झीरम घाटी हत्याकांड: NIA कोर्ट ने 10 माओवादियों को सुनाई फांसी की सजा, CM साय बोले- न्याय की जीत
सारांश
मुख्य बातें
जगदलपुर की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने 16 सितंबर 2026 को छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड में दोषी ठहराए गए 10 माओवादियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इसे 'न्याय की जीत' करार दिया। यह फैसला उस नक्सली हमले से जुड़ा है जिसने एक दशक से अधिक समय पहले राज्य की राजनीति को हिला कर रख दिया था।
मुख्य घटनाक्रम
जगदलपुर NIA कोर्ट ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद सभी 10 दोषी माओवादियों को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने इस हमले को 'जघन्य और पूर्वनियोजित' माना। NIA ने इस जटिल मामले की जाँच को अंजाम तक पहुँचाया, जिसकी व्यापक सराहना हो रही है।
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक है, जिसमें राज्य के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों की जानें गई थीं। यह हमला माओवादी हिंसा का एक क्रूर उदाहरण था।
मुख्यमंत्री साय की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'झीरम घाटी में हुआ बर्बर हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह पीड़ादायक अध्याय है, जिसकी कटु स्मृतियाँ हमें लंबे समय तक पीड़ा देती रहेंगी। इस जघन्य कम्युनिस्ट हिंसा में हमने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों को भी खोया है।'
साय ने आगे लिखा कि NIA कोर्ट द्वारा दोषियों को दी गई मृत्युदंड की सजा न्याय की जीत है और एजेंसी की जाँच की सराहना होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की भी प्रशंसा की।
बस्तर और माओवाद पर बड़ा बयान
साय ने कहा, 'आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लौह संकल्प और उनके दृढ़ नेतृत्व में हमने सशस्त्र माओवाद के चंगुल से प्रदेश को मुक्त कराया है। दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर आगे बढ़ रहा है।'
मुख्यमंत्री ने कथित 'शहरी नक्सलियों' और माओवाद समर्थकों पर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'यह अवसर विशेषकर जनजाति समाज की लाश पर राजनीति करने वालों और आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए आत्मचिंतन का भी अवसर है।' उन्होंने आगाह किया कि 'दिमागी नक्सल भी यह जान लें कि निहित स्वार्थ के कारण किसी भी आतंक को प्रश्रय और आसरा देने का परिणाम सबके लिए विनाशकारी ही होता है।'
शहीदों को श्रद्धांजलि
अपनी पोस्ट के अंत में मुख्यमंत्री साय ने झीरम हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा, 'झीरम के उस क्रूर हमले में अपने प्राण गंवाने वाली सभी दिवंगत आत्माओं को नमन। विनम्र श्रद्धांजलि।' यह फैसला पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, दोषी माओवादी इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं। छत्तीसगढ़ में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है और आने वाले दिनों में विभिन्न दलों की ओर से और बयान आने की संभावना है। यह फैसला राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों को नई गति देने वाला साबित हो सकता है।