महासमुंद धान घोटाला: ₹17.93 करोड़ का स्टॉक गायब, 54 केंद्रों पर धान नदारद, 15 FIR दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में 2025-26 के धान खरीदी सत्र में कथित तौर पर ₹17 करोड़ 93 लाख 67 हजार 457 रुपये मूल्य का धान खरीदी केंद्रों से गायब पाया गया है, जिसने जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला विपणन अधिकारी ने पुष्टि की है कि भौतिक सत्यापन के दौरान 54 खरीदी केंद्रों पर दर्ज स्टॉक वास्तव में मौजूद नहीं मिला, और अब तक 15 सहकारी समितियों के प्रभारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है।
घोटाले का पूरा ब्यौरा
वर्ष 2025-26 के धान खरीदी सत्र में महासमुंद जिले के 182 खरीदी केंद्रों के माध्यम से 1,01,95,681.20 मीट्रिक टन धान की खरीदी दर्ज की गई। मिलिंग के बाद रिकॉर्ड के अनुसार 57,860.47 क्विंटल धान खरीदी केंद्रों में शेष होना चाहिए था। जाँच में यह धान 54 केंद्रों पर नदारद मिला। समर्थन मूल्य ₹3,100 प्रति क्विंटल के आधार पर गायब धान का कुल मूल्य ₹17.93 करोड़ से अधिक आँका गया है।
सबसे अधिक नुकसान वाले केंद्र
जाँच में सामने आया कि आरंगी और बम्हनी सहकारी समितियाँ सबसे अधिक प्रभावित हैं — इन दोनों केंद्रों से चार-चार हजार क्विंटल से अधिक धान गायब पाया गया। इसके अतिरिक्त तोषगांव, बघरपाली, मोगरापाली, समहर, कोटद्वारी, मल्यामाल, बेलसोंडा और खेमड़ा सहकारी समितियों में भी बड़ी मात्रा में धान की कमी उजागर हुई है।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल
नियमों के अनुसार प्रत्येक खरीदी केंद्र में नोडल अधिकारी और मॉनिटरिंग अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं तथा समय-समय पर स्टॉक का भौतिक सत्यापन अनिवार्य है। इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर धान का गायब होना यह दर्शाता है कि निगरानी तंत्र या तो निष्क्रिय रहा या उसे जानबूझकर दरकिनार किया गया। गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में धान खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता पहले से ही चर्चा का विषय रही है।
प्रशासन की कार्रवाई
जिला विपणन अधिकारी ने स्वीकार किया है कि करोड़ों रुपये मूल्य का धान स्टॉक में नहीं मिला है और मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। अब तक 15 सहकारी समितियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है, परंतु शेष 39 केंद्रों के संदर्भ में आगे की कार्रवाई को लेकर प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
आगे क्या होगा
मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक पहुँच चुकी है और उम्मीद है कि शेष 39 खरीदी केंद्रों के संबंध में भी जल्द कार्रवाई की जाएगी। आलोचकों का कहना है कि केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है — गायब धान की वसूली और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना ज़रूरी है।