छपरा में नाबालिग बच्ची की संदिग्ध मौत: पप्पू यादव ने पुलिस जांच पर उठाए गंभीर सवाल
सारांश
Key Takeaways
- पुलिस जांच पर सवाल उठाना आवश्यक है।
- फोरेंसिक जांच की आवश्यकता को समझना चाहिए।
- घटनाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी।
- बच्चियों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।
छपरा, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। छपरा में एक नाबालिग बच्ची की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत के मामले में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक सही तकनीकी और फोरेंसिक जांच का निष्कर्ष नहीं निकलता, तब तक किसी भी प्रकार का निष्कर्ष निकालना गलत है। नीट की छात्रा के मामले में भी ऐसा ही हुआ था, जहां न तो यूरीन और न ही ब्लड जांच की गई और जल्दी से कहा गया कि उसने जहर खा लिया है।
उन्होंने कहा कि यह घटना एक गरीब परिवार से जुड़ी है। यदि यह प्रेम प्रसंग का मामला है, तब भी इसे हत्या माना जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं है, तो भी बच्ची की हत्या हुई है। इस घटना की परिस्थितियाँ ही इसे हत्या के रूप में परिभाषित करती हैं।
पप्पू यादव ने कहा कि जान जाने के बाद भी बच्चियों के प्रति ऐसी बातें करना गलत है, खासकर तब जब हमारे पास तकनीकी जांच की सुविधा उपलब्ध है और एसएफएल की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। जल्दी से प्रेम प्रसंग का मामला घोषित कर दिया गया। उन्हें सुझाव दिया कि इस मामले में मेडिकल बोर्ड का गठन तुरंत होना चाहिए और सीसीटीवी फुटेज की जांच करनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि यदि बच्ची कुएं में कूदी है, तो इसका मोबाइल लोकेशन ट्रेस करना जरूरी था। वहां मौजूद लोगों के लोकेशन का मिलान किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन अक्सर बेटियों के मामलों को प्रेम प्रसंग का रूप देकर भटकाता है।
छपरा जिले के डेरनी थाना क्षेत्र के एक गाँव में 10वीं कक्षा की छात्रा की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। बच्ची का शव कुएं में मिला। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू की और एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने दुष्कर्म के आरोप से इनकार किया है। मामले की जांच जारी है।