सीजेआई सूर्यकांत का सख्त संदेश: भाई को फोन कर आदेश पर सवाल उठाने पर दी अवमानना की चेतावनी

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सीजेआई सूर्यकांत का सख्त संदेश: भाई को फोन कर आदेश पर सवाल उठाने पर दी अवमानना की चेतावनी

सारांश

सीजेआई सूर्यकांत ने आदेश पर सवाल उठाने को लेकर सख्त चेतावनी दी है, यह मामला मेरठ के मेडिकल कॉलेज में बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे से संबंधित है, जिसमें अवमानना की कार्रवाई की बात की गई है।

मुख्य बातें

सीजेआई का सख्त रुख आदेश पर सवाल उठाने पर अवमानना की चेतावनी सिस्टम का दुरुपयोग

नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने उनके आदेश पर सवाल उठाने की कोशिश को लेकर गंभीर नाराजगी व्यक्त की और आपराधिक अवमानना की चेतावनी दी।

मेडिकल प्रवेश से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान, सीजेआई ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा, "किसी ने मेरे भाई को फोन करके पूछा कि मैंने ऐसा आदेश कैसे जारी किया। क्या इसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए?"

हरियाणा सरकार के वकील को संबोधित करते हुए, उन्होंने सख्त लहजे में कहा, "आप मेरे भाई को कॉल करके यह पूछते हैं कि सीजेआई ने ऐसा आदेश कैसे दिया? क्या वह मुझे निर्देश देने वाला है? पहले आप इसकी पुष्टि करें और वकील के रूप में आपको इस मामले से खुद को अलग कर लेना चाहिए।"

सीजेआई ने आगे कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, "भले ही वह विदेश में छिप जाए, मुझे पता है कि ऐसे लोगों से कैसे निपटा जाता है। ऐसी हरकत एक बार फिर न करें। मैं पिछले २३ वर्षों से ऐसे तत्वों का सामना करता रहा हूँ।"

यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें मेरठ स्थित सुभारती मेडिकल कॉलेज में पोस्टग्रेजुएट कोर्स में दाखिले के लिए बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे का लाभ मांगा गया था। यह संस्थान अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के लिए राष्ट्रीय आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त है।

याचिकाकर्ता निकिल कुमार पुनिया और एकता पुनिया ने दावा किया था कि बौद्ध धर्म अपनाने के बाद वे अल्पसंख्यक कोटे के योग्य हैं, जबकि इससे पहले वे सामान्य वर्ग के उम्मीदवार के रूप में परीक्षा दे चुके थे। उत्तर प्रदेश सरकार की अधिसूचना के तहत उनके दाखिले पर रोक लगा दी गई थी।

मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए अदालत ने इसे सिस्टम के दुरुपयोग का गंभीर मामला बताया। सीजेआई ने टिप्पणी की, "यह एक नए प्रकार का धोखा है, हमें ज्यादा कुछ कहने पर मजबूर न करें।"

पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि सामान्य वर्ग से आने वाले उम्मीदवार, जो पहले गैर-अल्पसंख्यक के रूप में आवेदन कर चुके हैं, वे अचानक अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र कैसे प्राप्त कर सकते हैं।

याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा, "आप अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनना चाहते हैं। आप एक समृद्ध समुदाय से आते हैं, अपने मेरिट पर गर्व करें।"

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने भी धर्म परिवर्तन के समय पर सवाल उठाते हुए कहा, "क्या वे परीक्षा से ठीक पहले बौद्ध बने?"

अदालत ने प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि हिसार के उपमंडल अधिकारी ने ऐसे प्रमाण पत्र कैसे जारी किए। साथ ही हरियाणा के मुख्य सचिव को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने के दिशा-निर्देश पेश करने का आदेश दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि क्या सामान्य वर्ग, खासकर ईडब्ल्यूएस सीमा से ऊपर के उम्मीदवारों को, बाद में बौद्ध अल्पसंख्यक का दर्जा देकर प्रवेश देना उचित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह समाज में अल्पसंख्यक अधिकारों के संदर्भ में भी गहराई से छूता है। अदालत का सख्त रुख यह दर्शाता है कि वह सिस्टम के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं करेगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेआई ने क्यों नाराजगी जताई?
सीजेआई ने उनके आदेश पर सवाल उठाने की कोशिश को लेकर नाराजगी जताई और अवमानना की चेतावनी दी।
किस मामले में यह सुनवाई हुई?
यह सुनवाई मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज में बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे से संबंधित प्रवेश को लेकर हुई थी।
अदालत ने याचिका को क्यों खारिज किया?
अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए इसे सिस्टम के दुरुपयोग का गंभीर मामला बताया।
राष्ट्र प्रेस
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