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मध्य प्रदेश: कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय का विधानसभा के बाहर धरना, चार सत्रों से प्रश्न निरस्त होने का आरोप

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मध्य प्रदेश: कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय का विधानसभा के बाहर धरना, चार सत्रों से प्रश्न निरस्त होने का आरोप

सारांश

कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय का धरना सिर्फ एक प्रश्न की लड़ाई नहीं — यह विधायी अधिकारों की लड़ाई है। चार सत्रों से बिना कारण निरस्त होता प्रश्न और 2.70 लाख मतदाताओं की आवाज़ दबाने का आरोप — यह मामला मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यप्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने 20 जुलाई को भोपाल में मध्य प्रदेश विधानसभा के बाहर धरना दिया।
उनका आरोप है कि सहकारिता विभाग और शक्कर कारखानों से जुड़ा उनका प्रश्न लगातार चार सत्रों से बिना कारण निरस्त किया जा रहा है।
उपाध्याय लगभग एक वर्ष से विधानसभा के प्रमुख सचिव और अध्यक्ष को पत्र लिख रहे हैं, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
उनके विधानसभा क्षेत्र में लगभग 2.70 लाख मतदाता हैं, जिनके हितों का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार वह माँग रहे हैं।
विधायक ने घोषणा की है कि जब तक समस्या का समाधान नहीं होता, सत्र के दौरान धरना जारी रहेगा; ज़रूरत पड़ी तो अगले सत्र में भी।

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र 2025 के दौरान कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने 20 जुलाई को भोपाल स्थित विधानसभा परिसर के बाहर शांतिपूर्ण धरना दिया। उनका आरोप है कि सहकारिता विभाग से जुड़े उनके एक महत्वपूर्ण प्रश्न को लगातार चार विधानसभा सत्रों से बिना कोई स्पष्ट कारण बताए सदन की कार्यवाही से बाहर रखा जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

उपाध्याय ने दोपहर 12 बजे से विधानसभा परिसर के बाहर महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना शुरू किया। उन्होंने कहा कि धरना शुरू करने से पूर्व उन्होंने विधानसभा के प्रमुख सचिव को लिखित रूप से सूचित कर दिया था, फिर भी उनकी शिकायत का कोई समाधान नहीं निकाला गया।

उनका प्रश्न उनके विधानसभा क्षेत्र के शक्कर कारखानों से संबंधित सहकारिता विभाग की प्रक्रियाओं पर केंद्रित है। उनके अनुसार, यह एक ही प्रश्न है जिसे चार बार से लगातार निरस्त किया जा रहा है और हर बार कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।

विधायक के अधिकारों का सवाल

उपाध्याय ने कहा कि जनता ने उन्हें लगभग 2.70 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करने के लिए विधानसभा भेजा है। यदि सदन में अपने क्षेत्र के लोगों के मुद्दे उठाने का अवसर ही नहीं मिलेगा, तो यह न केवल उनके अधिकारों का हनन है, बल्कि क्षेत्र की जनता के साथ भी अन्याय है।

उन्होंने कहा, 'अगर मैं अपने क्षेत्र की जनता की समस्याएं सदन में पूरी ईमानदारी से नहीं रख पा रहा हूं, तो यह मेरे साथ और मेरे क्षेत्र की जनता के साथ कुठाराघात है।'

विधानसभा अध्यक्ष और प्रमुख सचिव से संपर्क

कांग्रेस विधायक के अनुसार, वह पिछले लगभग एक वर्ष से विधानसभा के प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को भी कई बार पत्र लिखकर अपनी शिकायत से अवगत कराया, लेकिन हर बार उन्हें प्रमुख सचिव से संपर्क करने की सलाह दी गई।

इस बार भी उन्होंने प्रमुख सचिव से मुलाकात कर प्रश्न निरस्त किए जाने का कारण पूछा, परंतु कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

धरने पर अडिग रहने का संकल्प

उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी परिस्थिति में — चाहे बारिश हो या तेज धूप — धरना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, 'जब तक सदन चलेगा, मैं धरने पर बैठा रहूँगा। यदि इस सत्र में समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो अगले विधानसभा सत्र में भी इसी तरह धरना दूंगा।'

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ दल के बीच विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल की प्रभावशीलता को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। गौरतलब है कि विधायकों के प्रश्न निरस्त किए जाने की शिकायतें अन्य राज्यों की विधानसभाओं में भी सामने आती रही हैं, जो विधायी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर व्यापक सवाल उठाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि विधायी लोकतंत्र की संरचनागत खामियों का प्रतिबिंब है। प्रश्नकाल विपक्ष का सबसे महत्वपूर्ण संसदीय हथियार है, और यदि प्रश्न बिना कारण बताए बार-बार निरस्त होते हैं, तो यह जवाबदेही की पूरी प्रक्रिया को खोखला करता है। गौरतलब है कि इस मामले में न तो विधानसभा अध्यक्ष ने सीधे हस्तक्षेप किया और न ही प्रमुख सचिव ने कोई लिखित कारण दिया — जो प्रक्रियागत पारदर्शिता की गंभीर कमी को उजागर करता है। मुख्यधारा की कवरेज इसे 'विपक्षी नाटक' के रूप में देख सकती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रश्न निरस्त करने की प्रक्रिया पर्याप्त रूप से पारदर्शी और जवाबदेह है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने धरना क्यों दिया?
पंकज उपाध्याय ने मध्य प्रदेश विधानसभा के बाहर धरना इसलिए दिया क्योंकि सहकारिता विभाग और उनके क्षेत्र के शक्कर कारखानों से संबंधित उनका प्रश्न लगातार चार विधानसभा सत्रों से बिना कोई स्पष्ट कारण बताए निरस्त किया जा रहा है। उन्होंने इसे अपने विधायी अधिकारों और 2.70 लाख मतदाताओं के हितों पर हमला बताया।
पंकज उपाध्याय का प्रश्न किस विषय पर था?
उनका प्रश्न सहकारिता विभाग से संबंधित उनके विधानसभा क्षेत्र के शक्कर कारखानों की प्रक्रियाओं पर था। उनके अनुसार, यह एक ही प्रश्न है जिसे चार बार से लगातार निरस्त किया जा रहा है।
क्या उपाध्याय ने विधानसभा अध्यक्ष से संपर्क किया था?
हाँ, उपाध्याय ने विधानसभा अध्यक्ष को कई बार पत्र लिखे, लेकिन हर बार उन्हें प्रमुख सचिव से संपर्क करने की सलाह दी गई। उन्होंने प्रमुख सचिव को भी लिखित शिकायतें दीं और धरना शुरू करने से पहले भी सूचित किया, फिर भी कोई समाधान नहीं निकला।
उपाध्याय का धरना कब तक जारी रहेगा?
उन्होंने घोषणा की है कि जब तक मानसून सत्र चलेगा, धरना जारी रहेगा। यदि इस सत्र में समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वह अगले विधानसभा सत्र में भी धरना देंगे।
इस मामले से मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यप्रणाली पर क्या सवाल उठते हैं?
यह मामला विधानसभा में प्रश्न निरस्त करने की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। जब एक निर्वाचित विधायक को बार-बार बिना कारण बताए प्रश्न निरस्त किए जाने का सामना करना पड़े और वर्षभर की शिकायतों के बाद भी कोई लिखित जवाब न मिले, तो यह विधायी जवाबदेही की संरचनागत कमज़ोरी को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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