दलबदल विरोधी कानून और मंदिर दान घोटाले पर कांग्रेस सांसदों का लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और माणिकम टैगोर बी ने 12 अगस्त 2026 को लोकसभा महासचिव को अलग-अलग पत्र लिखकर स्थगन प्रस्ताव के नोटिस दिए हैं। तिवारी ने नए दलबदल विरोधी कानून के स्वरूप पर तत्काल संसदीय चर्चा की माँग की है, जबकि टैगोर ने देशभर के मंदिरों में दान और कीमती सामान की कथित चोरी व गबन के मुद्दे को सदन के पटल पर लाने की अपील की है। दोनों नोटिस संसद के मौजूदा सत्र में विपक्ष की आक्रामक रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
दलबदल विरोधी कानून पर मनीष तिवारी की माँग
मनीष तिवारी ने अपने पत्र में लिखा कि वे प्रश्नकाल, शून्यकाल और दिन के अन्य सभी निर्धारित कार्यों को स्थगित कर एक नए दलबदल विरोधी कानून के स्वरूप पर चर्चा चाहते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यह कानून अवसरवाद से प्रेरित और बिना किसी वास्तविक वैचारिक या नीतिगत मतभेद के होने वाले बड़े पैमाने के राजनीतिक दलबदल को रोके, और साथ ही संसद व विधानसभाओं के भीतर-बाहर ईमानदार और आलोचनात्मक असहमति की गुंजाइश भी बनाए रखे।
गौरतलब है कि मौजूदा दलबदल विरोधी कानून — संविधान की दसवीं अनुसूची — 1985 में लागू हुआ था। तब से कई राज्यों में सत्ता-परिवर्तन के लिए इसे दरकिनार करने के आरोप लगते रहे हैं। तिवारी की माँग इस बहस को नए सिरे से केंद्र में लाती है।
मंदिर दान घोटाले पर माणिकम टैगोर का नोटिस
माणिकम टैगोर बी ने अपने नोटिस में अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हालिया रिपोर्टों के अनुसार जाँच में सुरक्षा और नकदी-गिनने की प्रक्रियाओं में बड़ी खामियाँ सामने आई हैं, जिससे जवाबदेही और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
टैगोर ने कहा कि देशभर के मंदिरों को भक्तों से नकद, सोना, चाँदी, गहने और अन्य कीमती वस्तुओं के रूप में भारी दान मिलता है। उनके अनुसार, ऐसे चढ़ावे की चोरी या हेराफेरी केवल एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और धार्मिक भावनाओं का गंभीर उल्लंघन भी है।
सरकार से माँगे गए जवाब
टैगोर ने सरकार से कई स्पष्ट सवालों के जवाब माँगे हैं — मंदिर दान की चोरी और हेराफेरी की कितनी घटनाएँ अब तक सामने आई हैं; जिम्मेदारों की जाँच के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं; बड़े मंदिरों में सीसीटीवी निगरानी, ऑडिटिंग, कैश-काउंटिंग और इन्वेंट्री सिस्टम को मजबूत करने के लिए क्या उपाय हैं; और क्या सरकार भक्तों के दान की सुरक्षा के लिए अधिक पारदर्शी तंत्र बनाने का इरादा रखती है।
उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि संबंधित नियमों के तहत निर्धारित कामकाज को स्थगित कर सदन में तत्काल चर्चा की अनुमति दी जाए।
संसदीय संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश में है। स्थगन प्रस्ताव के नोटिस संसदीय नियमों के तहत दिए जाते हैं और इनकी स्वीकृति लोकसभा अध्यक्ष के विवेकाधिकार पर निर्भर होती है। अब देखना होगा कि अध्यक्ष इन दोनों नोटिसों को सदन में चर्चा के लिए स्वीकार करते हैं या नहीं।