चैत्र नवरात्र: आगमन और प्रस्थान के संकेत, जानें क्या कहती हैं देवी की सवारी

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चैत्र नवरात्र: आगमन और प्रस्थान के संकेत, जानें क्या कहती हैं देवी की सवारी

सारांश

चैत्र नवरात्र के शुभारंभ के साथ मां भवानी के आगमन और प्रस्थान के संकेतों का महत्व जानें। देवी की सवारी से जुड़ी घटनाएँ और उनके भविष्यवाणी संकेतों पर चर्चा करें।

Key Takeaways

  • चैत्र नवरात्र का महत्व धार्मिक दृष्टि से बड़ा है।
  • मां का आगमन और प्रस्थान संकेत प्रदान करता है।
  • पालकी और हाथी पर सवारी के विभिन्न अर्थ हैं।
  • शास्त्रों के अनुसार, शुभ और अशुभ के संकेतों को समझना आवश्यक है।
  • नवरात्रि का त्योहार भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।

नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हर साल देशभर में आदिशक्ति मां भवानी के नौ रूपों की विशेष आराधना की जाती है। आध्यात्मिक दृष्टि से चैत्र और शारदीय नवरात्र दोनों का अत्यधिक महत्व है। इस वर्ष 19 मार्च से चैत्र नवरात्र का प्रारंभ हो चुका है और श्रद्धा के साथ देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जा रही है। नवरात्रि न केवल हिंदू नव-वर्ष के आगमन का प्रतीक है, बल्कि माता रानी के आगमन की सवारी और विशेष 'वार' (दिन) के अनुसार भविष्य के शुभाशुभ संकेतों का आधार भी है।

सनातन धर्म में चैत्र नवरात्र पर मां दुर्गा के वाहन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह आगामी घटनाओं का पूर्व संकेत देता है। इस बार मां जगदम्बा का आगमन गुरुवार को 'पालकी' पर हुआ है, जबकि प्रस्थान शुक्रवार को 'गज' (हाथी) पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, देवी का पालकी पर आगमन शुभ नहीं माना जाता; यह प्राकृतिक आपदाओं या अप्रिय घटनाओं का संकेत देता है, जो भविष्य में चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।

गुरुवार को आगमन से जोड़कर इसे सावधानी और आर्थिक चुनौतियों का संकेत माना जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, यह प्राकृतिक आपदा, उपद्रव, दंगे और जनहानि का संकेत है। वहीं, मां शुक्रवार को हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी। मां का हाथी पर आना और जाना दोनों ही शुभ माना जाता है। हाथी स्थिरता और सुख-संपत्ति का प्रतीक है। यह जीवन में सकारात्मकता और बदलाव का प्रतीक भी माना जाता है। ऐसे में यह साल अप्रिय घटनाओं के साथ-साथ स्थिरता की संभावना भी रखता है।

वर्ष 2025 में शारदीय नवरात्रि में मां का आगमन हाथी पर हुआ था, लेकिन प्रस्थान गुरुवार को भक्तों के कंधे पर हुआ था। यह दोनों ही शुभता और संतुलन का प्रतीक थे।

गौरतलब है कि वार के हिसाब से मां का प्रस्थान बहुत मायने रखता है। जैसे, यदि मां रविवार और सोमवार के दिन प्रस्थान करती हैं, तो उनकी सवारी भैंसे पर होती है, जो शुभ नहीं होता। भैंसा रोग और शोक का प्रतीक होता है। वहीं, यदि मां मंगलवार और शनिवार के दिन प्रस्थान करती हैं, तो उनकी सवारी मुर्गा होती है, जिसे महामारी और जनहानि का संकेत माना जाता है। यदि मां बुधवार और शुक्रवार के दिन प्रस्थान करती हैं, तो मां की सवारी हाथी होती है, जो सुख और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा, यदि प्रस्थान गुरुवार को होता है, तो मां की सवारी मनुष्य होती है। इसे भी शुभ माना जाता है।

Point of View

NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

चैत्र नवरात्र कब से शुरू होते हैं?
चैत्र नवरात्र प्रत्येक वर्ष मार्च के महीने में शुरू होते हैं। इस वर्ष, यह 19 मार्च से प्रारंभ हुआ।
मां का हाथी पर सवार होना किसका संकेत है?
हाथी पर मां का सवार होना स्थिरता और सुख-संपत्ति का प्रतीक माना जाता है।
पालकी पर आगमन का क्या अर्थ है?
पालकी पर आगमन को शुभ नहीं माना जाता, यह प्राकृतिक आपदाओं का संकेत हो सकता है।
नवरात्र में देवी की सवारी का महत्व क्या है?
यह देवी की सवारी का दिन भविष्य के शुभाशुभ संकेत देता है।
नवरात्र का क्या धार्मिक महत्व है?
नवरात्र हिंदू नव-वर्ष की शुरुआत और मां भवानी की आराधना का प्रतीक है।
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