मध्य प्रदेश: कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय का विधानसभा के बाहर धरना, चार सत्रों से प्रश्न निरस्त होने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र 2025 के दौरान कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने 20 जुलाई को भोपाल स्थित विधानसभा परिसर के बाहर शांतिपूर्ण धरना दिया। उनका आरोप है कि सहकारिता विभाग से जुड़े उनके एक महत्वपूर्ण प्रश्न को लगातार चार विधानसभा सत्रों से बिना कोई स्पष्ट कारण बताए सदन की कार्यवाही से बाहर रखा जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
उपाध्याय ने दोपहर 12 बजे से विधानसभा परिसर के बाहर महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना शुरू किया। उन्होंने कहा कि धरना शुरू करने से पूर्व उन्होंने विधानसभा के प्रमुख सचिव को लिखित रूप से सूचित कर दिया था, फिर भी उनकी शिकायत का कोई समाधान नहीं निकाला गया।
उनका प्रश्न उनके विधानसभा क्षेत्र के शक्कर कारखानों से संबंधित सहकारिता विभाग की प्रक्रियाओं पर केंद्रित है। उनके अनुसार, यह एक ही प्रश्न है जिसे चार बार से लगातार निरस्त किया जा रहा है और हर बार कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।
विधायक के अधिकारों का सवाल
उपाध्याय ने कहा कि जनता ने उन्हें लगभग 2.70 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करने के लिए विधानसभा भेजा है। यदि सदन में अपने क्षेत्र के लोगों के मुद्दे उठाने का अवसर ही नहीं मिलेगा, तो यह न केवल उनके अधिकारों का हनन है, बल्कि क्षेत्र की जनता के साथ भी अन्याय है।
उन्होंने कहा, 'अगर मैं अपने क्षेत्र की जनता की समस्याएं सदन में पूरी ईमानदारी से नहीं रख पा रहा हूं, तो यह मेरे साथ और मेरे क्षेत्र की जनता के साथ कुठाराघात है।'
विधानसभा अध्यक्ष और प्रमुख सचिव से संपर्क
कांग्रेस विधायक के अनुसार, वह पिछले लगभग एक वर्ष से विधानसभा के प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को भी कई बार पत्र लिखकर अपनी शिकायत से अवगत कराया, लेकिन हर बार उन्हें प्रमुख सचिव से संपर्क करने की सलाह दी गई।
इस बार भी उन्होंने प्रमुख सचिव से मुलाकात कर प्रश्न निरस्त किए जाने का कारण पूछा, परंतु कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
धरने पर अडिग रहने का संकल्प
उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी परिस्थिति में — चाहे बारिश हो या तेज धूप — धरना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, 'जब तक सदन चलेगा, मैं धरने पर बैठा रहूँगा। यदि इस सत्र में समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो अगले विधानसभा सत्र में भी इसी तरह धरना दूंगा।'
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ दल के बीच विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल की प्रभावशीलता को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। गौरतलब है कि विधायकों के प्रश्न निरस्त किए जाने की शिकायतें अन्य राज्यों की विधानसभाओं में भी सामने आती रही हैं, जो विधायी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर व्यापक सवाल उठाती हैं।