27 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि: अल्फ्रेड पार्क में अपने प्रण को निभाते हुए दी अंतिम सांस

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि: अल्फ्रेड पार्क में अपने प्रण को निभाते हुए दी अंतिम सांस

सारांश

चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर जानें उनके अद्वितीय साहस और बलिदान की कहानी, जिसने आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी। उनकी जीवन यात्रा और वीरता का परिचय देते हुए यह लेख आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्य बातें

चंद्रशेखर आजाद का जन्म २३ जुलाई १९०६ को हुआ।
उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया।
उनका नारा "भारत माता की जय" था।
पुण्यतिथि २७ फरवरी को मनाई जाती है।
उन्होंने अल्फ्रेड पार्क में अंतिम सांस ली।

नई दिल्ली, २६ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। "दुश्मन की गोलियों का सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे।" ये सिर्फ चंद्रशेखर आजाद के शब्द नहीं थे, बल्कि यह भारत की भूमि के प्रति मर मिटने का संकल्प था। फौलाद जैसे शरीर, मूंछों पर ताव और चेहरे पर तेज वाले चंद्रशेखर आजाद की आंखों में आजादी का सपना था। वे ऐसे वीर सपूत थे, जिन्होंने अपनी बहादुरी और साहस की गाथा खुद लिखी।

२७ फरवरी को चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि है। १९२० से १९३० के दशक में जब अंग्रेजी हुकूमत का दमन अपने चरम पर था, उस समय चंद्रशेखर आजाद जैसे मतवाले ने आजादी की वो अलख

२३ जुलाई १९०६ को मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के भाबरा में जन्मे चंद्रशेखर के सीने में बचपन से एक मशालपत्थर फेंकने के लिए प्रेरित किया।

महज १४ साल की उम्र में महात्मा गांधी के साथ असहयोग आंदोलन में भाग लिया। जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, तो उन्होंने अपना नाम 'आजाद', पिता का नाम 'आजादी' और पता 'जेल खाना' बताया। उनकी कम उम्र के कारण अंग्रेज मजिस्ट्रेट चाहकर भी उन्हें चारदीवारी के अंदर की खौफनाक सजा नहीं सुना सकता था। इसलिए खीजकर उन्हें १५ कोड़े की सजा सुनाई गई। हर कोड़े की मार पर दर्द नहीं था, बल्कि उनकी जुबान से "भारत माता की जय" का नारा निकला। यही वह घटना थी, जिसने बालक चंद्रशेखर तिवारी को 'चंद्रशेखर आजाद' बना दिया।

इतिहासकार कपिल कुमार ने एक इंटरव्यू में कहा, "चौरी-चौरा कांड के बाद महात्मा गांधी की तरफ से अपने आंदोलन को वापस लेने के निर्णय ने चंद्रशेखर आजाद को क्रांतिकारी बना दिया।"

उनका मानना था कि अगर आपके लहू में रोष नहीं है, तो ये पानी है जो आपकी रगों में बह रहा है। ऐसी जवानी का क्या मतलब अगर वह मातृभूमि के काम न आए?

जब असहयोग आंदोलन को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हुई और अंग्रेजों की बर्बरता बढ़ने लगी, तो चंद्रशेखर आजाद ने सशस्त्र क्रांति की दिशा में कदम बढ़ाया। वे बहुत जल्दी युवाओं के आदर्श बन गए। अपनी बुद्धिमता से अंग्रेजों को चकमा देते रहे और नई-नई योजनाएँ बनाकर युवाओं को एकजुट करते रहे।

उन्होंने भगत सिंह के साथ मिलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' की स्थापना की। इसके अलावा, आजाद ने अन्य क्रांतिकारी सदस्यों के साथ मिलकर अंग्रेजों को भारत से भगाने का हरसंभव प्रयास किया। इतिहासकार कपिल कुमार ने इस बारे में कहा, "पहले हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य क्रांतिकारी तरीकों से देश के अंदर गणतंत्र की स्थापना करना था।"

वे कहते थे, "चिंगारी आजादी की सुलगी मेरे जश्न में है, इंकलाब की ज्वालाएं लिपटी मेरे बदन में हैं।"

आजाद ने स्वाधीनता संग्राम को एक नए आयाम तक पहुँचा दिया। काकोरी की धरपकड़ और मुकदमे के दौरान पुलिस की सभी कोशिशों के बावजूद वे पकड़ में नहीं आए। इस घटना ने ब्रिटिश सरकार को हिलाकर रख दिया।

उनका संकल्प था कि 'आखिरी सांस' तक उन्हें कोई जीवित पकड़ न सके। उन्होंने कभी अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया। २७ फरवरी १९३१ को मुखबिर की सूचना पर ब्रिटिश पुलिस ने चंद्रशेखर आजाद को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में घेर लिया। उन्होंने बहादुरी से पुलिस का सामना किया। इतिहासकार कपिल कुमार कहते हैं, "अंग्रेजों ने इस देश में कोई भी युद्ध बिना गद्दारों के नहीं जीता।"

उनके अनुसार, जब चंद्रशेखर आजाद इलाहाबाद में थे, वे किसी के घर से आ रहे थे। यहाँ लोगों को पता था कि ये चंद्रशेखर आजाद हैं। सुखदेव से उनकी मुलाकात होनी थी। ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें घेर लिया और दोनों तरफ से गोलीबारी हुई।

जब आजाद को पता लगा कि बच निकलने का कोई रास्ता नहीं है, तो उन्होंने अपने संकल्प को पूरा करने की ठानी। अंग्रेजी हुकूमत के सामने जीवित पकड़ा जाना उन्हें मंजूर नहीं था, इसलिए भीषण संघर्ष के बीच उन्होंने खुद को गोली मार दी और देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

आजादी की लड़ाई में अद्भुत वीरता का परिचय देने वाले देशभक्तों के कारण ही आज हम आजाद हैं। भारत की हवा में आज भी उन मतवालों की महक है और आजादी के हर एहसास में उस क्रांति की धमक है। इन मतवालों में चंद्रशेखर आजाद का नाम सबसे रोशन है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रशेखर आजाद का जन्म कब हुआ था?
चंद्रशेखर आजाद का जन्म २३ जुलाई १९०६ को मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में हुआ था।
उन्होंने किस आंदोलन में भाग लिया?
उन्होंने १४ साल की उम्र में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में भाग लिया।
उनका प्रसिद्ध नारा क्या था?
उनका प्रसिद्ध नारा था, 'दुश्मन की गोलियों का सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे।'
उनकी पुण्यतिथि कब मनाई जाती है?
उनकी पुण्यतिथि २७ फरवरी को मनाई जाती है।
उन्होंने किस पार्क में अंतिम सांस ली?
उन्होंने इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अपनी अंतिम सांस ली।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले