21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मनीष तिवारी ने लोकसभा महासचिव को पत्र लिखा, दल-बदल विरोधी कानून पर संसद में चर्चा की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मनीष तिवारी ने लोकसभा महासचिव को पत्र लिखा, दल-बदल विरोधी कानून पर संसद में चर्चा की मांग

सारांश

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में दल-बदल विरोधी कानून के नए स्वरूप पर तत्काल चर्चा की माँग की है, जबकि मणिकम टैगोर ने नीट पेपर लीक पर अलग स्थगन प्रस्ताव दिया है। मानसून सत्र में विपक्ष ने दो मोर्चों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 20 जुलाई को लोकसभा महासचिव को पत्र लिखकर दल-बदल विरोधी कानून पर स्थगन प्रस्ताव की अनुमति माँगी।
तिवारी ने माँग की कि नया कानून अवसरवादी दल-बदल रोके, लेकिन ईमानदार असहमति की गुंजाइश भी बनाए रखे।
तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने नीट पेपर लीक मामले पर अलग स्थगन प्रस्ताव के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा।
टैगोर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर नैतिक जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाया।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी तमिलनाडु में नीट-प्रभावित परिवारों से मिल चुके हैं और सांसदों को पीड़ितों तक पहुँचने का निर्देश दिया है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 20 जुलाई को लोकसभा महासचिव को पत्र लिखकर सदन की कार्यवाही स्थगित करने और दल-बदल विरोधी कानून के नए स्वरूप पर तत्काल चर्चा कराने की माँग की है। उनका तर्क है कि मौजूदा कानून अवसरवादी राजनीतिक दल-बदल को रोकने में नाकाफी साबित हुआ है।

मनीष तिवारी का प्रस्ताव

मनीष तिवारी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि वे प्रश्नकाल, शून्यकाल और दिन के अन्य निर्धारित कार्यों को स्थगित कर एक नए दल-बदल विरोधी कानून के स्वरूप पर व्यापक चर्चा चाहते हैं। उन्होंने लिखा, 'मेरा प्रस्ताव है कि यह सदन प्रश्नकाल, शून्यकाल और दिन के अन्य सभी निर्धारित कार्यों को स्थगित करे, ताकि एक नए दल-बदल विरोधी कानून के स्वरूप पर चर्चा की जा सके।'

तिवारी ने यह भी रेखांकित किया कि नया कानून केवल अवसरवाद से प्रेरित दल-बदल को रोके, बल्कि संसद और विधानसभाओं के भीतर एवं बाहर ईमानदार और आलोचनात्मक असहमति की गुंजाइश भी बनाए रखे। यह माँग ऐसे समय में आई है जब हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर राजनीतिक दल-बदल की घटनाएँ विभिन्न राज्यों में सुर्खियाँ बन चुकी हैं।

विपक्ष की रणनीति

कांग्रेस के लोकसभा सांसदों ने उसी दिन सुबह 10:30 बजे विपक्ष के फ्लोर लीडर्स की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी लेने के लिए अलग बैठक की। यह बैठक संसद सत्र के दौरान विपक्ष की समन्वित रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

नीट पेपर लीक पर भी स्थगन प्रस्ताव

इसी क्रम में तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर नीट पेपर लीक मामले पर स्थगन प्रस्ताव लाने की अनुमति माँगी। उन्होंने अपने पत्र में लिखा, 'रिपोर्टों से पता चलता है कि नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएँ हुई हैं, लेकिन इसके खिलाफ कोई ठोस या सामूहिक कार्रवाई नहीं की गई है।'

टैगोर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि उनकी 'स्पष्ट विफलता के बावजूद वे बिना किसी नैतिक जिम्मेदारी के अपने पद पर बने हुए हैं, जो मंत्री की जवाबदेही के बुनियादी सिद्धांत का उल्लंघन है।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि तमिलनाडु में इस मुद्दे से सीधे जुड़ी आत्महत्या की घटनाएँ हो चुकी हैं।

राहुल गांधी की भूमिका

टैगोर ने अपने पत्र में बताया कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी तमिलनाडु में नीट से प्रभावित परिवारों से मिल चुके हैं और उन्हें सांत्वना दी है। कांग्रेस सांसदों को पीड़ित परिवारों तक पहुँचने का निर्देश भी दिया गया है। पार्टी ने संसद के अंदर और बाहर नीट के 'शोषणकारी पहलुओं' को समाप्त करने और सरकार को जवाबदेह ठहराने की माँग को अपना केंद्रीय मुद्दा बनाया है।

आगे क्या होगा

दोनों स्थगन प्रस्तावों — दल-बदल विरोधी कानून और नीट पेपर लीक — पर लोकसभा अध्यक्ष की स्वीकृति आवश्यक है। यदि अनुमति मिलती है तो सदन में तीखी बहस की संभावना है। विपक्ष के इस कदम से मानसून सत्र में सरकार पर दबाव और बढ़ने के आसार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी विडंबना यह है कि दल-बदल विरोधी कानून की सबसे बड़ी आलोचना खुद उन दलों पर भी लागू होती है जो इसे मजबूत करने की माँग कर रहे हैं। असली सवाल यह है कि क्या कोई भी दल ऐसा कानून चाहेगा जो उसके अपने विधायकों पर भी समान रूप से लागू हो। नीट मुद्दे पर विपक्ष का आक्रामक रुख राजनीतिक रूप से प्रभावी है, लेकिन तमिलनाडु में हुई आत्महत्याओं की त्रासदी को सिर्फ संसदीय हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की सीमा भी है। दोनों मुद्दे — दल-बदल और नीट — असल में संस्थागत जवाबदेही की एक ही बड़ी विफलता के दो चेहरे हैं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनीष तिवारी ने लोकसभा में किस मुद्दे पर चर्चा की माँग की है?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा महासचिव को पत्र लिखकर दल-बदल विरोधी कानून के नए स्वरूप पर सदन की कार्यवाही स्थगित कर चर्चा कराने की माँग की है। उनका कहना है कि नया कानून अवसरवादी दल-बदल रोकने के साथ-साथ ईमानदार असहमति की गुंजाइश भी बनाए रखे।
दल-बदल विरोधी कानून क्या है और इसमें बदलाव क्यों माँगा जा रहा है?
भारत में दल-बदल विरोधी कानून संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत आता है, जो निर्वाचित सदस्यों को अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने पर अयोग्य ठहराता है। आलोचकों का कहना है कि यह कानून बड़े पैमाने पर अवसरवादी दल-बदल रोकने में नाकाफी रहा है और इसमें सुधार की जरूरत है।
मणिकम टैगोर ने नीट पेपर लीक पर क्या माँग की है?
तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर नीट पेपर लीक मामले पर स्थगन प्रस्ताव की अनुमति माँगी है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेने की भी माँग की है।
नीट पेपर लीक मामले में राहुल गांधी की क्या भूमिका रही है?
विपक्ष के नेता राहुल गांधी तमिलनाडु में नीट से प्रभावित परिवारों से मिल चुके हैं और उन्हें सांत्वना दी है। उन्होंने कांग्रेस सांसदों को पीड़ित परिवारों तक पहुँचने का निर्देश दिया है और संसद के अंदर और बाहर इस मुद्दे को उठाने की रणनीति बनाई है।
इन स्थगन प्रस्तावों का संसद सत्र पर क्या असर पड़ेगा?
दोनों स्थगन प्रस्तावों पर लोकसभा अध्यक्ष की स्वीकृति आवश्यक है। यदि अनुमति मिलती है तो मानसून सत्र में सरकार पर दबाव बढ़ेगा और दल-बदल कानून व नीट — दोनों मुद्दों पर तीखी बहस की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले