इमरजेंसी की बर्बरता याद करे कांग्रेस, तब करे बिहार पर टिप्पणी: जदयू महासचिव श्याम रजक
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने 1 अगस्त को पटना में कई अहम मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी — जिनमें बिहार में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस बर्बरता, राम मंदिर चंदा विवाद पर पप्पू यादव का प्रतीकात्मक प्रदर्शन और कांग्रेस की तथ्य-जाँच समिति शामिल हैं। रजक ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बिहार पर कोई भी नतीजा निकालने से पहले पार्टी को इमरजेंसी काल में की गई अपनी बर्बरता का आत्म-मंथन करना चाहिए।
इमरजेंसी का संदर्भ और कांग्रेस पर निशाना
रजक ने कहा कि बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए कांग्रेस को एक बार इंदिरा गांधी के शासनकाल को याद करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस को यह पता होना चाहिए कि किस तरह उनके शासनकाल में हम लोगों को प्रताड़ित किया गया था। हमें मारने की कोशिश की गई थी। मैं भी मर ही जाता — वो तो शुक्र है कि मैं बच गया।' उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को किसी भी ठोस फैसले पर पहुँचने से पहले अपने गिरेबान में झाँकना चाहिए।
कांग्रेस की तथ्य-जाँच समिति पर सवाल
रजक ने कहा कि यदि कांग्रेस बिहार में छात्रों पर हुए अत्याचार की जाँच के लिए कोई कदम उठाना चाहती है, तो उन्हें इसका स्वागत है। उन्होंने कहा, 'निश्चित तौर पर कांग्रेस एक विपक्षी पार्टी है — हम नहीं रोकेंगे।' हालाँकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस को पहले यह आत्म-परीक्षण करना होगा कि क्या उनकी नैतिकता उन्हें ऐसा करने की इजाज़त देती है।
राम मंदिर चंदा विवाद और विपक्ष की रणनीति
संसद के बाहर पप्पू यादव द्वारा राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर किए गए प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन पर रजक ने कहा कि आज की तारीख में कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। उनके अनुसार, 'विपक्षी दलों को यह समझ नहीं आ रहा कि केंद्र सरकार को कैसे घेरें।' उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को सिर्फ गरीबी की बात नहीं करनी चाहिए, बल्कि गरीबी के दर्द को वास्तव में महसूस करना होगा।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रजक का यह बयान बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें विपक्ष को ऐतिहासिक रूप से कमज़ोर साबित करने की कोशिश की जाती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है और विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। आगामी दिनों में यह देखना होगा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस बयानबाज़ी का क्या जवाब देते हैं।