखा में ग्राहकों के खातों से कथित तौर पर ₹10.24 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज की है। बैंक की आंतरिक जांच में संदिग्ध लेनदेन का पता चला, जिसमें एक महिला कर्मचारी और कई अन्य व्यक्तियों की कथित संलिप्तता सामने आई।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, महिला कर्मचारी ने कथित तौर पर बैंक के अन्य अधिकारियों की यूज़र आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग करते हुए ग्राहकों के खातों से अनधिकृत लेनदेन किए और राशि को अपने सहयोगियों से जुड़े खातों में स्थानांतरित कर दी। सीबीआई के अनुसार ये कथित अनियमितताएँ लगभग तीन वर्षों तक किसी की पकड़ में नहीं आईं।

आम जनता और व्यवस्था पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब बाल यौन शोषण सामग्री के ऑनलाइन प्रसार को लेकर देशभर में कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की सख्ती बढ़ी है। सीबीआई की यह कार्रवाई दर्शाती है कि सरकारी पद पर रहे व्यक्तियों को भी ऐसे अपराधों में कोई छूट नहीं मिलती। पीएनबी धोखाधड़ी प्रकरण बैंकिंग प्रणाली में आंतरिक साइबर सुरक्षा की खामियों को रेखांकित करता है।

आगे की कार्यवाही में रामभवन और नीलेश गोरे के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है, जबकि पीएनबी मामले में जांच अभी प्रारंभिक चरण में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बाल यौन शोषण जैसे संवेदनशील मामलों में न्याय की गति पर सवाल उठाता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि डिजिटल अपराधों में राज्य की सीमाएँ कोई बाधा नहीं बनतीं — महाराष्ट्र में तलाशी और उत्तर प्रदेश में आरोपी, यही इस मामले की जटिलता है। पीएनबी धोखाधड़ी प्रकरण एक बार फिर दिखाता है कि बैंकिंग क्षेत्र में आंतरिक एक्सेस कंट्रोल कितनी आसानी से भेदी जा सकती है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामभवन के खिलाफ सीबीआई का मामला क्या है?
रामभवन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पूर्व जूनियर इंजीनियर हैं, जिन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (सीएसएईएम) प्रकाशित और प्रसारित करने के मामले में दोषी पाया गया। सीबीआई ने यह मामला 23 अप्रैल 2022 को दर्ज किया था।
लखनऊ सीबीआई अदालत ने क्या सज़ा सुनाई?
31 अक्टूबर 2026 को विशेष सीबीआई अदालत ने रामभवन को 3 साल का कठोर कारावास और जुर्माना सुनाया। सह-दोषी नीलेश बलिराम गोरे को 1 साल का कठोर कारावास और जुर्माने की सज़ा दी गई।
इस मामले में जांच कहाँ-कहाँ हुई?
जांच के दौरान सीबीआई ने महाराष्ट्र के भुसावल और जलगांव में तलाशी ली और डिजिटल उपकरणों को जब्त कर उनकी जांच की। चार्जशीट 30 दिसंबर 2022 को दाखिल की गई और 21 जुलाई 2026 को आरोप तय हुए।
ग्रेटर नोएडा पीएनबी धोखाधड़ी मामला क्या है?
सीबीआई ने ग्रेटर नोएडा की पंजाब नेशनल बैंक की 'सेक्टर पीआई' शाखा में ₹10.24 करोड़ की कथित धोखाधड़ी पर एफआईआर दर्ज की है। एक महिला कर्मचारी पर अन्य अधिकारियों की यूज़र आईडी और पासवर्ड के दुरुपयोग से ग्राहकों के खातों से अनधिकृत लेनदेन करने का आरोप है।
बाल यौन शोषण सामग्री के मामलों में सीबीआई की क्या नीति है?
सीबीआई के अनुसार, एजेंसी बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े अपराधों को उच्च प्राथमिकता देती है और बच्चों की सुरक्षा, अधिकारों व गरिमा की रक्षा के लिए ऐसे मामलों की जांच और मुकदमे के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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