28 जुलाई 2026
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लोकसभा में मनीष तिवारी का स्थगन नोटिस: 20 जुलाई को छात्रों पर पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर बहस की मांग

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लोकसभा में मनीष तिवारी का स्थगन नोटिस: 20 जुलाई को छात्रों पर पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर बहस की मांग

सारांश

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में स्थगन नोटिस दिया — माँग है कि 20 जुलाई को पेपर लीक विरोधी छात्र मार्च पर RAF द्वारा पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर तत्काल बहस हो। 80 से अधिक घायल, CRPF जाँच जारी, और संसद में टकराव तय।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया।
नोटिस में 20 जुलाई 2026 को संसद तक छात्र मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर बहस की माँग की गई।
प्रदर्शन में 80 से अधिक लोग घायल होने की बात कही गई है; मार्च परीक्षा पेपर लीक के विरोध में था।
तिवारी ने प्रश्नकाल, शून्यकाल और अन्य कार्यवाहियाँ स्थगित कर अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ितों को मुआवज़े पर चर्चा की अपील की।
CRPF की आंतरिक जाँच जारी है; रिपोर्ट अगले सप्ताह तक आने की उम्मीद है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर मांग की कि सदन 20 जुलाई 2026 को संसद तक निकाले गए छात्र मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर तत्काल चर्चा करे। इस प्रदर्शन में 80 से अधिक लोगों के घायल होने की बात कही गई है। यह मार्च परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के विरोध में आयोजित किया गया था।

स्थगन नोटिस में क्या मांगा गया

तिवारी ने लोकसभा महासचिव को संबोधित अपने नोटिस में सदन से प्रश्नकाल, शून्यकाल और अन्य सूचीबद्ध कार्यवाहियाँ स्थगित करने का आग्रह किया। उन्होंने इसे 'अत्यावश्यक जनहित का मामला' बताते हुए कहा कि इस पर व्यापक संसदीय बहस होनी चाहिए।

नोटिस में उन्होंने कहा, 'मैं प्रस्ताव रखता हूँ कि यह सदन प्रश्न काल, शून्य काल और दिन के अन्य सभी निर्धारित कामकाज को स्थगित करे ताकि 20 जुलाई 2026 को संसद तक मार्च के दौरान निहत्थे छात्र प्रदर्शनकारियों पर रैपिड एक्शन फोर्स द्वारा पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर चर्चा की जा सके, जिसमें 80 से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे।'

जवाबदेही और मुआवज़े की माँग

तिवारी ने अपने नोटिस में तर्क दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर न्यूनतम बल का प्रयोग किया जाना चाहिए था, किंतु कथित तौर पर अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया जो नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और पीड़ितों को मुआवज़ा दिलाने के लिए तत्काल संसदीय हस्तक्षेप की अपील की।

गौरतलब है कि यह मानसून सत्र के दौरान उठाया गया मुद्दा है, जो छात्र आंदोलन और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच आया है।

सीआरपीएफ की आंतरिक जाँच जारी

केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) द्वारा राजधानी में हुए व्यापक आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों की आंतरिक जाँच चल रही है। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जाँच टीम से अगले सप्ताह तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की उम्मीद है।

यह ऐसे समय में आया है जब पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर मानवाधिकार संगठन और विपक्षी दल पहले से ही सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं — विशेष रूप से इसके स्थायी दृष्टि-क्षति जैसे दुष्प्रभावों को देखते हुए।

पृष्ठभूमि: छात्र मार्च और पेपर लीक विवाद

20 जुलाई 2026 को बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के विरोध में नई दिल्ली में संसद की ओर मार्च निकाल रहे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि RAF जवानों ने इस दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया, जिससे 80 से अधिक लोग घायल हो गए। सुरक्षा बलों की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।

आगे क्या होगा

लोकसभा अध्यक्ष द्वारा स्थगन नोटिस स्वीकार किया जाएगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। CRPF की आंतरिक जाँच रिपोर्ट अगले सप्ताह अपेक्षित है, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। विपक्ष के दबाव को देखते हुए यह मुद्दा मानसून सत्र के शेष दिनों में संसद में गूँजता रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली जवाबदेही CRPF की आंतरिक जाँच पर निर्भर है — जो स्वभावतः स्वतंत्र नहीं होती। विपक्ष की माँग तब तक सांकेतिक बनी रहेगी जब तक सरकार स्वतंत्र जाँच या न्यायिक समीक्षा का रास्ता नहीं खोलती।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनीष तिवारी ने लोकसभा में किस मुद्दे पर बहस की माँग की?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 20 जुलाई 2026 को संसद तक निकाले गए छात्र मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर संसद में तत्काल बहस की माँग की है। उन्होंने इस घटना में 80 से अधिक लोगों के घायल होने का हवाला देते हुए इसे अत्यावश्यक जनहित का मामला बताया।
20 जुलाई 2026 का छात्र मार्च किस कारण हुआ था?
यह मार्च परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के विरोध में आयोजित किया गया था। छात्र नई दिल्ली में संसद की ओर मार्च कर रहे थे, जिसके दौरान सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया।
पैलेट गन के इस्तेमाल की जाँच कौन कर रहा है?
केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) द्वारा इस मामले की आंतरिक जाँच चल रही है। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जाँच टीम से अगले सप्ताह तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की उम्मीद है।
स्थगन प्रस्ताव नोटिस क्या होता है और इसका क्या असर होगा?
स्थगन प्रस्ताव नोटिस संसद की एक प्रक्रिया है जिसके ज़रिए सांसद किसी अत्यावश्यक मुद्दे पर सदन की सामान्य कार्यवाही रोककर तत्काल बहस कराने की माँग करते हैं। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इसे स्वीकार किया जाएगा या नहीं, यह उनके विवेक पर निर्भर है।
तिवारी ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
तिवारी ने सरकार से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — सदन की कार्यवाही स्थगित कर इस मुद्दे पर विस्तृत बहस, सुरक्षा अधिकारियों की जवाबदेही तय करना, और घायल पीड़ितों को मुआवज़ा दिलाना।
राष्ट्र प्रेस
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