पीएमईजीपी लोन घोटाला: सीबीआई ने बांदीपोरा में 19 के खिलाफ एफआईआर दर्ज, जेएंडके बैंक अधिकारी भी घेरे में
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत कथित ऋण घोटाले में 19 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। अभियुक्तों में निजी व्यक्ति, जम्मू एवं कश्मीर बैंक (जेएंडके बैंक) के अधिकारी और विभिन्न सरकारी संस्थाओं से जुड़े लोक सेवक शामिल हैं। यह मामला बांदीपोरा के सुम्बल स्थित जेएंडके बैंक शाखा में वर्ष 2022 से स्वीकृत किए गए कई पीएमईजीपी ऋणों में कथित अनियमितताओं और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से संबंधित है।
मुख्य आरोप और घोटाले का तरीका
सीबीआई द्वारा पिछले सप्ताह दर्ज एफआईआर के अनुसार, इस मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार जैसे संगीन आरोप हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि बैंक के कुछ अज्ञात अधिकारियों ने कथित तौर पर लाभार्थियों और निजी व्यक्तियों के साथ मिलीभगत कर बड़ी संख्या में पीएमईजीपी ऋण स्वीकृत करवाए।
एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि लाभार्थियों के नाम पर जारी की गई ऋण राशि को बाद में फर्जी और काल्पनिक बिलों तथा इनवॉइस के माध्यम से आरोपियों के खातों में स्थानांतरित कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस कथित साजिश में कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों की भी संलिप्तता हो सकती है।
सरकारी खजाने को नुकसान
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि इस कथित घोटाले से जेएंडके बैंक और सरकारी खजाने को आर्थिक क्षति पहुँची, जबकि आरोपियों और कुछ अज्ञात लोक सेवकों ने इससे अनुचित लाभ उठाया। शुरुआती जांच में यह मामला सार्वजनिक धन के गबन और दुरुपयोग का भी संकेत देता है।
जांच के दायरे में कौन-कौन
19 नामित आरोपियों के अलावा, सीबीआई ने खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड (केवीआईबी), खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) और जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) से जुड़े कुछ लोक सेवकों, बैंक अधिकारियों तथा निजी व्यक्तियों को भी जांच के दायरे में रखा है। एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं सहित विभिन्न आपराधिक धाराएँ लगाई गई हैं।
पीएमईजीपी योजना क्या है
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में उद्यमशीलता को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर सृजित करना है। इस योजना के तहत सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिसे सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से वितरित किया जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी योजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं पर देशभर में नज़र कड़ी हो रही है।
आगे क्या होगा
सीबीआई के अनुसार, मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। गौरतलब है कि इस तरह के मामलों में जांच एजेंसी आमतौर पर संपत्तियों की कुर्की और आरोपियों की गिरफ्तारी की दिशा में आगे बढ़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले की जांच से जम्मू-कश्मीर में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर व्यापक सवाल उठ सकते हैं।