कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दुबे का बयान: संवैधानिक स्थानों पर नमाज पढ़ना है गलत
सारांश
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मुंबई, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के मालेगांव में म्युनिसिपल इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट कार्यालय में मुस्लिम कर्मचारियों द्वारा नमाज पढ़ने का एक वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दुबे ने इस पर टिप्पणी करते हुए इसे संविधान के खिलाफ बताया।
मनीष दुबे ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "यदि कहीं नमाज पढ़ी जा रही है, तो इसका कारण समझना बहुत आवश्यक है। संविधान के अनुसार, किसी भी संविधानिक स्थान पर नमाज पढ़ना गलत है, चाहे वह किसी भी धर्म का अनुयायी हो। क्या उन लोगों ने नमाज पढ़ने के लिए अनुमति ली थी?"
उन्होंने आगे कहा, "किसी एक धर्म की पूजा विधि को संवैधानिक स्थान पर नहीं किया जा सकता। संविधानिक स्थान सभी के लिए समान होते हैं। आज कोई नमाज पढ़ रहा है, कल कोई हिंदू कह सकता है कि वह यहाँ आरती करेगा, फिर कोई ईसाई प्रार्थना करने आएगा, तो इस तरह की स्थिति संविधानिक स्थानों के विचार को समाप्त कर देगी। मैं इसकी निंदा करता हूँ और हमें समझना होगा कि ऐसा क्यों हुआ।"
उन्होंने भाजपा नेता किरीट सोमैया द्वारा कर्मचारियों के इस्तीफे की मांग पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सोमैया हर मुद्दे पर पत्र लिखते रहते हैं और उनके पास काम की कमी है। यह प्रशासन की जाँच का विषय है और प्रशासन को उचित निर्णय लेना चाहिए, जो जनसामान्य की भावनाओं को देखते हुए हो।
कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा, "स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एक अलग विचारधारा के व्यक्ति हैं। वह गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की विचारधारा के साथ काम कर रहे हैं। सही बातों को रखकर लोकप्रियता हासिल करना कठिन होता है। मुझे लगता है कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता से कुछ लोगों को चिंता हो रही है और उन्हें फंसाने के लिए साजिश की जा रही है।"
उन्होंने यह सवाल उठाया कि "यदि देश के ऋषि-महर्षि और शंकराचार्य सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा? इसे लेकर प्रशासन को निर्णय लेना चाहिए कि ऐसे व्यक्तियों को झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश हो रही है। इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे।"