चैत्र नवरात्रि की शुरुआत: जानिए कलश स्थापना का सही समय और विधि
सारांश
Key Takeaways
- चैत्र नवरात्रि का महत्व और शुभ मुहूर्त
- कलश स्थापना की विधि
- माता रानी की पूजा के नियम
- श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा
- कलश में सामग्री डालने का तरीका
प्रयागराज, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र का महत्व अत्यधिक है। इस अवसर पर माता के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा की जाती है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र का आरंभ 19 तारीख से होगा और इसी दिन हिंदू नववर्ष का भी आगाज़ हो रहा है, जिससे यह दिन और भी विशेष बन जाता है। प्रयागराज में पंडित शिप्रा सचदेव ने इस विषय पर राष्ट्र प्रेस से बातचीत की।
पंडित शिप्रा सचदेव ने बताया कि कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 6:50 से 7:52 बजे तक है। इसके अतिरिक्त, अभिजीत मुहूर्त 12:05 से 12:50 बजे तक रहेगा। इस बार केवल यही दो मुहूर्त हैं, इसलिए यदि आप कलश स्थापना करना चाहते हैं तो इन्हीं समयों में करना उचित रहेगा। कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है, इसे पूरी श्रद्धा और भक्ति से करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस बार माता रानी पालकी में सवार होकर आ रही हैं। जब आप कलश स्थापना करेंगे, तो इसमें आपकी श्रद्धा एवं मनोकामनाएं शामिल होनी चाहिए। स्थापना के समय नौ लौंग ले सकते हैं, उन्हें कलावे में बांधकर माला बना लें और माता के गले में पहले दिन अर्पित करें। इससे मां का आशीर्वाद आपके ऊपर सदैव बना रहेगा।
पंडित शिप्रा ने बताया कि कलश के लिए आप सोने, चांदी या किसी भी धातु का कलश ले सकते हैं, लेकिन मिट्टी का कलश सबसे शुभ माना जाता है। इसमें सबसे पहले जल भरें, थोड़ा सा गंगाजल, हल्दी का एक गांठ, सुपारी, दो लौंग और दो इलायची डालें। इसके साथ एक सिक्का, थोड़ा सा अक्षत और फूल भी डाल सकते हैं। इसके बाद, पांच या सात आम के पत्ते या अशोक के पत्ते रखें।
इसके बाद कलश के ऊपर एक दियली रखें और उसमें चावल भरें। फिर, नारियल को लाल कपड़े में बांधकर कलश के ऊपर रखें। इस पूरी प्रक्रिया के बाद कलश को माता के चरणों में समर्पित करें।