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महासमुंद धान घोटाला: ₹4.50 करोड़ के गबन में फरार दो आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय ने भेजा जेल

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महासमुंद धान घोटाला: ₹4.50 करोड़ के गबन में फरार दो आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय ने भेजा जेल

सारांश

छत्तीसगढ़ के महासमुंद में 2020-21 के ₹4.50 करोड़ के धान घोटाले में लंबे समय से फरार दो मुख्य आरोपी — केंद्र प्रभारी कन्हाई सेठ और विक्रयकर्मी राजकुमार पटेल — आखिरकार गिरफ्तार हो गए। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर हुई इस गिरफ्तारी के बाद अब चारों आरोपी न्यायिक प्रक्रिया में हैं।

मुख्य बातें

महासमुंद के धान खरीदी केंद्र पिरदा में 2020-21 में 17,210.72 क्विंटल धान की हेराफेरी से शासन को ₹4.50 करोड़ का नुकसान हुआ।
फरार आरोपी कन्हाई सेठ (व्यवस्थापक/केंद्र प्रभारी) और राजकुमार पटेल (विक्रयकर्मी) को सोमवार को गिरफ्तार किया गया।
शिकायत 27 मार्च 2024 को राजेश कुमार सिदार ने बसना थाने में दर्ज कराई थी।
पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपराध में संलिप्तता स्वीकार की; दस्तावेज़ी साक्ष्यों ने भी पुष्टि की।
इससे पहले दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका था।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र स्थित धान खरीदी केंद्र पिरदा में हुए ₹4.50 करोड़ के गबन मामले में पुलिस ने सोमवार को दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, वर्ष 2020-21 में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति पिरदा के धान उपार्जन केंद्र में 17,210.72 क्विंटल धान की हेराफेरी की गई, जिससे शासन को लगभग ₹4.50 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ। इस मामले की शिकायत 27 मार्च 2024 को राजेश कुमार सिदार ने बसना थाने में दर्ज कराई थी।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। इससे पहले दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र भी प्रस्तुत किया जा चुका था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की पहचान कन्हाई सेठ और राजकुमार पटेल के रूप में हुई है। कन्हाई सेठ घटना के समय धान खरीदी केंद्र पिरदा में व्यवस्थापक एवं केंद्र प्रभारी के पद पर कार्यरत था, जबकि राजकुमार पटेल वहाँ विक्रयकर्मी के रूप में तैनात था।

पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अपराध में संलिप्तता स्वीकार की। जांच में जुटाए गए दस्तावेज़ी साक्ष्यों ने भी उनकी भूमिका को प्रमाणित किया।

जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया

दोनों आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और गहन जांच के आधार पर उन्हें सोमवार को पकड़ने में सफलता प्राप्त की। गौरतलब है कि यह मामला चार साल पुराना है और अब तक चार में से दो आरोपी ही गिरफ्त में आए थे।

सरकारी धन की सुरक्षा पर पुलिस का रुख

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिले में आर्थिक अपराधों, भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन से जुड़े मामलों में दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। यह ऐसे समय में आया है जब छत्तीसगढ़ में धान उपार्जन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

आगे क्या होगा

अब चारों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में मुकदमा चलेगा। दोनों नवगिरफ्तार आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में हैं और मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आए दस्तावेज़ अभियोजन पक्ष को मज़बूत आधार देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह मामला भी लंबी सुनवाई में उलझ जाता है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महासमुंद धान घोटाला क्या है?
यह 2020-21 में छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र स्थित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति पिरदा के धान उपार्जन केंद्र में हुआ गबन का मामला है, जिसमें 17,210.72 क्विंटल धान की हेराफेरी से शासन को लगभग ₹4.50 करोड़ का नुकसान हुआ।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और उनकी भूमिका क्या थी?
गिरफ्तार आरोपियों में कन्हाई सेठ (धान खरीदी केंद्र पिरदा के तत्कालीन व्यवस्थापक एवं केंद्र प्रभारी) और राजकुमार पटेल (विक्रयकर्मी) शामिल हैं। दोनों ने पूछताछ में अपराध में संलिप्तता स्वीकार की है।
इस मामले में शिकायत कब और किसने दर्ज कराई थी?
मामले की शिकायत 27 मार्च 2024 को राजेश कुमार सिदार ने बसना थाने में दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने धोखाधड़ी और संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया।
अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं?
इस मामले में कुल चार आरोपी हैं। पहले दो आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका था। सोमवार को शेष दो फरार आरोपियों — कन्हाई सेठ और राजकुमार पटेल — को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
आगे इस मामले में क्या होगा?
दोनों नवगिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय ने न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। अब चारों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में मुकदमा चलेगा। पुलिस ने आर्थिक अपराधों में कड़ी कार्रवाई जारी रखने का संकेत दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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