चेन्नई नगर निगम का 40-दिवसीय कचरा अलगाव अभियान फिर शुरू, सर्वश्रेष्ठ परिवारों को मिलेगा पुरस्कार
सारांश
मुख्य बातें
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ने 2 अक्टूबर 2026 से शहर के दक्षिणी क्षेत्र में अपना 40-दिवसीय घरेलू कचरा अलगाव जागरूकता अभियान पुनः आरंभ किया है। 'कचरे को अलग करें – कल को बचाएं' नाम के इस अभियान में 50,000 चिन्हित घरों को लक्षित किया गया है, और अभियान के अंत में सबसे अच्छी तरह कचरा अलग करने वाले परिवारों को विशेष पुरस्कार दिया जाएगा।
अभियान की पृष्ठभूमि और पुनः शुरुआत
यह अभियान पहली बार 22 अगस्त 2026 को शुरू किया गया था, लेकिन लक्षित घरों में सूखे कचरे के संग्रह बैग और मॉनिटरिंग स्टिकर का वितरण पूरा करने के लिए इसे अस्थायी रूप से रोका गया था। 28 सितंबर 2026 तक चिन्हित 50,000 में से 45,000 घरों तक सामग्री पहुँच चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, शेष वितरण जल्द पूर्ण कर लिया जाएगा, जिसके बाद 40 दिन का चैलेंज औपचारिक रूप से प्रभावी होगा।
भागीदारी में उल्लेखनीय सुधार
अधिकारियों ने बताया कि जिन घरों को 'कलेक्शन बैग' उपलब्ध कराए गए हैं, उनमें कचरा अलग करने की दर 35 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गई है — यह लगभग दोगुनी वृद्धि है। अडंबक्कम के निवासियों ने कहा कि सफाई कर्मचारियों के रोज़ाना दौरे और नियमित अनुस्मरण ने उन्हें कचरे को चार श्रेणियों — बायोडिग्रेडेबल, नॉन-बायोडिग्रेडेबल, सैनिटरी और खतरनाक — में अलग करने के लिए प्रोत्साहित किया। कुछ परिवार दो वर्षों से अधिक समय से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग दे रहे हैं।
ज़मीनी चुनौतियाँ और बुनियादी ढाँचे की कमी
हालाँकि, कुछ वार्डों के निवासियों ने बताया कि कई कचरा संग्रह वाहनों पर सैनिटरी कचरे के लिए अलग लाल डिब्बे उपलब्ध नहीं हैं। फ़िलहाल कर्मचारी ऐसी वस्तुओं को प्लास्टिक कवर या काले डिब्बे में अलग से इकट्ठा करते हैं और घरों के बाहर लगी मॉनिटरिंग शीट पर अनुपालन दर्ज करते हैं। नगर निकाय ने निजी कचरा संग्रह ठेकेदार को बैटरी-चालित वाहनों पर लाल डिब्बे उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है; ठेकेदार के प्रवक्ता के अनुसार, ऑर्डर दे दिया गया है और डिलीवरी के बाद ड्राइवरों को वितरित किए जाएँगे।
कर्मचारियों पर बढ़ता दबाव
कचरा संग्रह कर्मचारियों ने कहा कि असमान अनुपालन के कारण उनके काम के घंटे बढ़ रहे हैं। अलंदूर ज़ोन में 23 गलियों को कवर करने वाले एक ड्राइवर ने बताया कि कुछ निवासी ज़िद करते हैं कि कर्मचारी खुद ही मिले-जुले कचरे को अलग करें, जिससे संग्रह में देरी होती है और भोजन अवकाश का समय कम हो जाता है। एक पार्षद ने स्वीकार किया कि जहाँ आवासीय क्षेत्रों में सुधार हो रहा है, वहीं झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में निरंतर भागीदारी सुनिश्चित करना कठिन बना हुआ है।
विस्तार और भविष्य की योजना
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के अंतर्गत चारों कचरा श्रेणियों का अलग-अलग निपटान अनिवार्य है, जो इस अभियान की कानूनी अनिवार्यता को रेखांकित करता है। अधिकारियों ने संकेत दिया कि इस पहल को पूरे चेन्नई में विस्तार देने के लिए अतिरिक्त फंडिंग की आवश्यकता होगी। यह ऐसे समय में आया है जब देश के अनेक महानगर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लक्ष्यों को पूरा करने में संघर्ष कर रहे हैं।