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झीरम घाटी हत्याकांड: NIA कोर्ट ने 10 माओवादियों को दी फांसी की सज़ा, CM साय बोले- न्याय की जीत

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झीरम घाटी हत्याकांड: NIA कोर्ट ने 10 माओवादियों को दी फांसी की सज़ा, CM साय बोले- न्याय की जीत

सारांश

दशकों से न्याय की प्रतीक्षा में रहा झीरम घाटी हत्याकांड आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर आ गया — जगदलपुर NIA कोर्ट ने 10 माओवादियों को फांसी की सज़ा सुनाई। CM साय ने इसे संविधान और लोकतंत्र की जीत बताया, जबकि बस्तर के लिए एक नए युग की शुरुआत का दावा किया गया।

मुख्य बातें

जगदलपुर NIA कोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को झीरम घाटी हत्याकांड में 10 माओवादियों को मृत्युदंड की सज़ा सुनाई।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स पर पोस्ट कर फ़ैसले को 'न्याय की जीत' बताया और NIA की जाँच की सराहना की।
साय ने PM नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व को श्रेय दिया।
मुख्यमंत्री ने कथित 'दिमागी नक्सलियों' और माओवाद समर्थकों को आत्मचिंतन की नसीहत दी।
मृत्युदंड के मामले में दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील का अधिकार होगा; उच्चतम न्यायालय की पुष्टि अनिवार्य।

जगदलपुर की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) कोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड में दोषी ठहराए गए 10 माओवादियों को मृत्युदंड की सज़ा सुनाई। इस ऐतिहासिक फ़ैसले ने राज्य की राजनीति में प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू कर दिया है।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस फ़ैसले को 'न्याय की जीत' करार दिया। उन्होंने लिखा, 'झीरम घाटी में हुआ बर्बर हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह पीड़ादायक अध्याय है, जिसकी कटु स्मृतियां हमें लंबे समय तक पीड़ा देती रहेंगी। इस जघन्य कम्युनिस्ट हिंसा में हमने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों को भी खोया है।'

साय ने NIA की जाँच-प्रक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि एजेंसी ने जिस तरह इस मामले को अंजाम तक पहुँचाया, वह प्रशंसनीय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व को भी श्रेय देते हुए कहा कि उनके 'लौह संकल्प और दृढ़ नेतृत्व' में राज्य को सशस्त्र माओवाद के चंगुल से मुक्त कराया गया है।

बस्तर में शांति का नया अध्याय

मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में बस्तर क्षेत्र का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि 'दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर आगे बढ़ रहा है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब केंद्र और राज्य सरकारें बस्तर में नक्सल-विरोधी अभियानों को और तेज़ कर चुकी हैं।

शहरी नक्सलियों पर निशाना

साय ने अपनी पोस्ट में कथित 'दिमागी नक्सलियों' और माओवाद को वैचारिक समर्थन देने वालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'यह अवसर विशेषकर जनजाति समाज की लाश पर राजनीति करने वालों और आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए आत्मचिंतन का भी अवसर है।' उन्होंने चेतावनी दी कि 'भारतीय लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध लड़ने वाले आतंक का भस्मासुर किसी विचार या क्षेत्र की सरहद को नहीं मानता।'

झीरम के शहीदों को श्रद्धांजलि

अपनी पोस्ट के अंत में मुख्यमंत्री साय ने झीरम घाटी हमले में प्राण गंवाने वाले सभी शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। गौरतलब है कि यह हत्याकांड छत्तीसगढ़ के सबसे जघन्य माओवादी हमलों में से एक रहा है, जिसमें वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं सहित कई सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों की जान गई थी।

आगे क्या

NIA कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील का अधिकार होगा। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, मृत्युदंड के मामलों में उच्चतम न्यायालय की पुष्टि अनिवार्य होती है। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि वह न्यायिक प्रक्रिया के हर चरण में अभियोजन पक्ष की पैरवी जारी रखेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह यात्रा यहाँ समाप्त नहीं होती — उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में अपील की लंबी राह अभी बाकी है। CM साय की पोस्ट में राजनीतिक स्वर स्पष्ट था, जहाँ 'दिमागी नक्सलियों' पर निशाना साधा गया — यह शब्दावली विपक्ष के विरुद्ध राजनीतिक हथियार बन सकती है। असली सवाल यह है कि क्या न्यायिक फ़ैसले के साथ-साथ बस्तर में दीर्घकालिक विकास और पुनर्वास की गति भी उतनी ही तेज़ रहेगी, क्योंकि अदालती जीत और ज़मीनी बदलाव दो अलग-अलग मोर्चे हैं।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झीरम घाटी हत्याकांड क्या है?
झीरम घाटी हत्याकांड छत्तीसगढ़ के सबसे जघन्य माओवादी हमलों में से एक है, जिसमें वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों की जान गई थी। यह मामला तब से NIA की जाँच के अंतर्गत था।
NIA कोर्ट ने झीरम घाटी मामले में क्या फ़ैसला सुनाया?
जगदलपुर की NIA कोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को मामले में दोषी पाए गए 10 माओवादियों को मृत्युदंड की सज़ा सुनाई। यह इस हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया का एक अहम पड़ाव है।
CM विष्णु देव साय ने फ़ैसले पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स पर पोस्ट कर इसे 'न्याय की जीत' बताया और NIA की जाँच की सराहना की। उन्होंने PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व को भी श्रेय दिया।
क्या दोषी माओवादी अपील कर सकते हैं?
हाँ, मृत्युदंड के मामलों में दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील का अधिकार होता है। इसके अलावा, विधि विशेषज्ञों के अनुसार फांसी की सज़ा को लागू करने से पहले सर्वोच्च न्यायालय की पुष्टि भी अनिवार्य होती है।
इस फ़ैसले का बस्तर और छत्तीसगढ़ पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
CM साय के अनुसार, यह फ़ैसला बस्तर में शांति और विकास के नए युग की ओर एक कदम है। हालाँकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि न्यायिक निर्णय के साथ-साथ दीर्घकालिक पुनर्वास और विकास कार्यक्रम भी उतने ही ज़रूरी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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