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चतरा जिला स्थापना दिवस: 851 झारखंड आंदोलनकारियों को शॉल, मोमेंटो व प्रशस्ति पत्र से सम्मान

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चतरा जिला स्थापना दिवस: 851 झारखंड आंदोलनकारियों को शॉल, मोमेंटो व प्रशस्ति पत्र से सम्मान

सारांश

चतरा जिले की स्थापना के 35 वर्ष पूरे होने पर 851 झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया — जिला स्तर पर 122 और प्रखंड स्तर पर 729। उपायुक्त रवि आनंद की अध्यक्षता में हुए इस समारोह ने झारखंड राज्य निर्माण के संघर्ष को नई पीढ़ी के सामने जीवंत किया।

मुख्य बातें

29 मई 2026 को चतरा जिला स्थापना दिवस पर 851 झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया।
जिला स्तर पर 122 और प्रखंड स्तर पर 729 आंदोलनकारियों को शॉल, मोमेंटो व प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
समारोह की अध्यक्षता उपायुक्त रवि आनंद ने की; मुख्य अतिथि सांसद कालीचरण सिंह और विधायक जनार्दन पासवान रहे।
चतरा जिले का गठन 29 मई 1991 को हजारीबाग जिले से अलग कर किया गया था।
कार्यक्रम में भगवान बिरसा मुंडा और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।

चतरा जिले के स्थापना दिवस, 29 मई 2026 पर झारखंड राज्य गठन आंदोलन में योगदान देने वाले 851 आंदोलनकारियों को एक भावपूर्ण समारोह में सम्मानित किया गया। यह आयोजन जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट सह प्रशिक्षण भवन हॉल, चतरा में संपन्न हुआ, जिसमें जिला स्तर पर 122 और प्रखंड स्तर पर 729 आंदोलनकारियों को शॉल, मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनके संघर्ष को याद किया गया।

समारोह का आगाज़ और मुख्य अतिथि

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई और झारखंड आंदोलन के प्रेरणास्रोत भगवान बिरसा मुंडा एवं दिशोम गुरु शिबू सोरेन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। समारोह की अध्यक्षता जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त रवि आनंद ने की। मुख्य अतिथि के रूप में चतरा लोकसभा क्षेत्र के सांसद कालीचरण सिंह, चतरा विधायक जनार्दन पासवान और जिला परिषद अध्यक्षा ममता कुमारी सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

आंदोलनकारियों ने साझा किए संघर्ष के अनुभव

कार्यक्रम के दौरान कई आंदोलनकारियों ने झारखंड राज्य गठन आंदोलन के दौरान अपने त्याग, संघर्ष और अनुभवों को उपस्थित जनों के साथ साझा किया। उनके वक्तव्यों ने सभागार में भावुकता का माहौल बना दिया और नई पीढ़ी को उस ऐतिहासिक जनआंदोलन की गहराई से परिचित कराया।

उपायुक्त का संबोधन

उपायुक्त रवि आनंद ने अपने संबोधन में बताया कि चतरा जिले का गठन 29 मई 1991 को हजारीबाग जिले से अलग कर किया गया था। उन्होंने कहा, 'जिला स्थापना दिवस जिले की विकास यात्रा, उपलब्धियों और जनभागीदारी के संकल्प को स्मरण करने का अवसर है। झारखंड राज्य के निर्माण के लिए आंदोलनकारियों द्वारा किए गए संघर्ष, बलिदान और समर्पण को हम सदैव सम्मान के साथ याद करेंगे। उनकी मेहनत और कुर्बानी के कारण आज हम अलग झारखंड राज्य में रह रहे हैं।' उन्होंने भविष्य में आंदोलनकारियों के योगदान को और बेहतर तरीके से सम्मानित करने का संकल्प भी लिया।

जनप्रतिनिधियों की श्रद्धांजलि

सांसद कालीचरण सिंह और विधायक जनार्दन पासवान ने आंदोलनकारियों के योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा से नई पीढ़ी को विकास के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

आगे की राह

यह समारोह झारखंड आंदोलन के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और आंदोलनकारियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सशक्त माध्यम बना। प्रशासन के संकल्प के अनुरूप आने वाले वर्षों में इस आयोजन को और व्यापक स्वरूप देने की योजना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन आंदोलनकारियों के लिए दीर्घकालिक कल्याण योजनाएँ कितनी सक्रिय हैं। झारखंड में कई आंदोलनकारी आज भी आर्थिक हाशिये पर हैं, और वार्षिक सम्मान समारोह उस खाई को नहीं भरते। प्रशासन का 'बेहतर कार्यक्रम' का संकल्प तभी अर्थपूर्ण होगा जब वह ठोस नीतिगत कदमों में तब्दील हो।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चतरा जिला स्थापना दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
चतरा जिले का गठन 29 मई 1991 को हजारीबाग जिले से अलग कर किया गया था, इसलिए प्रतिवर्ष 29 मई को स्थापना दिवस मनाया जाता है। यह दिन जिले की विकास यात्रा और झारखंड आंदोलन में योगदान देने वाले आंदोलनकारियों को स्मरण करने का अवसर है।
29 मई 2026 को कितने आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया?
कुल 851 झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया — जिसमें जिला स्तर पर 122 और प्रखंड स्तर पर 729 आंदोलनकारी शामिल थे। सभी को शॉल, मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
इस समारोह में कौन-कौन से प्रमुख जनप्रतिनिधि शामिल हुए?
समारोह में चतरा लोकसभा क्षेत्र के सांसद कालीचरण सिंह, चतरा विधायक जनार्दन पासवान और जिला परिषद अध्यक्षा ममता कुमारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त रवि आनंद ने की।
झारखंड आंदोलन में भगवान बिरसा मुंडा और शिबू सोरेन की क्या भूमिका थी?
भगवान बिरसा मुंडा को झारखंड आंदोलन का ऐतिहासिक प्रेरणास्रोत माना जाता है, जबकि दिशोम गुरु शिबू सोरेन आधुनिक झारखंड राज्य गठन आंदोलन के प्रमुख नेता रहे हैं। इसीलिए समारोह की शुरुआत दोनों के चित्र पर पुष्पांजलि से की गई।
चतरा प्रशासन ने आंदोलनकारियों के सम्मान को लेकर भविष्य में क्या संकल्प लिया?
उपायुक्त रवि आनंद ने कहा कि आंदोलनकारियों के योगदान को अमर बनाने के लिए भविष्य में और बेहतर कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। इसे झारखंड आंदोलन के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में एक सतत प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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