राज्य वित्त आयोगों को मजबूत करने की पहल: CEA नागेश्वरन सोमवार को जारी करेंगे डेटासेट रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत में राजकोषीय विकेंद्रीकरण को साक्ष्य-आधारित और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ठोस कदम उठाया है। सोमवार, 9 जून 2025 को मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन 'राज्य वित्त आयोगों के लिए डेटासेट संबंधी समिति' की रिपोर्ट का विमोचन करेंगे। यह रिपोर्ट स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधन आवंटन की प्रक्रिया को डेटा-समर्थित और पारदर्शी बनाने का खाका प्रस्तुत करती है।
रिपोर्ट विमोचन कार्यक्रम में कौन-कौन होंगे मौजूद
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज, राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (NIPFP) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनीष गुप्ता तथा कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। रिपोर्ट जारी होने के बाद CEA नागेश्वरन डेटा-आधारित नीतिनिर्माण और साक्ष्य-आधारित वित्तीय शासन पर मुख्य भाषण देंगे, जिसमें सशक्त स्थानीय स्वशासन के लिए विश्वसनीय आँकड़ों की भूमिका पर ज़ोर दिया जाएगा।
रिपोर्ट में क्या है
यह रिपोर्ट राज्य वित्त आयोगों के लिए आवश्यक आँकड़ों और सूचनाओं का एक व्यवस्थित एवं व्यापक ढाँचा प्रस्तुत करती है। इसमें डेटा की उपलब्धता बढ़ाने, उसके मानकीकरण, विभिन्न प्रणालियों के बीच बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी और स्थानीय स्तर पर वित्तीय विश्लेषण के लिए संस्थागत क्षमता निर्माण से जुड़े व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं।
सरकारी बयान के अनुसार, यह दस्तावेज़ राज्य सरकारों, राज्य वित्त आयोगों, संवैधानिक संस्थाओं, आर्थिक शोधकर्ताओं और लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण के क्षेत्र में कार्यरत सभी हितधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री बनेगी।
राज्य वित्त आयोगों की संवैधानिक भूमिका
संविधान के अनुच्छेद 243-I के तहत गठित राज्य वित्त आयोग, पंचायत राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने और स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधनों के बंटवारे के सिद्धांत तय करने हेतु सिफारिशें देने वाले प्रमुख संवैधानिक निकाय हैं। मंत्रालय के अनुसार, इन आयोगों को अपनी ज़िम्मेदारियाँ प्रभावी ढंग से निभाने के लिए जनसंख्या, बुनियादी ढाँचे, सेवा वितरण और परिसंपत्ति प्रबंधन से जुड़े विश्वसनीय, समयबद्ध और विस्तृत आँकड़ों की आवश्यकता होती है — जो अब तक पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं थे।
समिति के गठन की पृष्ठभूमि
पंचायती राज मंत्रालय ने यह समिति नवंबर 2024 में आयोजित 'विकास के लिए वित्तीय हस्तांतरण' विषयक वित्त आयोग सम्मेलन के बाद गठित की थी। यह सम्मेलन 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष की अगुवाई में हुआ था, जिसमें विभिन्न विभागों और एजेंसियों से व्यापक आँकड़े जुटाने में आने वाली कठिनाइयों को राज्य वित्त आयोगों की सिफारिशों की गुणवत्ता और समयबद्धता को प्रभावित करने वाली एक बड़ी चुनौती के रूप में चिह्नित किया गया था।
आगे क्या होगा
सरकार का मानना है कि इस रिपोर्ट की सिफारिशें लागू होने से राज्य वित्त आयोगों को बेहतर डेटा उपलब्ध होगा, जिससे स्थानीय निकायों के लिए अधिक सटीक वित्तीय सिफारिशें तैयार की जा सकेंगी। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार तृतीय स्तरीय शासन को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दे रही है। रिपोर्ट के क्रियान्वयन से देश में वित्तीय विकेंद्रीकरण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।