मनीष तिवारी ने लोकसभा महासचिव को पत्र लिखा, दल-बदल विरोधी कानून पर संसद में चर्चा की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 20 जुलाई को लोकसभा महासचिव को पत्र लिखकर सदन की कार्यवाही स्थगित करने और दल-बदल विरोधी कानून के नए स्वरूप पर तत्काल चर्चा कराने की माँग की है। उनका तर्क है कि मौजूदा कानून अवसरवादी राजनीतिक दल-बदल को रोकने में नाकाफी साबित हुआ है।
मनीष तिवारी का प्रस्ताव
मनीष तिवारी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि वे प्रश्नकाल, शून्यकाल और दिन के अन्य निर्धारित कार्यों को स्थगित कर एक नए दल-बदल विरोधी कानून के स्वरूप पर व्यापक चर्चा चाहते हैं। उन्होंने लिखा, 'मेरा प्रस्ताव है कि यह सदन प्रश्नकाल, शून्यकाल और दिन के अन्य सभी निर्धारित कार्यों को स्थगित करे, ताकि एक नए दल-बदल विरोधी कानून के स्वरूप पर चर्चा की जा सके।'
तिवारी ने यह भी रेखांकित किया कि नया कानून केवल अवसरवाद से प्रेरित दल-बदल को रोके, बल्कि संसद और विधानसभाओं के भीतर एवं बाहर ईमानदार और आलोचनात्मक असहमति की गुंजाइश भी बनाए रखे। यह माँग ऐसे समय में आई है जब हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर राजनीतिक दल-बदल की घटनाएँ विभिन्न राज्यों में सुर्खियाँ बन चुकी हैं।
विपक्ष की रणनीति
कांग्रेस के लोकसभा सांसदों ने उसी दिन सुबह 10:30 बजे विपक्ष के फ्लोर लीडर्स की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी लेने के लिए अलग बैठक की। यह बैठक संसद सत्र के दौरान विपक्ष की समन्वित रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
नीट पेपर लीक पर भी स्थगन प्रस्ताव
इसी क्रम में तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर नीट पेपर लीक मामले पर स्थगन प्रस्ताव लाने की अनुमति माँगी। उन्होंने अपने पत्र में लिखा, 'रिपोर्टों से पता चलता है कि नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएँ हुई हैं, लेकिन इसके खिलाफ कोई ठोस या सामूहिक कार्रवाई नहीं की गई है।'
टैगोर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि उनकी 'स्पष्ट विफलता के बावजूद वे बिना किसी नैतिक जिम्मेदारी के अपने पद पर बने हुए हैं, जो मंत्री की जवाबदेही के बुनियादी सिद्धांत का उल्लंघन है।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि तमिलनाडु में इस मुद्दे से सीधे जुड़ी आत्महत्या की घटनाएँ हो चुकी हैं।
राहुल गांधी की भूमिका
टैगोर ने अपने पत्र में बताया कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी तमिलनाडु में नीट से प्रभावित परिवारों से मिल चुके हैं और उन्हें सांत्वना दी है। कांग्रेस सांसदों को पीड़ित परिवारों तक पहुँचने का निर्देश भी दिया गया है। पार्टी ने संसद के अंदर और बाहर नीट के 'शोषणकारी पहलुओं' को समाप्त करने और सरकार को जवाबदेह ठहराने की माँग को अपना केंद्रीय मुद्दा बनाया है।
आगे क्या होगा
दोनों स्थगन प्रस्तावों — दल-बदल विरोधी कानून और नीट पेपर लीक — पर लोकसभा अध्यक्ष की स्वीकृति आवश्यक है। यदि अनुमति मिलती है तो सदन में तीखी बहस की संभावना है। विपक्ष के इस कदम से मानसून सत्र में सरकार पर दबाव और बढ़ने के आसार हैं।