18 जुलाई 2026
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छत्तीसगढ़ धान घोटाला: ₹40.96 लाख की अनियमितता में फरार समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव गिरफ्तार

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छत्तीसगढ़ धान घोटाला: ₹40.96 लाख की अनियमितता में फरार समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव गिरफ्तार

सारांश

छत्तीसगढ़ के बागबाहरा में धान खरीदी घोटाले का एक बड़ा आरोपी पकड़ा गया। उपार्जन केंद्र बाघामुड़ा में 3,304 कट्टा धान गायब मिलने के बाद दर्ज मामले में फरार समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव को पुलिस ने CDR तकनीक से ट्रैक कर ग्राम मोखा से दबोचा — ₹40.96 लाख की अनियमितता में अब अन्य संलिप्त लोगों की तलाश जारी।

मुख्य बातें

प्रेमसिंह ध्रुव , उपार्जन केंद्र बाघामुड़ा के समिति प्रभारी, को छत्तीसगढ़ पुलिस ने ग्राम मोखा से गिरफ्तार किया।
ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में 3,304 कट्टा (1,321.6 क्विंटल) धान का अंतर पाया गया।
गायब धान की कीमत समर्थन मूल्य ₹3,100 प्रति क्विंटल के हिसाब से ₹40,96,960 आंकी गई।
शिकायत 24 जनवरी 2026 को शाखा प्रबंधक सेवकराम चंद्राकर ने बागबाहरा थाने में दर्ज कराई थी।
आरोपी को 17 जुलाई 2026 को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया; अन्य संलिप्त लोगों की जांच जारी।

छत्तीसगढ़ के बागबाहरा में धान खरीदी घोटाले के मामले में ₹40.96 लाख की अनियमितता के आरोपी और लंबे समय से फरार समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव को पुलिस ने ग्राम मोखा से गिरफ्तार कर लिया है। मोबाइल फोन के तकनीकी विश्लेषण और सतत निगरानी के बाद पुलिस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को दबोचा और 17 जुलाई 2026 को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

मामले का पूरा घटनाक्रम

24 जनवरी 2026 को मुनगासेर शाखा के शाखा प्रबंधक सेवकराम चंद्राकर ने बागबाहरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उपार्जन केंद्र बाघामुड़ा के ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र में 1,25,878 कट्टा धान होना चाहिए था, किंतु भौतिक सत्यापन में मात्र 1,22,574 कट्टा धान ही पाया गया।

इस प्रकार ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच 3,304 कट्टा (1,321.6 क्विंटल) धान का अंतर सामने आया। समर्थन मूल्य ₹3,100 प्रति क्विंटल के हिसाब से इस गायब धान की कुल कीमत ₹40,96,960 आंकी गई।

पुलिस की तकनीकी कार्रवाई

मामला दर्ज होने के बाद से आरोपी प्रेमसिंह ध्रुव फरार था। पुलिस ने उसकी तलाश में लगातार छापेमारी की। जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन डेटा का तकनीकी विश्लेषण किया गया। इसी आधार पर उसकी मौजूदगी ग्राम मोखा में चिह्नित की गई और पुलिस टीम ने घेराबंदी कर गिरफ्तारी को अंजाम दिया।

न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच

गिरफ्तार आरोपी को 17 जुलाई 2026 को संबंधित अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस अनियमितता में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता तो नहीं थी।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी सरकार की प्रमुख कृषि नीति का हिस्सा है और उपार्जन केंद्रों पर स्टॉक प्रबंधन में गड़बड़ी के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब राज्य में कृषि खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आरोपी की गिरफ्तारी से जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि घोटाले की पूरी श्रृंखला का पर्दाफाश हो सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 1,321 क्विंटल से अधिक धान महीनों तक बिना पकड़े कैसे गायब रहा। जांच का दायरा अन्य संलिप्त लोगों तक बढ़ाना ज़रूरी है, अन्यथा यह गिरफ्तारी एक छोटे पेंच को कसने जैसी होगी जबकि पूरा तंत्र ढीला बना रहेगा।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ धान खरीदी घोटाले में क्या हुआ?
उपार्जन केंद्र बाघामुड़ा में ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच 3,304 कट्टा (1,321.6 क्विंटल) धान का अंतर पाया गया, जिसकी कीमत ₹40,96,960 आंकी गई। इस मामले में समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव को जिम्मेदार माना गया और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
आरोपी प्रेमसिंह ध्रुव को कहाँ से और कैसे गिरफ्तार किया गया?
पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन की CDR और लोकेशन डेटा का तकनीकी विश्लेषण कर उसकी मौजूदगी ग्राम मोखा में चिह्नित की। इसके बाद पुलिस टीम ने घेराबंदी कर प्रेमसिंह ध्रुव को गिरफ्तार किया और 17 जुलाई 2026 को न्यायिक हिरासत में भेजा।
इस मामले में शिकायत किसने और कब दर्ज कराई?
24 जनवरी 2026 को मुनगासेर शाखा के शाखा प्रबंधक सेवकराम चंद्राकर ने बागबाहरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने भौतिक सत्यापन में ऑनलाइन रिकॉर्ड से कम धान मिलने की जानकारी दी थी।
गायब धान की कीमत कितनी आंकी गई और कैसे निकाली गई?
गायब 1,321.6 क्विंटल धान की कीमत सरकारी समर्थन मूल्य ₹3,100 प्रति क्विंटल के आधार पर ₹40,96,960 (करीब ₹40.96 लाख) निकाली गई। यह आंकड़ा प्रारंभिक जांच में सामने आया।
क्या इस घोटाले में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं?
पुलिस के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि अनियमितता में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। अभी तक केवल प्रेमसिंह ध्रुव को गिरफ्तार किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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