छत्तीसगढ़ धान घोटाला: ₹40.96 लाख की अनियमितता में फरार समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के बागबाहरा में धान खरीदी घोटाले के मामले में ₹40.96 लाख की अनियमितता के आरोपी और लंबे समय से फरार समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव को पुलिस ने ग्राम मोखा से गिरफ्तार कर लिया है। मोबाइल फोन के तकनीकी विश्लेषण और सतत निगरानी के बाद पुलिस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को दबोचा और 17 जुलाई 2026 को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
मामले का पूरा घटनाक्रम
24 जनवरी 2026 को मुनगासेर शाखा के शाखा प्रबंधक सेवकराम चंद्राकर ने बागबाहरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उपार्जन केंद्र बाघामुड़ा के ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र में 1,25,878 कट्टा धान होना चाहिए था, किंतु भौतिक सत्यापन में मात्र 1,22,574 कट्टा धान ही पाया गया।
इस प्रकार ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच 3,304 कट्टा (1,321.6 क्विंटल) धान का अंतर सामने आया। समर्थन मूल्य ₹3,100 प्रति क्विंटल के हिसाब से इस गायब धान की कुल कीमत ₹40,96,960 आंकी गई।
पुलिस की तकनीकी कार्रवाई
मामला दर्ज होने के बाद से आरोपी प्रेमसिंह ध्रुव फरार था। पुलिस ने उसकी तलाश में लगातार छापेमारी की। जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन डेटा का तकनीकी विश्लेषण किया गया। इसी आधार पर उसकी मौजूदगी ग्राम मोखा में चिह्नित की गई और पुलिस टीम ने घेराबंदी कर गिरफ्तारी को अंजाम दिया।
न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच
गिरफ्तार आरोपी को 17 जुलाई 2026 को संबंधित अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस अनियमितता में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता तो नहीं थी।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी सरकार की प्रमुख कृषि नीति का हिस्सा है और उपार्जन केंद्रों पर स्टॉक प्रबंधन में गड़बड़ी के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब राज्य में कृषि खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आरोपी की गिरफ्तारी से जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि घोटाले की पूरी श्रृंखला का पर्दाफाश हो सकेगा।