17 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

झीरम घाटी हत्याकांड: NIA कोर्ट ने 10 माओवादियों को सुनाई फांसी की सजा, CM साय बोले- न्याय की जीत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
झीरम घाटी हत्याकांड: NIA कोर्ट ने 10 माओवादियों को सुनाई फांसी की सजा, CM साय बोले- न्याय की जीत

सारांश

जगदलपुर NIA कोर्ट ने झीरम घाटी हत्याकांड के 10 दोषी माओवादियों को फांसी की सजा सुनाई — छत्तीसगढ़ के सबसे दर्दनाक नक्सली हमले में यह पहला बड़ा न्यायिक निर्णय है। CM विष्णु देव साय ने इसे न्याय की जीत बताया और 'शहरी नक्सलियों' को भी आड़े हाथों लिया।

मुख्य बातें

जगदलपुर NIA कोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को झीरम घाटी हत्याकांड के 10 माओवादियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स पर पोस्ट कर इस फैसले को 'न्याय की जीत' करार दिया।
हमले में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों की जानें गई थीं।
साय ने PM नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कथित 'शहरी नक्सलियों' और माओवाद समर्थकों को आत्मचिंतन की नसीहत दी।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार दोषी उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं।

जगदलपुर की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने 16 सितंबर 2026 को छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड में दोषी ठहराए गए 10 माओवादियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इसे 'न्याय की जीत' करार दिया। यह फैसला उस नक्सली हमले से जुड़ा है जिसने एक दशक से अधिक समय पहले राज्य की राजनीति को हिला कर रख दिया था।

मुख्य घटनाक्रम

जगदलपुर NIA कोर्ट ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद सभी 10 दोषी माओवादियों को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने इस हमले को 'जघन्य और पूर्वनियोजित' माना। NIA ने इस जटिल मामले की जाँच को अंजाम तक पहुँचाया, जिसकी व्यापक सराहना हो रही है।

झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक है, जिसमें राज्य के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों की जानें गई थीं। यह हमला माओवादी हिंसा का एक क्रूर उदाहरण था।

मुख्यमंत्री साय की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'झीरम घाटी में हुआ बर्बर हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह पीड़ादायक अध्याय है, जिसकी कटु स्मृतियाँ हमें लंबे समय तक पीड़ा देती रहेंगी। इस जघन्य कम्युनिस्ट हिंसा में हमने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों को भी खोया है।'

साय ने आगे लिखा कि NIA कोर्ट द्वारा दोषियों को दी गई मृत्युदंड की सजा न्याय की जीत है और एजेंसी की जाँच की सराहना होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की भी प्रशंसा की।

बस्तर और माओवाद पर बड़ा बयान

साय ने कहा, 'आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लौह संकल्प और उनके दृढ़ नेतृत्व में हमने सशस्त्र माओवाद के चंगुल से प्रदेश को मुक्त कराया है। दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर आगे बढ़ रहा है।'

मुख्यमंत्री ने कथित 'शहरी नक्सलियों' और माओवाद समर्थकों पर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'यह अवसर विशेषकर जनजाति समाज की लाश पर राजनीति करने वालों और आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए आत्मचिंतन का भी अवसर है।' उन्होंने आगाह किया कि 'दिमागी नक्सल भी यह जान लें कि निहित स्वार्थ के कारण किसी भी आतंक को प्रश्रय और आसरा देने का परिणाम सबके लिए विनाशकारी ही होता है।'

शहीदों को श्रद्धांजलि

अपनी पोस्ट के अंत में मुख्यमंत्री साय ने झीरम हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा, 'झीरम के उस क्रूर हमले में अपने प्राण गंवाने वाली सभी दिवंगत आत्माओं को नमन। विनम्र श्रद्धांजलि।' यह फैसला पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आगे क्या होगा

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, दोषी माओवादी इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं। छत्तीसगढ़ में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है और आने वाले दिनों में विभिन्न दलों की ओर से और बयान आने की संभावना है। यह फैसला राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों को नई गति देने वाला साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस हमले को एक दशक से अधिक समय बीत चुका है — जो भारत में आतंक और नक्सल मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति को रेखांकित करता है। मुख्यमंत्री साय का 'शहरी नक्सल' वाला बयान राजनीतिक रूप से तीखा है, परंतु इसकी परिभाषा और दायरे पर बहस जारी रहेगी। असली सवाल यह है कि क्या यह फैसला बस्तर में स्थायी शांति की नींव बनेगा, या केवल एक न्यायिक मील का पत्थर बनकर रह जाएगा — जबकि ज़मीन पर माओवाद के सामाजिक-आर्थिक कारण अभी भी पूरी तरह संबोधित नहीं हुए हैं।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झीरम घाटी हत्याकांड क्या था?
झीरम घाटी हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का एक बेहद दर्दनाक माओवादी हमला था, जिसमें राज्य के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों की जानें गई थीं। यह हमला बस्तर क्षेत्र में हुआ था और इसने पूरे देश को झकझोर दिया था।
NIA कोर्ट ने झीरम घाटी मामले में क्या फैसला सुनाया?
जगदलपुर की NIA विशेष अदालत ने 16 सितंबर 2026 को झीरम घाटी हत्याकांड में दोषी पाए गए 10 माओवादियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने इस हमले को जघन्य और पूर्वनियोजित माना।
CM विष्णु देव साय ने इस फैसले पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स पर पोस्ट कर इस फैसले को 'न्याय की जीत' बताया। उन्होंने PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की सराहना की और कथित 'शहरी नक्सलियों' को आत्मचिंतन की नसीहत दी।
क्या दोषी माओवादी इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, दोषी माओवादी NIA कोर्ट के इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं। भारतीय न्यायिक प्रक्रिया में मृत्युदंड के मामलों में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में अपील का प्रावधान है।
बस्तर में माओवाद की स्थिति अब कैसी है?
मुख्यमंत्री साय के अनुसार, PM मोदी और गृह मंत्री शाह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को सशस्त्र माओवाद के चंगुल से काफी हद तक मुक्त कराया गया है। उन्होंने कहा कि दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर अब शांति और विकास के नए युग की ओर बढ़ रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 4 घंटे पहले
  3. 4 घंटे पहले
  4. 8 घंटे पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले