मध्य प्रदेश विधानसभा के बाहर धरने पर बैठे कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय, चार सत्रों से प्रश्न निरस्त होने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने 20 जुलाई को मध्य प्रदेश विधानसभा परिसर के बाहर धरना दिया और विधानसभा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सहकारिता विभाग और उनके क्षेत्र के शक्कर कारखानों से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रश्न को लगातार चार विधानसभा सत्रों से बिना कोई स्पष्ट कारण बताए सदन की कार्यवाही से बाहर रखा जा रहा है। मानसून सत्र के दौरान महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष बैठकर उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से न्याय की मांग की।
मुख्य घटनाक्रम
उपाध्याय ने बताया कि वह पिछले लगभग एक वर्ष से विधानसभा के प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, परंतु उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। इस बार भी प्रमुख सचिव से मुलाकात कर प्रश्न निरस्त किए जाने का कारण पूछा गया, किंतु कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
विधायक ने धरना शुरू करने से पहले दोपहर 12 बजे की सूचना प्रमुख सचिव को लिखित रूप में दे दी थी। इसके बावजूद उनकी शिकायत का कोई समाधान नहीं निकाला गया।
विधायक के अधिकारों पर सवाल
उपाध्याय ने कहा कि जनता ने उन्हें लगभग 2.70 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करने के लिए विधानसभा भेजा है। उनके शब्दों में, 'अगर मैं अपने क्षेत्र की जनता की समस्याएं सदन में पूरी ईमानदारी से नहीं रख पा रहा हूं, तो यह मेरे साथ और मेरे क्षेत्र की जनता के साथ कुठाराघात है।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांग पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा — चाहे बारिश हो, धूप हो या कोई भी परिस्थिति। यदि इस सत्र में समाधान नहीं निकला, तो अगले विधानसभा सत्र में भी धरना देने की चेतावनी उन्होंने दी।
विधानसभा अध्यक्ष को पत्राचार
कांग्रेस विधायक ने बताया कि वह कई बार विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिख चुके हैं और अपनी शिकायत से अवगत करा चुके हैं। हर बार उन्हें यही निर्देश मिला कि वह प्रमुख सचिव से संपर्क करें। प्रमुख सचिव को भी कई बार लिखित शिकायत दी गई, लेकिन प्रश्न निरस्त होने का कोई ठोस कारण अब तक नहीं बताया गया।
आगे की राह
उपाध्याय ने साफ कहा कि जब तक सदन चलेगा, वह धरने पर बैठे रहेंगे। यह मामला विधायकों के संसदीय अधिकारों और विधानसभा की प्रश्नकाल प्रक्रिया की पारदर्शिता पर व्यापक बहस को आमंत्रित करता है। अब देखना होगा कि विधानसभा प्रशासन इस विरोध के बाद कोई स्पष्टीकरण देता है या नहीं।