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सुषमा स्वराज भवन में सीआईएसएफ की तैनाती: विदेश मंत्रालय मुख्यालय को मिली 90 जवानों की सुरक्षा

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सुषमा स्वराज भवन में सीआईएसएफ की तैनाती: विदेश मंत्रालय मुख्यालय को मिली 90 जवानों की सुरक्षा

सारांश

विदेश मंत्रालय के मुख्यालय — सुषमा स्वराज भवन — को 30 मई 2025 से सीआईएसएफ के 90 जवानों की पेशेवर सुरक्षा मिल गई है। साथ ही सीआईएसएफ ने भारतीय सेना के साथ मिलकर ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण और सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा तैयारियों को नई धार दी है।

मुख्य बातें

सीआईएसएफ की 30 मई 2025 को सुषमा स्वराज भवन स्थित विदेश मंत्रालय मुख्यालय में औपचारिक तैनाती हुई।
स्वीकृत संख्या 90 कर्मी ; सीआईएसएफ कोट का उद्घाटन संयुक्त सचिव तरुण कुमार ने किया।
सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने उत्तरी सेक्टर और हवाई अड्डा सेक्टर की परिचालन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
भारतीय सेना के सहयोग से चरणबद्ध ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू; जवानों को यूएवी पहचानने और निष्क्रिय करने की क्षमता दी जा रही है।
जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में उभरती सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र समीक्षा विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी गई।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को 30 मई 2025 को नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में विदेश मंत्रालय के मुख्यालय की सुरक्षा का औपचारिक दायित्व सौंपा गया। 90 कर्मियों की स्वीकृत संख्या के साथ सीआईएसएफ ने परिसर में सुरक्षा व्यवस्था का पूर्ण प्रभार संभाल लिया है। इस तैनाती के साथ भारत के एक प्रमुख राजनयिक प्रतिष्ठान को पेशेवर अर्धसैनिक सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है।

औपचारिक उद्घाटन और प्रमुख उपस्थिति

सीआईएसएफ कोट का उद्घाटन विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (कार्मिक) तरुण कुमार ने किया। इस अवसर पर सीआईएसएफ के उप महानिरीक्षक (सीजीबीएस) जी. शिवकुमार, सुरक्षा ब्यूरो के निदेशक कर्नल मनोज यादव और कमांडेंट (ऑपरेशन) नीरज कुमार सहित वरिष्ठ सीआईएसएफ अधिकारी और विदेश मंत्रालय प्रबंधन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सीआईएसएफ की परिचालन समीक्षा बैठक

इससे पूर्व सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने उत्तरी सेक्टर और हवाई अड्डा सेक्टर में परिचालन तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करने के लिए एक उच्चस्तरीय परिचालन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न इकाइयों के कमांडरों ने भाग लिया।

बैठक में सुरक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने, अंतर-एजेंसी समन्वय के ज़रिये प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की रक्षा के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात जैसे सीमावर्ती व रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में उभरती सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ी हैं।

ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण और नई क्षमताएँ

निम्न ऊँचाई वाले हवाई खतरों से निपटने के लिए सीआईएसएफ ने भारतीय सेना के सहयोग से अपने कर्मियों के लिए चरणबद्ध ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। कई विशेष स्थानों पर संचालित इस कार्यक्रम के अंतर्गत जवानों को शत्रुतापूर्ण मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएवी) का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें निष्क्रिय करने की उन्नत क्षमताएँ दी जा रही हैं।

आगे की राह

बैठक में ड्रोन-संबंधी चुनौतियों, तोड़फोड़-रोधी उपायों और आपदा प्रतिक्रिया क्षमताओं के विरुद्ध तैयारियों को और मज़बूत करने पर बल दिया गया। आतंकवाद-विरोधी, त्वरित प्रतिक्रिया और आपदा प्रबंधन के क्षेत्रों में भारतीय सेना व अन्य एजेंसियों के साथ चल रही संयुक्त प्रशिक्षण पहलों की भी समीक्षा की गई। गौरतलब है कि सीआईएसएफ देश भर में महत्वपूर्ण सरकारी बुनियादी ढाँचे, नागरिक उड्डयन सुविधाओं, परमाणु प्रतिष्ठानों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का दायित्व निभाता है — और अब इस सूची में विदेश मंत्रालय का मुख्यालय भी जुड़ गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि इतने वर्षों तक देश का प्रमुख राजनयिक मुख्यालय पेशेवर अर्धसैनिक सुरक्षा के बिना क्यों था। सीमावर्ती राज्यों में बढ़ते ड्रोन खतरों और पहलगाम जैसी घटनाओं के बाद सुरक्षा ढाँचे की यह पुनर्समीक्षा महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि रणनीतिक ज़रूरत बन चुकी है। भारतीय सेना के साथ संयुक्त ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण संकेत देता है कि सीआईएसएफ अब पारंपरिक प्रवेश-द्वार सुरक्षा से आगे बढ़कर हाइब्रिड खतरों के लिए तैयार हो रहा है — यह बदलाव दिशा में सही, पर क्रियान्वयन की गति और पारदर्शिता पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुषमा स्वराज भवन में सीआईएसएफ की तैनाती क्यों की गई?
विदेश मंत्रालय के मुख्यालय जैसे प्रमुख राजनयिक प्रतिष्ठान को पेशेवर अर्धसैनिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से यह तैनाती की गई है। सीआईएसएफ देश के महत्वपूर्ण सरकारी बुनियादी ढाँचे, परमाणु प्रतिष्ठानों और नागरिक उड्डयन सुविधाओं की सुरक्षा का दायित्व पहले से निभाता आ रहा है।
सुषमा स्वराज भवन में कितने सीआईएसएफ जवान तैनात किए गए हैं?
सरकार ने इस तैनाती के लिए 90 कर्मियों की संख्या स्वीकृत की है। इन जवानों ने 30 मई 2025 को औपचारिक रूप से परिसर में सुरक्षा कर्तव्यों का प्रभार संभाल लिया।
सीआईएसएफ का ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम क्या है?
सीआईएसएफ ने भारतीय सेना के सहयोग से अपने जवानों के लिए चरणबद्ध ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम में कर्मियों को शत्रुतापूर्ण मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएवी) का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें निष्क्रिय करने की उन्नत क्षमताएँ दी जाती हैं।
सीआईएसएफ की परिचालन समीक्षा बैठक में क्या चर्चा हुई?
महानिदेशक प्रवीर रंजन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सुरक्षा तैयारियों को मज़बूत करने, अंतर-एजेंसी समन्वय बढ़ाने और उन्नत प्रौद्योगिकियाँ अपनाने पर चर्चा हुई। विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
सीआईएसएफ किन प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करता है?
सीआईएसएफ देश भर में महत्वपूर्ण सरकारी बुनियादी ढाँचे, नागरिक उड्डयन सुविधाओं, परमाणु प्रतिष्ठानों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का दायित्व निभाता है। अब सुषमा स्वराज भवन स्थित विदेश मंत्रालय मुख्यालय भी इस सूची में शामिल हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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