चुराचांदपुर में 'जन भागीदारी अभियान' संपन्न: सोंगपी गांव में १,५०० से अधिक ग्रामीणों को मिलीं सरकारी सेवाएं
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में तुइबोंग उप-मंडल के सोंगपी गांव में 25 मई 2025 को जिला प्रशासन के 'जन भागीदारी अभियान' के मौजूदा चरण का समापन हुआ। इस अभियान का मूल उद्देश्य दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सरकारी सेवाएं और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उनके घरों के नज़दीक उपलब्ध कराना था। तीन चरणों में आयोजित इस पूरे अभियान में 1,500 से 1,700 लोगों ने भागीदारी की।
अभियान का स्वरूप और सेवाएं
जिला प्रशासन के अनुसार, 'घर-घर शासन' की अवधारणा को ज़मीनी स्तर पर साकार करने के लिए इस शिविर में मौके पर ही अनेक महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान की गईं। ग्रामीणों को जाति प्रमाण पत्र, अधिवास प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज़ वितरित किए गए। साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए पंजीकरण और निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का भी आयोजन किया गया।
मुख्य आंकड़े
25 मई को सोंगपी गांव में आयोजित शिविर में लगभग 100 लोगों ने चिकित्सा जांच के लिए पंजीकरण कराया। इसके अतिरिक्त 121 लोगों का नामांकन प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के अंतर्गत किया गया। सोंगपी के साथ-साथ आसपास के कई गांवों के निवासी भी इस अभियान में शामिल हुए।
विभागों की भागीदारी
कार्यक्रम में बैंकों, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, जिला सूचना कार्यालय, वन विभाग और जिला उद्योग केंद्र के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। इन विभागों के अधिकारियों ने ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सुविधाओं और आवेदन प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी।
अभियान का कालक्रम
जिला प्रशासन के मुताबिक, इस अभियान की शुरुआत 18 मई को सोंगगेल गांव से हुई थी। इसके बाद 21 मई को लेइसनाग गांव में दूसरा चरण संपन्न हुआ और 25 मई को सोंगपी गांव में इसका समापन किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में प्रशासन ग्रामीण पहुंच को बेहतर बनाने पर विशेष ज़ोर दे रहा है।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य जांच के लिए शिविर में पहुंची स्थानीय युवती चिन्नैवह ने कहा कि वह अपने गांव में इस प्रकार का कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सरकार की आभारी हैं। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीणों को काफी सुविधा मिली है और लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल पा रहा है। अन्य ग्रामीणों ने भी कहा कि इस तरह के शिविरों से उन्हें सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। अधिकारियों ने बताया कि अभियान को जनता से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और भविष्य में भी ऐसे शिविरों के आयोजन की योजना है।