5 अगस्त 2026
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दलबदल विरोधी कानून पर संसद में बहस चाहते हैं मनीष तिवारी, लोकसभा में दिया स्थगन प्रस्ताव नोटिस

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दलबदल विरोधी कानून पर संसद में बहस चाहते हैं मनीष तिवारी, लोकसभा में दिया स्थगन प्रस्ताव नोटिस

सारांश

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में दलबदल विरोधी कानून के नए स्वरूप पर बहस की माँग करते हुए स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया है — यह माँग तब आई है जब देश में अवसरवादी दल-बदल की घटनाएँ लगातार चर्चा में हैं और मौजूदा दसवीं अनुसूची की सीमाएँ बार-बार उजागर हो रही हैं।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा महासचिव को स्थगन प्रस्ताव नोटिस भेजा।
माँग: प्रश्नकाल और शून्यकाल रोककर नए दलबदल विरोधी कानून के स्वरूप पर तत्काल बहस हो।
तिवारी चाहते हैं कि नया कानून अवसरवादी दल-बदल रोके और साथ ही ईमानदार असहमति की गुंजाइश भी बनाए रखे।
इससे पहले 28 जुलाई 2026 को भी उन्होंने 20 जुलाई के छात्र मार्च में RAF द्वारा पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर चर्चा के लिए नोटिस दिया था, जिसमें 80 से अधिक लोग कथित तौर पर घायल हुए थे।
नोटिस की स्वीकृति लोकसभा अध्यक्ष के विवेक पर निर्भर; सरकार की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा महासचिव को पत्र लिखकर स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है, जिसमें उन्होंने सदन की नियमित कार्यवाही रोककर एक नए दलबदल विरोधी कानून के स्वरूप पर तत्काल चर्चा की माँग की है। उनका तर्क है कि मौजूदा कानून अवसरवादी दल-बदल को रोकने में विफल रहा है और इसमें ईमानदार असहमति के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है।

मनीष तिवारी की मुख्य माँग

लोकसभा महासचिव को संबोधित अपने नोटिस में मनीष तिवारी ने लिखा, 'मेरा प्रस्ताव है कि यह सदन प्रश्नकाल, शून्यकाल और दिन के अन्य सभी निर्धारित कार्यों को स्थगित करे ताकि एक नए दलबदल विरोधी कानून के स्वरूप पर चर्चा की जा सके।'

तिवारी ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून दोहरा उद्देश्य पूरा करे — एक ओर वह बिना किसी वास्तविक वैचारिक या नीतिगत मतभेद के होने वाले अवसरवादी दल-बदल को रोके, और दूसरी ओर संसद व विधानसभाओं के भीतर और बाहर ईमानदार एवं आलोचनात्मक असहमति के लिए भी पर्याप्त गुंजाइश बनाए रखे।

पृष्ठभूमि: 28 जुलाई का पहला नोटिस

यह पहली बार नहीं है जब मनीष तिवारी ने स्थगन प्रस्ताव का सहारा लिया है। इससे पहले 28 जुलाई 2026 को भी उन्होंने लोकसभा में इसी तरह का नोटिस दिया था। उस नोटिस में उन्होंने 20 जुलाई 2026 को संसद तक निकाले गए छात्र मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर चर्चा की माँग की थी।

उस प्रदर्शन में परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के विरोध में छात्र सड़कों पर उतरे थे, और कथित तौर पर 80 से अधिक लोग घायल हुए थे। तिवारी ने उस नोटिस में कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर न्यूनतम बल का प्रयोग होना चाहिए था, किंतु नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी करते हुए अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ितों को मुआवजे के मुद्दे पर तत्काल संसदीय विमर्श आवश्यक हो गया था।

दलबदल विरोधी कानून: मौजूदा ढाँचे की सीमाएँ

भारत की दसवीं अनुसूची, जिसे सामान्यतः दलबदल विरोधी कानून कहा जाता है, 1985 में संविधान में जोड़ी गई थी। गौरतलब है कि इस कानून की व्याख्या और क्रियान्वयन को लेकर समय-समय पर विवाद उठते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस कानून का दुरुपयोग असली वैचारिक असहमति को दबाने के लिए भी किया जाता है, जबकि इसका मूल उद्देश्य अवसरवादी दल-बदल रोकना था।

तिवारी की माँग ऐसे समय में आई है जब देश में राजनीतिक दल-बदल की घटनाएँ बार-बार सुर्खियों में रही हैं और कई राज्यों में सरकारें इसी के बल पर बनती-बिगड़ती रही हैं।

आगे क्या होगा

स्थगन प्रस्ताव नोटिस की स्वीकृति लोकसभा अध्यक्ष के विवेक पर निर्भर करती है। यदि नोटिस स्वीकार होता है, तो सदन में दलबदल विरोधी कानून के नए स्वरूप पर विस्तृत बहस का रास्ता खुल सकता है। सरकार की ओर से अभी तक इस माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस गहरे राजनीतिक तनाव को उजागर करती है जो दसवीं अनुसूची के इर्द-गिर्द दशकों से बना हुआ है — कानून जो दल-बदल रोकने के लिए बना, वही विधायकों की स्वतंत्र आवाज़ दबाने का औज़ार बन गया। विपक्ष की यह माँग तब और प्रासंगिक हो जाती है जब हाल के वर्षों में कई राज्यों में थोक दल-बदल से सरकारें पलटती देखी गई हैं, फिर भी कानून बेअसर रहा। असली सवाल यह है कि क्या सत्तारूढ़ दल, जो इस कानून के मौजूदा स्वरूप से अक्सर लाभान्वित होता है, किसी सार्थक सुधार पर चर्चा की अनुमति देगा।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनीष तिवारी ने लोकसभा में किस विषय पर स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया है?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा महासचिव को नोटिस भेजकर एक नए दलबदल विरोधी कानून के स्वरूप पर तत्काल संसदीय बहस की माँग की है। उन्होंने प्रश्नकाल और शून्यकाल स्थगित कर इस विषय पर पूर्ण चर्चा का अनुरोध किया है।
दलबदल विरोधी कानून क्या है और इसमें सुधार की माँग क्यों हो रही है?
दलबदल विरोधी कानून संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत 1985 में लागू हुआ था, जिसका उद्देश्य अवसरवादी राजनीतिक दल-बदल रोकना था। आलोचकों का कहना है कि इसका दुरुपयोग ईमानदार वैचारिक असहमति दबाने के लिए भी होता है, इसलिए इसके नए स्वरूप की माँग उठ रही है।
क्या मनीष तिवारी ने पहले भी ऐसा नोटिस दिया था?
हाँ, 28 जुलाई 2026 को भी मनीष तिवारी ने स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया था। उस नोटिस में 20 जुलाई 2026 को संसद तक छात्र मार्च के दौरान RAF द्वारा कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर चर्चा की माँग थी, जिसमें कथित तौर पर 80 से अधिक लोग घायल हुए थे।
स्थगन प्रस्ताव नोटिस स्वीकार होगा या नहीं, यह कैसे तय होता है?
स्थगन प्रस्ताव नोटिस की स्वीकृति लोकसभा अध्यक्ष के विवेकाधिकार पर निर्भर करती है। अध्यक्ष यह तय करते हैं कि उठाया गया विषय तत्काल और पर्याप्त सार्वजनिक महत्व का है या नहीं।
सरकार ने तिवारी की इस माँग पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
5 अगस्त 2026 तक सरकार की ओर से मनीष तिवारी के इस नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। नोटिस की स्वीकृति और आगे की कार्यवाही लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय पर निर्भर है।
राष्ट्र प्रेस
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