12 अगस्त 2026
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दलबदल विरोधी कानून और मंदिर दान घोटाले पर कांग्रेस सांसदों का लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस

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दलबदल विरोधी कानून और मंदिर दान घोटाले पर कांग्रेस सांसदों का लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस

सारांश

कांग्रेस के दो सांसदों ने एक ही दिन लोकसभा में दो अलग-अलग संवेदनशील मुद्दे उठाए — दलबदल की राजनीति पर नया कानून और मंदिरों में चढ़ावे की कथित लूट। दोनों नोटिस विपक्ष की संसदीय घेराबंदी की नई कड़ी हैं।

मुख्य बातें

मनीष तिवारी ने 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में नए दलबदल विरोधी कानून के स्वरूप पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया।
माणिकम टैगोर बी ने देशभर के मंदिरों में दान और कीमती सामान की कथित चोरी व गबन पर तत्काल संसदीय चर्चा की माँग की।
टैगोर ने अयोध्या राम मंदिर में दान प्रबंधन की कथित अनियमितताओं का विशेष उल्लेख किया।
सरकार से सीसीटीवी निगरानी, ऑडिटिंग और पारदर्शी इन्वेंट्री सिस्टम पर जवाब माँगा गया।
दोनों नोटिसों की स्वीकृति लोकसभा अध्यक्ष के विवेकाधिकार पर निर्भर है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और माणिकम टैगोर बी ने 12 अगस्त 2026 को लोकसभा महासचिव को अलग-अलग पत्र लिखकर स्थगन प्रस्ताव के नोटिस दिए हैं। तिवारी ने नए दलबदल विरोधी कानून के स्वरूप पर तत्काल संसदीय चर्चा की माँग की है, जबकि टैगोर ने देशभर के मंदिरों में दान और कीमती सामान की कथित चोरी व गबन के मुद्दे को सदन के पटल पर लाने की अपील की है। दोनों नोटिस संसद के मौजूदा सत्र में विपक्ष की आक्रामक रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।

दलबदल विरोधी कानून पर मनीष तिवारी की माँग

मनीष तिवारी ने अपने पत्र में लिखा कि वे प्रश्नकाल, शून्यकाल और दिन के अन्य सभी निर्धारित कार्यों को स्थगित कर एक नए दलबदल विरोधी कानून के स्वरूप पर चर्चा चाहते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यह कानून अवसरवाद से प्रेरित और बिना किसी वास्तविक वैचारिक या नीतिगत मतभेद के होने वाले बड़े पैमाने के राजनीतिक दलबदल को रोके, और साथ ही संसद व विधानसभाओं के भीतर-बाहर ईमानदार और आलोचनात्मक असहमति की गुंजाइश भी बनाए रखे।

गौरतलब है कि मौजूदा दलबदल विरोधी कानून — संविधान की दसवीं अनुसूची1985 में लागू हुआ था। तब से कई राज्यों में सत्ता-परिवर्तन के लिए इसे दरकिनार करने के आरोप लगते रहे हैं। तिवारी की माँग इस बहस को नए सिरे से केंद्र में लाती है।

मंदिर दान घोटाले पर माणिकम टैगोर का नोटिस

माणिकम टैगोर बी ने अपने नोटिस में अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हालिया रिपोर्टों के अनुसार जाँच में सुरक्षा और नकदी-गिनने की प्रक्रियाओं में बड़ी खामियाँ सामने आई हैं, जिससे जवाबदेही और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

टैगोर ने कहा कि देशभर के मंदिरों को भक्तों से नकद, सोना, चाँदी, गहने और अन्य कीमती वस्तुओं के रूप में भारी दान मिलता है। उनके अनुसार, ऐसे चढ़ावे की चोरी या हेराफेरी केवल एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और धार्मिक भावनाओं का गंभीर उल्लंघन भी है।

सरकार से माँगे गए जवाब

टैगोर ने सरकार से कई स्पष्ट सवालों के जवाब माँगे हैं — मंदिर दान की चोरी और हेराफेरी की कितनी घटनाएँ अब तक सामने आई हैं; जिम्मेदारों की जाँच के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं; बड़े मंदिरों में सीसीटीवी निगरानी, ऑडिटिंग, कैश-काउंटिंग और इन्वेंट्री सिस्टम को मजबूत करने के लिए क्या उपाय हैं; और क्या सरकार भक्तों के दान की सुरक्षा के लिए अधिक पारदर्शी तंत्र बनाने का इरादा रखती है।

उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि संबंधित नियमों के तहत निर्धारित कामकाज को स्थगित कर सदन में तत्काल चर्चा की अनुमति दी जाए।

संसदीय संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश में है। स्थगन प्रस्ताव के नोटिस संसदीय नियमों के तहत दिए जाते हैं और इनकी स्वीकृति लोकसभा अध्यक्ष के विवेकाधिकार पर निर्भर होती है। अब देखना होगा कि अध्यक्ष इन दोनों नोटिसों को सदन में चर्चा के लिए स्वीकार करते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विडंबना यह है कि कांग्रेस खुद कई राज्यों में ऐसे विधायकों के दलबदल की शिकार और लाभार्थी दोनों रही है। माणिकम टैगोर का मंदिर दान घोटाले वाला नोटिस राजनीतिक रूप से तीखा है — यह सीधे उस हिंदू आस्था केंद्र को निशाना बनाता है जिसे सत्तारूढ़ दल की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है। दोनों नोटिस एक ही दिन आना महज संयोग नहीं लगता — यह विपक्ष की सुनियोजित संसदीय रणनीति की झलक है। असली सवाल यह है कि क्या ये नोटिस सदन में चर्चा बनेंगे, या अध्यक्ष की मंजूरी न मिलने पर महज प्रेस नोट बनकर रह जाएँगे।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्थगन प्रस्ताव नोटिस क्या होता है और इसका क्या महत्व है?
स्थगन प्रस्ताव संसद की एक प्रक्रिया है जिसमें सदस्य सदन की नियमित कार्यवाही रोककर किसी तत्काल सार्वजनिक महत्व के मुद्दे पर चर्चा की माँग करते हैं। इसकी स्वीकृति लोकसभा अध्यक्ष के विवेकाधिकार पर निर्भर होती है।
मनीष तिवारी किस तरह का दलबदल विरोधी कानून चाहते हैं?
मनीष तिवारी ऐसा कानून चाहते हैं जो अवसरवाद से प्रेरित और बिना वैचारिक आधार के होने वाले दलबदल को रोके, लेकिन साथ ही संसद व विधानसभाओं में ईमानदार असहमति और आलोचना की गुंजाइश भी बनाए रखे। मौजूदा दसवीं अनुसूची 1985 से लागू है और इसमें संशोधन की माँग लंबे समय से उठती रही है।
माणिकम टैगोर ने किस मंदिर घोटाले का जिक्र किया है?
टैगोर ने अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया है। रिपोर्टों के अनुसार जाँच में सुरक्षा और नकदी-गिनने की प्रक्रियाओं में बड़ी खामियाँ सामने आई हैं।
टैगोर ने सरकार से मंदिर दान सुरक्षा पर क्या सवाल उठाए हैं?
उन्होंने सरकार से पूछा है कि कितनी घटनाएँ सामने आई हैं, दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी, बड़े मंदिरों में सीसीटीवी, ऑडिटिंग और इन्वेंट्री सिस्टम कैसे मजबूत किए जाएँगे, और क्या भविष्य में अधिक पारदर्शी तंत्र बनाया जाएगा।
क्या इन स्थगन नोटिसों पर लोकसभा में चर्चा होगी?
यह लोकसभा अध्यक्ष के विवेकाधिकार पर निर्भर है। स्थगन प्रस्ताव के नोटिस देना और उन्हें सदन में चर्चा के लिए स्वीकार किया जाना दो अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं। अध्यक्ष नोटिस की विषय-वस्तु और तात्कालिकता के आधार पर निर्णय लेते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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