नीट पेपर लीक: अजय राय का आरोप — चंदा घोटाले से ध्यान भटकाने को छात्रों पर लाठियाँ
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने 24 जुलाई को लखनऊ में नीट पेपर लीक विवाद पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की माँग की। राय ने आरोप लगाया कि सरकार चंदे की चोरी और फंड के दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग कर रही है।
मुख्य आरोप और बयान
अजय राय ने कहा, 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। चंदे की चोरी और फंड के गलत इस्तेमाल के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए वे आज बच्चों की आवाज को पूरी तरह दबा रहे हैं। वे उन पर लाठियाँ बरसा रहे हैं और उन्हें जलील कर रहे हैं।' उन्होंने एक छात्रा के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का उल्लेख करते हुए इसे 'अत्यंत निंदनीय' बताया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग
राय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार को धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल बर्खास्त करना चाहिए। उन्होंने यह भी माँग की कि छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई हो और उन्हें सेवा से निलंबित किया जाए। फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन की सरकारी घोषणा पर उन्होंने कहा कि पहले दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
छात्र और राष्ट्रभक्ति पर तीखी टिप्पणी
राय ने तर्क दिया कि छात्र हिंदुस्तान का भविष्य हैं और उन्हें देशद्रोही करार देना पूरे देश को कटघरे में खड़ा करना है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शनकारी छात्र राष्ट्रद्रोही हैं, तो इसका अर्थ है कि केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोग ही देशभक्त माने जा रहे हैं — जो उनके अनुसार एक खतरनाक सोच है।
राम मंदिर ट्रस्ट और संतों की भूमिका
राम जन्मभूमि ट्रस्ट में नए सीईओ की नियुक्ति और पाँच संतों को शामिल किए जाने के प्रश्न पर राय ने कहा कि राम जन्मभूमि से जुड़े सभी कार्य संतों के माध्यम से होने चाहिए और सम्मानित शंकराचार्य को भी इसमें स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में राजनीतिक नेताओं और RSS से जुड़े लोगों को दूर रखा जाना चाहिए।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का लखनऊ दौरा
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के लखनऊ दौरे पर राय ने बताया कि उन्होंने शंकराचार्य से भेंट की। शंकराचार्य गाय को 'राष्ट्र माता' घोषित करने की माँग को लेकर पूरे प्रदेश की यात्रा पर निकले थे, किंतु लखनऊ में उनके समापन कार्यक्रम को अनुमति नहीं दी गई — जिसे राय ने अनुचित बताया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब नीट पेपर लीक मामला पूरे देश में राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है और विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर दबाव बना रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और सड़क — दोनों स्तरों पर राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।