सीबीएसई ने वेदांत श्रीवास्तव को सही फिजिक्स उत्तर पुस्तिका भेजी, OSM प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सोमवार, 26 मई 2025 को कक्षा 12 के छात्र वेदांत श्रीवास्तव को उनकी सही फिजिक्स उत्तर पुस्तिका ईमेल के ज़रिए भेजी — यह कदम उस विवाद के बाद उठाया गया जिसमें बोर्ड ने मूल्यांकन समीक्षा के अनुरोध पर गलती से किसी अन्य छात्र की उत्तर पुस्तिका साझा कर दी थी। बोर्ड ने यह भी पुष्टि की कि पुनर्मूल्यांकन के बाद वेदांत के अंकों में संशोधन किया जाएगा।
मामला कैसे शुरू हुआ
वेदांत श्रीवास्तव ने 19 मई को फिजिक्स में उम्मीद से कम अंक आने पर अपनी उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी के लिए आवेदन किया था। चार दिन बाद, जब उन्हें ईमेल पर प्रति मिली, तो उन्होंने पाया कि वह उत्तर पुस्तिका उनकी लिखावट से बिल्कुल मेल नहीं खाती और स्पष्ट रूप से किसी अन्य परीक्षार्थी की थी।
वेदांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा: 'मैं सीबीएसई का 12वीं कक्षा का छात्र हूं। फिजिक्स में अप्रत्याशित रूप से कम अंक आने के बाद, हमने सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी के लिए आवेदन किया था। आज हमें प्रतियां मिल गईं और मैं बहुत निराश हूं क्योंकि सीबीएसई द्वारा अपलोड की गई फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका मेरी नहीं है।' यह पोस्ट 35 लाख से अधिक बार देखी गई और 48,000 से अधिक लोगों ने इसे लाइक किया।
सीबीएसई की प्रतिक्रिया
व्यापक जनाक्रोश के बाद सीबीएसई ने तुरंत घोषणा की कि मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया जा रहा है और जाँच के लिए एक समर्पित टीम नियुक्त की गई है। बोर्ड ने वेदांत के परिवार से संपर्क कर आश्वासन दिया कि गलती सुधारी जाएगी और अंक अपडेट किए जाएंगे।
सोमवार को सीबीएसई ने सही उत्तर पुस्तिका ईमेल के ज़रिए भेज दी। वेदांत ने इसके बाद एक्स पर लिखा: 'आपकी जानकारी के लिए सही उत्तर पुस्तिका के स्क्रीनशॉट संलग्न कर रहा हूं। हम इस उत्तर पुस्तिका की गहन जांच के बाद पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करेंगे, क्योंकि सही उत्तर होने के बावजूद मेरे अंक काट दिए गए हैं।'
OSM प्रणाली पर उठते सवाल
यह विवाद सीबीएसई द्वारा इस वर्ष लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को मैन्युअल रूप से जाँचने की बजाय स्कैन करके स्क्रीन पर चिह्नित किया जाता है। इस प्रणाली की शुरुआत के बाद से छात्रों में जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तुलना में कम अंक आने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
इसके अलावा पोर्टल पर तकनीकी गड़बड़ियों की भी सूचनाएं मिली हैं — जिनमें फोटोकॉपी शुल्क में उतार-चढ़ाव, धुंधली स्कैन प्रतियाँ और पुनर्मूल्यांकन के दौरान पोर्टल क्रैश होने के आरोप शामिल हैं। गौरतलब है कि इस घटनाक्रम ने सीबीएसई की परिणाम-पश्चात सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को नए सिरे से जाँच के दायरे में ला दिया है।
आम छात्रों और अभिभावकों पर असर
इस मामले ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश पैदा किया है। रिपोर्टों के अनुसार, मुद्दा उठाने के बाद वेदांत और उनके परिवार को ऑनलाइन ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। डिजिटल मूल्यांकन में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर देशव्यापी बहस तेज़ हो गई है।
आगे क्या होगा
बोर्ड ने वेदांत के फोटोकॉपी रिकॉर्ड और अंकों को अपडेट करने का वादा किया है। हालाँकि, इस लेख के प्रकाशन तक सीबीएसई ने विशिष्ट आरोपों पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया था। यह मामला इस बात की बड़ी परीक्षा है कि क्या बोर्ड अपनी डिजिटल प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में कदम उठाएगा या यह विवाद महज एक अपवाद बनकर रह जाएगा।