तटरक्षक बल का काकीनाडा तट पर बचाव अभियान: 'सिग्मा पर्ल' के 6 चालक दल सदस्य फंसे
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय तटरक्षक बल ने 29 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश के काकीनाडा तट के निकट रवा ऑयलफील्ड के पास इंजन खराब होने से फंसे मालवाहक जहाज 'सिग्मा पर्ल' के 6 चालक दल सदस्यों को बचाने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया। मार्शल आइलैंड्स के झंडे तले चलने वाला यह जहाज विशाखापत्तनम बंदरगाह से सामान उतारकर सिंगापुर वापस लौट रहा था, जब चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के प्रभाव के कारण इसका इंजन बंद हो गया।
कैसे फंसा 'सिग्मा पर्ल'
सिग्मा पर्ल 27 अक्टूबर की रात 12 बजकर 17 मिनट पर विशाखापत्तनम बंदरगाह से रवाना हुआ था। उस समय भीषण चक्रवाती तूफान 'अर्नब' यानम की दिशा में बढ़ रहा था और 28 अक्टूबर की तड़के तट से टकराने वाला था। केजी बेसिन में रवा ऑयलफील्ड के पास पहुँचते ही जहाज का इंजन खराब हो गया, जिसे चक्रवात के प्रभाव से उत्पन्न समुद्री परिस्थितियों का परिणाम माना जा रहा है।
जहाजों की आवाजाही पर नज़र रखने वाले मरीन ट्रैफिक पोर्टल पर दो दिन पहले इस जहाज की स्थिति 'वेसल आउट ऑफ रेंज' दर्ज की गई थी। इसकी आखिरी दर्ज गतिविधि इसके तय रास्ते पर ही थी, जिससे स्पष्ट है कि जहाज अपने नियमित मार्ग पर ही संकट में फंसा।
बचाव अभियान का ब्यौरा
भारतीय तटरक्षक बल ने अभियान के तहत एक हेलीकॉप्टर और एक गश्ती जहाज तैनात किए। तटरक्षक बल के जवान पश्चिमी गोदावरी जिले के मोगलथुर गाँव स्थित हेलीपैड का उपयोग कर रहे थे। इसके अलावा, तटरक्षक बल का अपतटीय गश्ती जहाज 'सुजय' भी फंसे हुए जहाज की ओर रवाना किया गया।
पश्चिमी गोदावरी जिले के स्थानीय प्रशासन ने बचाव अभियान में तटरक्षक बल को हर संभव सहयोग प्रदान किया। यह ऑपरेशन उस समय चलाया जा रहा है जब चक्रवात 'अर्नब' के बाद समुद्री स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
चक्रवात 'अर्नब' की तबाही
28 अक्टूबर की तड़के बहुत भीषण चक्रवाती तूफान 'अर्नब' आंध्र प्रदेश के तट से टकराया। इस दौरान हवा की गति 125-135 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई, और हवा के झोंके 150 किमी प्रति घंटा तक पहुँचे।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात का प्रभाव सुबह 8 बजे तक, यानी लगभग 6 घंटे तक जारी रहा। तट पार करने के बाद तूफान कमजोर पड़ा, लेकिन इसने 4 लोगों की जान ले ली। तटीय जिलों में हज़ारों पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, और फसलों को भारी नुकसान पहुँचा।
आम जनता और समुद्री क्षेत्र पर असर
चक्रवात 'अर्नब' के तुरंत बाद इस बचाव अभियान की शुरुआत यह दर्शाती है कि तटवर्ती क्षेत्रों में समुद्री सुरक्षा की चुनौतियाँ कितनी गंभीर होती हैं। गौरतलब है कि चक्रवात के दौरान और तुरंत बाद समुद्र में निकले जहाजों के लिए जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
बंगाल की खाड़ी में ऐसे तूफान नए नहीं हैं — यह तट हर साल मानसून और पूर्व-मानसून सीज़न में चक्रवाती खतरों का सामना करता है। 'सिग्मा पर्ल' का यह मामला उन परिस्थितियों को उजागर करता है जब व्यावसायिक शिपिंग कंपनियाँ तूफान की चेतावनियों के बावजूद जहाज संचालित करती हैं।
आगे की स्थिति
फिलहाल सभी 6 चालक दल सदस्यों की सुरक्षित वापसी के लिए अभियान जारी है। तटरक्षक बल के अधिकारियों ने बताया है कि परिस्थितियों को देखते हुए अभियान में हर संभव संसाधन लगाए गए हैं। समुद्र की मौजूदा स्थिति में सुधार के साथ बचाव कार्य में तेज़ी आने की उम्मीद है।