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चेन्नई नगर निगम का 40-दिवसीय कचरा अलगाव अभियान फिर शुरू, सर्वश्रेष्ठ परिवारों को मिलेगा पुरस्कार

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चेन्नई नगर निगम का 40-दिवसीय कचरा अलगाव अभियान फिर शुरू, सर्वश्रेष्ठ परिवारों को मिलेगा पुरस्कार

सारांश

चेन्नई नगर निगम का 'कचरे को अलग करें – कल को बचाएं' अभियान फिर चालू है — 50,000 घर, 40 दिन और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर इनाम। बैग मिलने वाले घरों में अनुपालन दर 35% से 64% हो गई, लेकिन वाहनों पर लाल डिब्बों की कमी और असमान भागीदारी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

मुख्य बातें

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) का 40-दिवसीय कचरा अलगाव अभियान 2 अक्टूबर 2026 से दक्षिणी चेन्नई में पुनः शुरू।
अभियान में 50,000 घर लक्षित; 28 सितंबर तक 45,000 घरों को संग्रह बैग और मॉनिटरिंग स्टिकर वितरित।
कलेक्शन बैग मिलने वाले घरों में कचरा अलगाव की दर 35% से बढ़कर 64% हुई।
अभियान के अंत में सर्वश्रेष्ठ कचरा अलगाव करने वाले परिवारों को पुरस्कार दिया जाएगा।
कई वाहनों पर सैनिटरी कचरे के लिए लाल डिब्बे नहीं; ठेकेदार ने ऑर्डर दे दिया, डिलीवरी शीघ्र अपेक्षित।
पूरे चेन्नई में अभियान के विस्तार के लिए अतिरिक्त फंडिंग की आवश्यकता बताई गई।

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ने 2 अक्टूबर 2026 से शहर के दक्षिणी क्षेत्र में अपना 40-दिवसीय घरेलू कचरा अलगाव जागरूकता अभियान पुनः आरंभ किया है। 'कचरे को अलग करें – कल को बचाएं' नाम के इस अभियान में 50,000 चिन्हित घरों को लक्षित किया गया है, और अभियान के अंत में सबसे अच्छी तरह कचरा अलग करने वाले परिवारों को विशेष पुरस्कार दिया जाएगा।

अभियान की पृष्ठभूमि और पुनः शुरुआत

यह अभियान पहली बार 22 अगस्त 2026 को शुरू किया गया था, लेकिन लक्षित घरों में सूखे कचरे के संग्रह बैग और मॉनिटरिंग स्टिकर का वितरण पूरा करने के लिए इसे अस्थायी रूप से रोका गया था। 28 सितंबर 2026 तक चिन्हित 50,000 में से 45,000 घरों तक सामग्री पहुँच चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, शेष वितरण जल्द पूर्ण कर लिया जाएगा, जिसके बाद 40 दिन का चैलेंज औपचारिक रूप से प्रभावी होगा।

भागीदारी में उल्लेखनीय सुधार

अधिकारियों ने बताया कि जिन घरों को 'कलेक्शन बैग' उपलब्ध कराए गए हैं, उनमें कचरा अलग करने की दर 35 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गई है — यह लगभग दोगुनी वृद्धि है। अडंबक्कम के निवासियों ने कहा कि सफाई कर्मचारियों के रोज़ाना दौरे और नियमित अनुस्मरण ने उन्हें कचरे को चार श्रेणियों — बायोडिग्रेडेबल, नॉन-बायोडिग्रेडेबल, सैनिटरी और खतरनाक — में अलग करने के लिए प्रोत्साहित किया। कुछ परिवार दो वर्षों से अधिक समय से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग दे रहे हैं।

ज़मीनी चुनौतियाँ और बुनियादी ढाँचे की कमी

हालाँकि, कुछ वार्डों के निवासियों ने बताया कि कई कचरा संग्रह वाहनों पर सैनिटरी कचरे के लिए अलग लाल डिब्बे उपलब्ध नहीं हैं। फ़िलहाल कर्मचारी ऐसी वस्तुओं को प्लास्टिक कवर या काले डिब्बे में अलग से इकट्ठा करते हैं और घरों के बाहर लगी मॉनिटरिंग शीट पर अनुपालन दर्ज करते हैं। नगर निकाय ने निजी कचरा संग्रह ठेकेदार को बैटरी-चालित वाहनों पर लाल डिब्बे उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है; ठेकेदार के प्रवक्ता के अनुसार, ऑर्डर दे दिया गया है और डिलीवरी के बाद ड्राइवरों को वितरित किए जाएँगे।

कर्मचारियों पर बढ़ता दबाव

कचरा संग्रह कर्मचारियों ने कहा कि असमान अनुपालन के कारण उनके काम के घंटे बढ़ रहे हैं। अलंदूर ज़ोन में 23 गलियों को कवर करने वाले एक ड्राइवर ने बताया कि कुछ निवासी ज़िद करते हैं कि कर्मचारी खुद ही मिले-जुले कचरे को अलग करें, जिससे संग्रह में देरी होती है और भोजन अवकाश का समय कम हो जाता है। एक पार्षद ने स्वीकार किया कि जहाँ आवासीय क्षेत्रों में सुधार हो रहा है, वहीं झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में निरंतर भागीदारी सुनिश्चित करना कठिन बना हुआ है।

विस्तार और भविष्य की योजना

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के अंतर्गत चारों कचरा श्रेणियों का अलग-अलग निपटान अनिवार्य है, जो इस अभियान की कानूनी अनिवार्यता को रेखांकित करता है। अधिकारियों ने संकेत दिया कि इस पहल को पूरे चेन्नई में विस्तार देने के लिए अतिरिक्त फंडिंग की आवश्यकता होगी। यह ऐसे समय में आया है जब देश के अनेक महानगर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लक्ष्यों को पूरा करने में संघर्ष कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि अनुपालन दर महज़ बैग वितरण से दोगुनी हो गई। लेकिन विरोधाभास यह है कि जब तक संग्रह वाहनों पर लाल डिब्बे नहीं होंगे, घरों में चार श्रेणियों में अलग किया गया कचरा संग्रह बिंदु पर फिर मिल जाएगा — जिससे अलगाव का पूरा उद्देश्य ही निष्फल हो सकता है। झुग्गी बस्तियों में भागीदारी की कमी इस बात की याद दिलाती है कि शहरी स्वच्छता नीतियाँ अक्सर उन्हीं को छोड़ देती हैं जो सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन का कचरा अलगाव अभियान क्या है?
यह GCC का '40-दिवसीय घरेलू कचरा अलगाव चैलेंज' है, जिसे 'कचरे को अलग करें – कल को बचाएं' नाम दिया गया है। इसमें दक्षिणी चेन्नई के 50,000 चिन्हित घरों को संग्रह बैग और मॉनिटरिंग स्टिकर दिए जा रहे हैं, और अंत में सर्वश्रेष्ठ परिवारों को पुरस्कृत किया जाएगा।
यह अभियान पहले क्यों रोका गया था और अब कब से शुरू हुआ?
अभियान 22 अगस्त 2026 को शुरू हुआ था, लेकिन लक्षित घरों में बैग और स्टिकर का वितरण पूरा करने के लिए इसे अस्थायी रूप से रोका गया था। 2 अक्टूबर 2026 से यह पुनः शुरू किया गया है।
कचरे को किन चार श्रेणियों में अलग करना है?
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत घरों को कचरे को बायोडिग्रेडेबल, नॉन-बायोडिग्रेडेबल, सैनिटरी और खतरनाक — इन चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य है। कर्मचारी इसे संग्रह के समय घरों के बाहर मॉनिटरिंग शीट पर दर्ज करते हैं।
अभियान का अब तक क्या असर दिखा है?
जिन घरों को कलेक्शन बैग मिले हैं, उनमें कचरा अलगाव की दर 35 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गई है। अडंबक्कम जैसे इलाकों में सफाई कर्मचारियों के नियमित दौरे ने भागीदारी में उल्लेखनीय सुधार लाया है।
क्या यह अभियान पूरे चेन्नई में लागू होगा?
फ़िलहाल यह अभियान केवल दक्षिणी चेन्नई के 50,000 घरों तक सीमित है। अधिकारियों ने कहा है कि इसे पूरे शहर में विस्तार देने के लिए अतिरिक्त फंडिंग की आवश्यकता होगी।
राष्ट्र प्रेस
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