चैत्र नवरात्रि से लेकर उगादी तक, भारत में हिंदू नव-वर्ष के विभिन्न उत्सव
सारांश
Key Takeaways
- चैत्र नवरात्रि का आयोजन 19 से 27 मार्च तक होता है।
- गुड़ी-पड़वा और उगादि हिंदू नव-वर्ष के मुख्य उत्सव हैं।
- नीम पत्तियों का महत्व जीवन के कड़वे और मीठे अनुभवों का प्रतीक है।
- पचड़ी में पांच स्वादों का समावेश होता है, जो जीवन के विभिन्न अनुभवों को दर्शाता है।
- चेटीचंड सिंधी नव-वर्ष का प्रतीक है।
नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि, गुरुवार को त्योहारों का दिन है। उत्तर भारत में इसे नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है, जबकि दक्षिण-पश्चिम भारत में इसे गुड़ी-पड़वा, उगादि और चेटीचंड (सिंधी नव-वर्ष) के नाम से मनाया जा रहा है।
हालांकि त्योहारों के नाम भिन्न हैं, लेकिन सभी का मुख्य उद्देश्य खुशी और उल्लास के साथ हिंदू नव-वर्ष का स्वागत करना है। चैत्र का महीना स्वास्थ्य और अध्यात्म के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है, जिसमें नीम और गुण का विशेष स्थान है।
चलिए पहले चैत्र नवरात्रि के बारे में जानते हैं। 19 मार्च से लेकर 27 मार्च तक मां भवानी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। आज घटस्थापना के साथ मां के पहले रूप, शैलपुत्री, की पूजा की जाएगी, जिन्हें नई शुरुआत और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। हर दिन मां के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा की जाएगी।
गुड़ी-पड़वा और उगादि का पर्व पश्चिम भारत से लेकर दक्षिण भारत तक हिंदू नव-वर्ष के स्वागत के लिए मनाया जाता है। गुड़ी-पड़वा में घर को नीम की पत्तियों से सजाया जाता है। पूजा से लेकर वंतरवार तक नीम के पत्तों का उपयोग किया जाता है, जो जीवन की कड़वे और मीठे पलों का प्रतीक है। गुड़ी का अर्थ है विजय ध्वज, और पड़वा का अर्थ है प्रतिप्रदा। इस दिन लोग घर में केसरी रंग का ध्वज भी लगाते हैं, जिसे सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में चैत्र प्रतिपदा को उगादि मनाया जाता है। यह भी हिंदू नव-वर्ष के स्वागत का पर्व है, लेकिन दक्षिण भारत में इसे अलग नाम से जाना जाता है। उगादि का अर्थ है, नए युग का उदय। इस दिन लोग सुबह उठकर तेल अभ्यंग से दिन की शुरुआत करते हैं और फिर नीम के पानी से स्नान करते हैं। नए कपड़े पहनकर नीम और आम के पत्तों से घर को सजाते हैं और नीम और गुड़ से बना मीठा व्यंजन भी मनाते हैं, खासतौर पर पचड़ी। पचड़ी ऐसा व्यंजन है जिसमें एक साथ पांच स्वाद—मीठा, खट्टा, कड़वा, तीखा, नमकीन, कसैला—मिलते हैं। यह व्यंजन जीवन के हर अनुभव का अहसास कराता है और जीवन में आने वाली हर मुश्किल से लड़ने की शक्ति भी देता है।
सिंधी समुदाय में चैत्र के दूसरे दिन चेटीचंड मनाया जाता है, जो इस बार 20 मार्च को मनाया जाएगा। यह त्योहार भी चैत्र माह से शुरू हुए हिंदू नव-वर्ष का प्रतीक है। यह दिन वरूणावतर स्वामी झूलेलाल के प्रकाट्य दिवस और समुद्र पूजा के रूप में मनाया जाता है।