क्या छत्तीसगढ़ सरकार ने शहीद आकाश राव गिरेपूंजे की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति दी?
सारांश
मुख्य बातें
नया रायपुर, 17 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के गृह (पुलिस) विभाग ने मंत्रि परिषद के निर्णय के अनुसार शहीद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश राव गिरेपूंजे की पत्नी स्नेहा को विशेष प्रकरण में अनुकंपा नियुक्ति दी है।
उन्हें दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि के साथ उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के पद पर नियुक्त किया गया है। उनकी तैनाती पुलिस प्रशिक्षण अकादमी, चंदखुरी (रायपुर) में की गई है। इस नियुक्ति के साथ स्नेहा को वेतन मैट्रिक्स लेवल-12 (56,100-1,77,500 रुपए) में वेतन मिलेगा।
आदेश के अनुसार, स्नेहा को परिवीक्षा अवधि में पुलिस प्रशिक्षण अकादमी और छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी द्वारा निर्धारित प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा करना होगा। प्रशिक्षण के बाद आयोजित परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य होगा। इस परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर उनकी वरिष्ठता तय की जाएगी। यदि वे पहली बार में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पातीं, तो उन्हें अगले प्रशिक्षण सत्र में शामिल होकर परीक्षा पास करनी होगी। परिवीक्षा अवधि में लगातार असफल होने पर उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं।
यह नियुक्ति छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (सामान्य शर्तें) नियम 1961 और छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम 2005 के तहत शासित होगी। नियुक्ति एक माह के भीतर चिकित्सा और चरित्र सत्यापन प्रमाणपत्र जमा करने की शर्त पर दी गई है। यदि सत्यापन में कोई आपत्तिजनक तथ्य सामने आता है या दी गई जानकारी गलत पाई जाती है, तो उनकी सेवाएं बिना पूर्व सूचना के समाप्त की जा सकती हैं। साथ ही उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत कार्रवाई भी हो सकती है।
स्नेहा को कार्यभार ग्रहण करने से पहले एक बॉंड जमा करना होगा, जिसमें यह उल्लेख होगा कि परिवीक्षा अवधि में विफल होने पर वे सरकार द्वारा उन पर खर्च की गई राशि (वेतन, भत्ते, यात्रा व्यय) वापस करने के लिए उत्तरदायी होंगी।
उन्हें आदेश प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर चंदखुरी पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में कार्यभार ग्रहण करना होगा और निवास व शैक्षणिक योग्यता के मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
यह नियुक्ति सामान्य प्रशासन विभाग के अनुकंपा नियुक्ति निर्देश 2013 की कंडिका-14 को शिथिल करते हुए दी गई है। सरकार ने इस नियुक्ति में आरक्षण नियमों का पालन करने की पुष्टि की है। यह कदम शहीद की पत्नी को सम्मान और सहायता प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।